मोदी सरकार बेच रही है 42 साल पुरानी कंपनी, आखिर क्या है वजह

dredging-corp

केंद्र सरकार ने सरकारी खजाने को ध्यान में रखते हुए एक अहम् फैसला किया है. इस फैसले के तहत मोदी सरकार 42 साल पुरानी मिनी रत्न कंपनी ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन की पूरी हिस्सेदारी बेचने जा रही है. बता दें कि सरकार की ड्रेजिंग कॉर्प में 73.46 फीसदी हिस्सेदारी है.

सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने में लगभग 1400 करोड़ रुपए आने का अनुमान है. सरकार की ड्रेजिंग कॉर्प को बेचने के लिए 1 महीने में बोली मंगाने की योजना है. यह कंपनी शिपिंग मिनिस्ट्री के अधीन है.

बता दें कि कैबिनेट कमिटी ऑन इकनॉमिक अफेयर्स पहले ही ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है. साथ ही ड्रेजिंग कॉर्प में पूरी सरकारी हिस्सेदारी एक साथ बेचने पर सहमति भी है.

ये भी पढ़ें: बीजिंग के एससीओ समिट में आतंकवाद को समर्थन देने वालों पर बरसीं सुषमा

वही ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन पिछले कई सालों से निराशाजनक प्रदर्शन देता रहा है, इसलिए इसे बेच देना ही सही रहेगा. अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का मुनाफा बिना बदलाव के 3.97 करोड़ रुपए रहा था. वहीं, इस दौरान कंपनी की आय 10.8 फीसदी बढ़कर 157.9 करोड़ रुपए रही थी.

जानकारी के लिए बता दें कि ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन में करीब 500 कर्मचारी हैं. यह कंपनी मेंटेनेंस ड्रेजिंग, कैपिटल ड्रेजिंग, बीच नरिशमेंट, लैंड रिक्लेमेशन, शैलो वाटर ड्रेजिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टैंसी और मरीन कंस्ट्रक्शन से जुड़ी हुई है.

शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, कंपनी के कर्मचारियों के पास वीआर का ऑप्शन है. इसके अलावा कंपनी के मालिक ही कर्मचारियों पर फैसला लेंगे. आपको बता दें कि यह बीएसई और एनएसई पर लिस्टेेेड कंपनी है.