श्रेया घोषाल को इसीलिए कहा जाता है सुरों कि रानी

म्यूजिक शो सारेगामापा के दौरान श्रेया घोषाल की लाइफ में टर्निंग पॉइंट आया, जब उन्हें निर्देशक संजय लीला भंसाली द्वारा अपनी फिल्म में गाने का मौका दिया गया. संजय की मां इस शो को बहुत देखा करती थीं. एक बार श्रेया को परफॉर्म करता देखकर संजय की मां ने उन्हें फोन किया और सारेगामापा में परफॉर्म कर रही श्रेया को देखने के लिए बोला. श्रेया की परफॉरमेंस देखकर संजय लीला भंसाली ने उसी समय मन बना लिया कि वे अपनी अगली फिल्म देवदास में पारो की आवाज़ के लिए श्रेया को ही मौका देंगे. श्रेया ने इस फिल्म में पांच गाने गाए.

नई दिल्ली (प्रवीण कुमार) : बॉलीवुड में लंबे अर्से से श्रेया घोषाल एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज के चलते कम उम्र में ही बहुत कुछ हासिल कर लिया है. 12 मार्च 1984 को मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल में जन्मी श्रेया इस साल 34 साल की हो जाएंगी. श्रेया आज बॉलीवुड में सुरों की रानी हैं, जिनके लगभग सभी गानों को लोग सुनना पसंद करते हैं. वे न सिर्फ रोमांटिक गाने गाती हैं, बल्कि उन्होंने आइटम सॉन्ग में भी अपनी आवाज देकर सबको अपना मुरीद बनाया है. इस बंगाली बाला ने हिंदी के अलावा बंगाली, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, भोजपुरी, मराठी, उर्दू, पंजाबी एवं मलयालम भाषा में भी गाने गाए हैं. हाल ही में श्रेया का जादू फिल्म पद्मावत में दिखा, जिसमें उनके द्वारा गाया गया घूमर सॉन्ग अब तक लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. दीपिका पादुकोण पर फिल्माया गया यह गाना देशभर में बड़े पैमाने पर हिट साबित हुआ है. श्रेया ने चार नेशनल अवार्ड के साथ-साथ दूसरे बहुत से अवार्ड भी अपने नाम किए हैं. श्रेया को अपने पहले ही बॉलीवुड गाने के लिए ही नेशनल अवार्ड मिल गया था. तब उनकी उम्र मात्र 16 साल थी. श्रेया बचपन से ही सिंगर बनना चाहती थीं. मात्र 4 साल की उम्र में उन्होंने गायन सीखना शुरू कर दिया था.

श्रेया का जन्म बंगाली, हिन्दू परिवार में हुआ था. लेकिन इनकी परवरिश राजस्थान के रावतभाटा में हुई, जो कोटा के पास है. उनके पिता विश्वजीत घोषाल एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, जो न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन में काम किया करते थे. श्रेया की मां शर्मिष्ठा पोस्ट ग्रेजुएट हैं. वे भी बहुत अच्छी गायक हैं. श्रेया ने बचपन से अपनी मां को गाते और हारमोनियम बजाते सुना था. चार साल की उम्र से श्रेया ने इसकी ट्रेनिंग अपने घर पर ही लेनी शुरू कर दी थी. श्रेया अपनी मां को ही पहला गुरु मानती हैं. श्रेया जब 6 साल की थीं, तभी से उनकी मां ने उन्हें क्लासिकल म्यूजिक की ट्रेनिंग शुरू करा दी.

2000 में श्रेया ने ज़ी टीवी के प्रसिद्ध म्यूजिक कार्यक्रम सारेगामापा चाइल्ड स्पेशल में हिस्सा लिया था, जिसे उस समय के सुप्रसिद्ध गायक सोनू निगम होस्ट किया करते थे. श्रेया ने इस शो में अपनी आवाज़ से सबको अपना दीवाना बना लिया. वे इस शो में विजयी रही थीं. इसी शो के दौरान श्रेया घोषाल की लाइफ में टर्निंग पॉइंट आया, जब उन्हें निर्देशक संजय लीला भंसाली द्वारा अपनी फिल्म में गाने का मौका दिया गया. संजय की मां इस शो को बहुत देखा करती थीं. एक बार श्रेया को परफॉर्म करता देखकर संजय की मां ने उन्हें फोन किया और सारेगामापा में परफॉर्म कर रही श्रेया को देखने के लिए बोला. श्रेया की परफॉरमेंस देखकर संजय लीला भंसाली ने उसी समय मन बना लिया कि वे अपनी अगली फिल्म देवदास में पारो की आवाज़ के लिए श्रेया को ही मौका देंगे. श्रेया ने इस फिल्म में पांच गाने गाए. उन्होंने फिल्म की मुख्य किरदार पारो के रूप में ऐश्वर्या राय को आवाज़ दी.

श्रेया ने सबसे पहले 1998 में एक बंगाली एल्बम की रिकॉर्डिंग की थी. इसके साथ ही उन्होंने कई धार्मिक गाने भी गाए थे. श्रेया ने बॉलीवुड के लिए पहला गाना बैरी पिया रिकॉर्ड किया था, उस समय इनकी उम्र 16 साल थी. इसे उन्होंने उदित नारायण के साथ गया था. इसी गाने के लिए श्रेया को नेशनल अवार्ड भी मिला, साथ ही इस फिल्म के गानों के लिए उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर के भी कई अवार्ड मिले. श्रेया ने फिल्म पहेली के लिए धीरे चलना गाना गाया, जिसके लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा नेशनल अवार्ड मिला. फिल्म जिस्म के लिए जादू है नशा है एवं चलो तुमको लेकर गाने के लिए उन्हें कई अवार्ड भी मिले. इसके बाद तो श्रेया के पास काम की लाइन ला गई. श्रेया ने इसके बाद अनु मालिक, हिमेश रेशमिया, नदीम-श्रवण, शंकर एहसान लोय, प्रीतम, विशाल-शेखर, ए आर रहमान जैसे बड़े बड़े म्यूजिक डायरेक्टर्स के साथ काम किया. इसके अलावा श्रेया की पर्सनल लाइफ की बात की जाए, तो उन्होंने 5 फ़रवरी 2015 को एक प्राइवेट सेरेमनी में बंगाली तरीके से अपने बचपन के दोस्त शिलादित्य से शादी कर ली.

श्रेया ने फिल्म रोग, ज़हर, परिणीता, विवाह, वो लम्हे, डोर, लगे रहो मुन्ना भाई, और कृष जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दी है. एक समय था जब श्रेया की सुरीली आवाज़ के साथ-साथ क्लास, स्टाइल और क्वालिटी को देखते हुए कई लोग उन्हें बॉलीवुड की महान प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक के बराबर में देखने लगे थे.

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