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स्टेडियम और अन्य सुविधाओं को तरस रही बेगूसराय की खेल प्रतिभा

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stadiumसुविधाओं और संसाधनों के अभाव में किस तरह से प्रतिभाएं बेकार हो जाती हैं इसका जीता-जागता उदाहरण है बेगूसराय. विधान चन्द्र मिश्रा, शिवाजी सिंह, जैसे राष्ट्रीय फुटबॉलर, संजीव कुमार, लाला शिवशंकर जैसे राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी, मनीषी जैसे अन्तरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी, पराग अग्रवाल जैसे अन्तरराष्ट्रीय टेबुल टेनिस खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक, राजेश चौधरी (अर्जुन पुरस्कार प्राप्त) जैसे अन्तरराष्ट्रीय पाल नौकायन खिलाड़ी बेगूसराय की धरती की ही उपज हैं. महिला फुटबॉल, महिला एवं पुरूष कबड्‌डी, महिला एवं पुरूष वॉलीबॉल, ताइक्वांडो आदि खेलों में बेगूसराय का कोई सानी नहीं है.

जिले के लगभग एक हजार खिलाड़ी विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, रेलवे, बीएसएनएल, बीएसआरटीसी, सीसीएल, बिहार पुलिस, एसएसबी, बीएसएफ आदि में नौकरी प्राप्त कर चुके हैं. वर्त्तमान में बरौनी महिला फुटबॉल टीम की सत्रह खिलाड़ियों का उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के आधार पर सीआरपीएफ में चयन हुआ है. लेकिन इतनी प्रतिभा होने के बावजूद यहां के खिलाड़ियों को सरकार या सिस्टम की तरफ से किसी भी तरह की सुविधा या संसाधन उपलब्ध नहीं है. बेगूसराय के खिलाड़ी एक अदद स्टेडियम के लिए तरस रहे हैं.

ऐसा भी नहीं है कि बेगूसराय की खेल प्रतिभा इसलिए सरकारी उपेक्षा की शिकार है कि यहां खेल प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं होतीं. बेगूसराय प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी करता आ रहा है. 2017-18 में बेगूसराय में राज्य एवं राष्ट्रीय फुटबॉल चैम्पियनशिप का आयोजन तो ऐतिहासिक था. बेगूसराय फुटबॉल एसोसिएशन के मानद महासचिव, बिहार फुटबॉल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं बिहार ओलम्पिक एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष मनोज कुमार शर्मा के प्रयासों से बेगूसराय में बिहार राज्य अन्तर जिला महिला फुटबॉल (सैयद एजाज हुसैन कप) चैम्पियनशिप का आयोजन हुआ. इस चैम्पियनशिप में प्रदेश के 20 जिलों की महिला टीमों ने भाग लिया. इसी प्रकार बिहार राज्य अन्तर जिला पुरूष फुटबॉल (मोइनुलहक कप) चैम्पियनशिप का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के 38 जिलों एवं रेलवे की चार टीमों ने भाग लिया. सबसे रोमांचक रहा देश के सबसे बड़े पुरूष फुटबॉल चैम्पियनशिप (अन्तर राज्य) संतोष ट्रॉफी (पूर्वी क्षेत्र) का बेगूसराय में आयोजन.

1975 में पहली बार बिहार संतोष ट्रॉफी के आयोजन का मेजबान बना था, जब मोइनुलहक स्टेडियम, पटना में टुर्नामेन्ट का आयोजन किया गया था. उसके करीब साढ़े चार दशक बाद 2018 में फिर से बिहार में संतोष ट्रॉफी चैम्पियनशिप (पूर्वी क्षेत्र) का आयोजन किया गया. बेगूसराय में आयोजित इस चैम्पियनशिप में मेजबान बिहार के अलावा ओड़ीशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम की फुटबॉल टीमों ने भाग लिया. अपने राज्य की टीम के साथ आए, सिक्किम की टीम के मुख्य प्रशिक्षक, भारत के पूर्व कप्तान, अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित बाइचुंग भूटिया बेगूसराय में आकर्षण का केंद्र रहे.

यह विडम्बना ही कही जाएगी कि इतनी प्रतिभा होने के बावजूद खेलों की इस नर्सरी को एक भी राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम नसीब नहीं है, जबकि बेगूसराय में बरौनी रिफाइनरी, बीटीपीएस रेलवे गरहारा जैसे प्रतिष्ठान मौजूद हैं. बेगूसराय मुख्यालय में स्थित गांधी स्टेडियम अब केवल नाम का रह गया है. असलियत में यह खंडहर में बदल चुका है, जो जुआरियों के अड्‌डे और आवारा जानवरों का चारागाह बनकर रह गया है. बिहार सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, विधान पार्षद, जिला पदाधिकारी, महापौर आदि दशकों से गांधी स्टेडियम के जीर्णोद्धार की घोषणा करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक वे घोषणाएं जमीन पर नहीं उतर सकी हैं.

पुलिस लाइन एवं बीएमपी-8 में एक-एक स्टेडियम है, लेकिन सुरक्षा कारणों से यहां बाहरी खिलाड़ियों के अभ्यास पर रोक है. एक स्टेडियम बरौनी रिफाइनरी के पास है, लेकिन यहां भी बाहर के खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर सकते. बरौनी थर्मल एवं रेलवे गरहारा के पास स्टेडियम नहीं है. जिले का एकमात्र यमुना भगत स्टेडियम, खेलगांव, बरौनी फ्लैग में है, जिसका निर्माण ग्रामीणों ने जनसहयोग से किया है. वह स्तरीय है, जहां प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के खेलों का आयोजन होता है. लेकिन इस स्टेडियम में भी जल निकासी, गैलरी एवं प्रकाश आदि की व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत है.

लगभग दस वर्ष पूर्व बिहार सरकार ने जिले के कॉलेजिएट स्कूल, मटिहानी स्कूल, आरकेसी स्कूल, बरौनी कॉलेज, नौलागढ़ स्कूल, मंझौल स्कूल सहित दर्जन-भर शिक्षण संस्थानों में स्टेडियम/फुटबॉल मैदान निर्माण का निर्णय सर्वे के आधार पर लिया था. इसके लिए राशि भी आ गई थी. लेकिन तब से अब तक के जिला पदाधिकारियों व स्थानीय जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण आज तक इस दिशा में कुछ भी ठोस काम सामने नहीं आ सका. सिर्फ सुविधाएं व संसाधन ही नहीं, बल्कि खेल से जुड़े अधिकारियों का भी जिले में अभाव है. पिछले एक दशक से बेगूसराय में उपाधीक्षक, शारीरिक शिक्षा/जिला खेल पदाधिकारी का पद रिक्त है, जबकि जिले में खेल प्रतिभा की खान है. स्तरीय संसाधनों के अभाव में भी जिले के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर के खेलों में पदक प्राप्त कर बेगूसराय का परचम लहरा रहे हैं. यदि खिलाड़ियों को संसाधन, सुविधाएं व प्रशिक्षण मिले तो बेगूसराय की खेल प्रतिभा को उचित मुकाम मिल सकता है.

सुरेश चौहान Contributor|User role
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