पिछले कुछ दशकों में दिखे इन मुक्काबाज़ों की फिल्में

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रस्टिक फ़िल्में बनाने के लिए मशहूर अनुराग कश्यप अगर बॉक्सिंग को अपनी फ़िल्म का हिस्सा बनाएंगे तो उसका अंदाज़े-बयां भी जुदा होगा। अनुराग बॉक्सिंग पर एक फ़िल्म लाये हैं। टाइटल मुक्काबाज़ है, जो 12 जनवरी से सिनेमाघरों में उतर रही है।

कहानी का नायक मुक्केबाज़ है, लेकिन फ़िल्म प्रेम कहानी है, जिसमें सियासत के पंच हैं। सेंसर बोर्ड ने मुक्काबाज़ को यूए सर्टिफिकेट दिया है। उत्तर प्रदेश में खेलों में होने वाले सियासत के खेल को इसमें दिखाया गया है। फ़िल्म में विनीत कुमार मेल लीड में है, जो स्मॉल टाउन के बॉक्सर बने हैं, जबकि ज़ोया हुसैन फ़ीमेल लीड में हैं, जो विनीत की प्रेमिका का किरदार है। मुक्काबाज़ में रवि किशन कोच के किरदार में दिखेंगे।

मुक्काबाज़ की रिलीज़ के मौक़े पर एक नज़र डालते हैं ऐसी 5 फ़िल्मों पर, जिनमें बॉक्सिं 2016 में आयी साला खड़ूस में रियल लाइफ़ बॉक्सर रितिका सिंह ने मुख्य भूमिका निभायी। इस फ़िल्म में आर माधवन उनके कोच के रोल में दिखायी दिये। कहानी एक असफल और खड़ूस बॉक्सर द्वारा एक साधारण, लेकिन तुनकमिज़ाज लड़की को चैंपियन बनाने पर आधारित थी। साला खड़ूस को सुधा कोंगड़ा ने डायरेक्ट किया।

2015 में प्रियंका चोपड़ा बॉक्सर बनकर पर्दे पर उतरीं। उमंग कुमार निर्देशित ये फ़िल्म चैंपियन बॉक्सर मैरी कॉम की बायोपिक फ़िल्म थी। प्रियंका ने मैरी कॉम के किरदार को इतनी वास्तविकता के साथ पर्दे पर जीया कि असली और नक़ली का फ़र्क मिटा दिया।

बॉक्सिंग पर बनी फ़िल्मों में 2007 में आयी अपने भी यादगार मानी जाती है, जिसमें धर्मेंद्र ने रिटायर्ड बॉक्सर का किरदार निभाया था, जबकि बेटे सनी देओल और बॉबी देओल भी लीड रोल्स में थे। बॉक्सिंग के खेल में हुई एक पुरानी हार का बदला लेने के लिए धर्मेंद्र सनी को तैयार करना चाहते हैं, मगर उन्हें बॉक्सिंग में दिलचस्पी नहीं होती। मगर, अंत में सनी पिता के अपमान का बदला लेने के लिए रिंग में उतरते हैं। इस फ़िल्म का निर्देशन अनिल शर्मा ने किया था।