मोदी-जिनपिंग की बातचीत का असर, भारत-चीन की सेना के बीच बनेगी हॉटलाइन


भारत और चीन ने दोनों तरफ की सेनाओं के बीच हॉटलाइन बनाने पर सहमति जाहिर कर दी है. इसे लेकर चीनी मीडिया में कहा गया है कि लंबे समय से दोनों देशों की सेनाओं के बीच हॉटलाइन स्थापित करने पर बातचीत चल रही थी. हाल में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच चीन के वुहान में अनौपचारिक बातचीत हुई थी, उसी में इसका रास्ता निकला था. उस समय भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि मोदी-जिनपिंग ने अपनी सेनाओं को भरोसा बढ़ाने वाले उपाय करने को कहा है.

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानि एलएसी की लंबाई 3,488 किमी है. हॉटलाइन बन जाने से दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत हो सकेगी और इससे पैट्रोलिंग के दौरान के तनाव से बचा जा सकेगा. गौरतलब है कि 16 जून 2017 को भारत-चीन के बीच डोकलाम मुद्दे को लेकर भारी तनाव गहरा गया था. 73 दिनों तक चला यह विवाद 28 अगस्त 2017 को खत्म हुआ था. उस समय भारतीय सेना ने चीनी सेना को सीमा पर के विवादित इलाके में सड़क बनाने से रोक दिया था.

अभी भारत और पाकिस्तान के बीच डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस स्तर की हॉटलाइन है. चीन के साथ भी हॉटलाइन शुरू करने को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी. एलएसी पर शांति स्थापित करने को लेकर 2013 में दोनों देशों के बीच बॉर्डर डिफेंस कोऑपरेशन एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन यह सफल नहीं हो सका. लेकिन अब जबकि प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच हॉटलाइन को लेकर सहमति बन गई है, यह कहा जा सकता है कि यह सीमा पर तनाव दूर रखने के लिहाज से एक अच्छी शुरुआत है.

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