भय्यू महाराज ने की आत्महत्या, एक हाई-प्रोफाइल संत का दुखद अंत


राष्ट्र संत और मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त भय्यू महाराज ने इंदौर में आत्महत्या कर ली. मंगलवार दोपहर सिल्वर स्प्रिंग स्थित अपने बंगले की दूसरी मंजिल पर उन्होंने खुद को गोली मारी. घटना के तुरंत बाद उन्हें गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अभी इसका खुलासा नहीं हो सका है कि भय्यू महाराज ने खुद को गोली क्यों मारी. लेकिन ऐसी खबरें आ रही है कि वे पिछले कई दिनों से कुछ पारिवारिक कारणों से काफी परेशान थे. उनकी मृत्यु की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में उनके समर्थक अस्पताल के बाहर जमा हो गए हैं.

भय्यू महाराज पिछले दिनों खूब चर्चा में रहे थे, जब उन्हें शिवराज सरकार ने राज्य मंत्री का दर्जा दिया और जब उन्होंने अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, राज ठाकरे, विलास राव देशमुख, नारायण राणे, गोपीनाथ मुंडे, कैलाश विजयवर्गीय और शिवराज चौहान जैसे कई बड़े नेता उनके आश्रम में जा चुके हैं. प्रधानमंत्री मोदी से भी उनकी काफी निकटता थी. उनका ट्रस्ट मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में समाज हित के कार्यों से जुड़ा है. इस ट्रस्ट के अंतर्गत महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में गरीब बच्चों के लिए आश्रमशाला चलाई जाती है, वहीं मध्य प्रदेश के धार में, यह ट्रस्ट आत्महत्या करने वाले किसानों के बच्चों के लिए विद्यालय का संचालन करता है.

भय्यू महाराज का असली नाम उदय सिंह देशमुख है, जो मध्य प्रदेश के शुजालपुर में जन्में थे. शुरुआत में वे कॉरपोरेट जगत और मॉडलिंग की दुनिया से जुड़े, लेकिन जल्द ही उन्होंने उस दुनिया से नाता तोड़ लिया. एक संत के रूप में भी वे हाई-प्रोफाइल जिंदगी जीते थे. कुर्ता-पायजामा और माथे पर चंदन के टीका के साथ उनके एक हाथ की कलाई में मोती जड़ित सोने की चमकती ब्रैसलेट दिखती, तो दूसरे हाथ में सूत का कलावा. वे घुड़सवारी और तलवारबाजी के हुनर में भी माहिर थे, साथ ही उन्हें संगीत व कला में भी महारत हासिल थी.

इस हाई-प्रोफाइल संत का विवादों से भी पुराना नाता रहा है. 2005 में उन्हीं की एक श्रद्धालु सीमा वानखडे ने उनपर मुकदमा दायर कर आरोप लगाया था कि भय्यू महाराज उसके पुत्र चैतन्य के पिता हैं. पिछले साल एक बार फिर वे एक ऐसे ही विवाद में फंसे थे, जब उनकी दूसरी शादी के वक्त मल्लिका राजपूत नाम की एक अभिनेत्री ने उन पर मोहजाल में बांधकर रखने का आरोप लगाया. उसने यह भी आरोप लगाया था कि भय्यू महाराज उसे दूसरे नंबरों से छुप छुपकर फोन लगाते हैं और परेशान करते हैं. हालांकि उस समय भय्यू महाराज के पीए ने इन आरोपों का खंडन किया था और कहा था कि मल्लिका राजपूत एक फ्रॉड महिला है.

भय्यू महाराज की पहली शादी औरंगाबाद की माधवी निम्बालकर के साथ हुई थी, जिनकी 2015 में मौत हो गई. पहली पत्नी से उन्हें एक बेटी है, जो पूणे के कॉलेज में पढ़ती है. बीते साल 30 अप्रैल को ही उन्होंने इंदौर की डॉ. आयुषी के साथ दूसरी शादी की. भय्यू महाराज करीब एक वर्ष पूर्व अपने सार्वजनिक जीवन से सन्यास लेने की घोषणा कर चुके थे. इसके अलावा उन्होंने काफी दिनों से हाईप्रोफाइल लोगों और नेताओं से भी दूरी बना ली थी. यहां तक कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए राज्य मंत्री के दर्जे पर उन्होंने कहा था कि वे इससे जुड़ा कोई भी सरकारी फायदा नहीं लेंगे.

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