28 साल बाद निकली राम रथ यात्रा, भाजपा को होगा फायदा   

भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनाव में जीत के लिए तैयारी शुरू कर दी है. राम मंदिर के नाम पर 28 साल बाद फिर अयोध्या से श्रीराम राज्य रथ यात्रा निकाली गई. यात्रा को कारसेवकपुरम से विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने रवाना किया. रथयात्रा 6 राज्यों से 41 दिन में करीब 6 हजार किलोमीटर की दूरी तय करेगी. यात्रा केरल के तिरुवनंतपुरम में समाप्त होगी.

रथ यात्रा का उद्देश्य अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग करना है. इस रथ यात्रा का नेतृत्व विश्‍व हिंदू परिषद करेगी. वहीं विश्‍व हिंदू परिषद का कहना है कि संगठन यात्रा का समर्थन कर रही है, पर उसका हिस्सा नहीं है. यात्रा का समापन राम नवमी के दिन 25 मार्च को होगा. श्री रामदास मिशन यूनिवर्सल सोसाइटी का कहना है कि देश में लोग रामराज्य चाहते हैं. सरकार को 2019 तक अयोध्या में राम मंदिर बनवा देना चाहिए.

रथ यात्रा के दौरान 10 लाख लोगों से हस्ताक्षर करवाए जाएंगे. रथ यात्रा की समाप्ति के बाद तिरुवनंतपुरम में पद्मनाभ मंदिर में एक सम्मेलन का आयोजन होगा. इस रथयात्रा के सियासी मकसद भी बताए जा रहे हैं. इस यात्रा से भाजपा को  2019 लोकसभा चुनाव में फायदे की उम्मीद है. इस रथ यात्रा से भाजपा को कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी फायदा मिलने की उम्मीद है. राम राज्य रथ यात्रा के लिए विशेष रूप से रथ तैयार किए गए हैं, जिसे बनाने पर ही 25 लाख रुपए खर्च हुए हैं. रथ की लंबाई 28 फीट है. रथ पर राम-सीता और हनुमान जी की भी मूर्तियां हैं.

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