बढ़ने वाली है जनता की मुश्किलें, फिर से बढ़ेंगे तेल के दाम

crude oil prize hiked

आने वाले दिनों में आम जनता की परेशानी और बढ़ सकती है। अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उबाल जारी है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। नवंबर 2014 के बाद यह पहली बार है जब कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। इससे तेल कंपनियों की लागत बढ़ेगी और वह इस लागत को ग्राहकों से वसूलने के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम और बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो ओपेक और रूस ने उत्पादन घटा दिया। वहीं दूसरी ओर ईरान की ओर से भी सप्लाई घटने का अंदेशा है। साल 2018 में अब तक कच्चे तेल में 20 फीसदी की तेजी आ चुकी है। जून 2017 में कच्चे तेल के भाव 44.82 डॉलर प्रति बैरल पर थे, वहीं गुरुवार को कच्चा तेल 80.18 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। जानकारों का मानना है कि ओपेक देश लगातार कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती कर रहे हैं। रूस ने भी प्रोडक्शन घटा दिया है। वहीं, ईरान पर अमेरि‍की प्रतिबंध की घोषणा के बाद, तेल की कीमतें नई ऊंचाई पर आ रही हैं। ईरान की ओर से भी सप्लाई घटने का डर बन गया है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से देश के ऑयल इंपोर्ट बिल पर असर दिखने लगा है। भारत अपनी जरुरतों का 82 फीसदी कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतें अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में इस मोर्चे पर सरकार को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।

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