प्रधानमंत्री की नेपाल यात्रा के राजनीतिक मायने

2019 में लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी गतिविधि खासकर बिहार में और अधिक जोर-शोर से शुरू कर दी है. कर्नाटक में सत्ता पाकर भी सता से दूर हो चुकी भाजपा अब पूरी ताकत से चुनावी माहौल अपने पक्ष में करने में जुटी है. केंद्र सरकार के चार साल पूरे होने पर बिहार प्रदेश भाजपा ने महासंपर्क अभियान चलाने की घोषणा की है. बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं की बैठक में प्रति बूथ कम से कम 50 परिवार यानी प्रदेश के कुल 62 हजार बूथ के 31 लाख परिवारों से संपर्क का फरमान जारी किया है. प्रदेश अध्यक्ष के फरमान के बाद जिलों में भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ने लगी है.

nepalभारत-नेपाल का संबंध दो देशों का सामान्य संबंध नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, धार्मिक व सामाजिक स्तर पर भी बेहतर रहा है. सीमावर्ती जिलों में शायद ही कोई ऐसा गांव हो, जहां के परिवार का संबंध नेपाल के तराई में किसी गांव में न हो. पर्व-त्योहारों से लेकर अन्य उत्सवों के मौके पर दोनों ही देशों के लोग एक परिवार के सदस्य की तरह हर सुख-दु:ख में एक दूसरे का साथ देते रहे हैं. राजनीतिक स्तर पर दोनों ही देशों के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका से आम तौर पर लोगों का कोई लेना-देना नहीं होता. मगर जब भी नेपाल के तराई में रहने वाले मधेशी किसी संकट में होते हैं, तब उनकी उम्मीदें भारत सरकार से बढ़ती जरूर हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेपाल दौरे से दोनों देशों के लोगों में उम्मीदें जगी हैं.   मगर भारतीय प्रधानममंत्री के नेपाल दौरा का भारत के सीमावर्ती क्षेत्र में राजनीतिक स्तर पर कितना प्रभाव होगा, फिलहाल कहना मुश्किल है.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत का सपना संजोए भाजपा नेतृत्व ने अपनी चुनाव को लेकर तैयारी तेज कर दी है. पिछले दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पड़ोसी देश नेपाल की दो दिवसीय यात्रा की थी.  तब उन्होंने   जनकपुर धाम में ऐतिहासिक जानकी मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर भी गए थे. इस दौरान उन्होंने भारत ड्ढ नेपाल के बीच मैत्री बस सेवा का शुभारंभ भी किया. पीएम की नेपाल यात्रा के दौरान वैसे तो कई घोषणाएं हुईं, लेकिन नेपाल के जनकपुर धाम से भारत के अयोध्या तक रामायण सर्किट के तहत प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने की घोषणा को सीमावर्ती क्षेत्र में महज एक चुनावी घोषणा के रूप में देखा जा रहा है. सिक्कम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार व उतराखंड से सटा तकरीबन साढ़े 18 सौ किलोमीटर का क्षेत्र भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में आता है.

ऐसे में संभावना व्यक्त की जा रही है कि पीएम मोदी ने इन क्षेत्रों में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए चुनावी तैयारी की शुरुआत कर दी है. रणनीतिकारों का कहना है कि भारत के पीएम के नेपाल दौरे से जहां दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत होंगे, वहीं नेपाल में चीन के बढ़ते वर्चस्व पर भी लगाम लगेगा. पीएम की यात्रा से नेपाल के भारतीय मूल के मधेशियों में उत्साह बढ़ा है. मगर भारत के सीमावर्ती जिलों में इस यात्रा का उतना असर नहीं दिखा. हालांकि मुजफ्‌फरपुर के भाजपा सांसद अजय निषाद का कहना है कि 2014 के बाद नरेंद्र मोदी का भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने और लगातार नेपाल दौरे से रोटी-बेटी के परंपरागत संबंध में मजबूती आएगी, साथ ही साझा विकास को भी बल मिलेगा.

वहीं नेपाल के सांसद सह मीडिया फॉर बॉर्डर हार्मोनी के संरक्षक प्रदीप यादव का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल यात्रा से विकास को गति मिली है. इससे दोनों देशों के बीच संबंधों में मजबूती आई है. उन्होंने नेपाल के नए राज्य प्रदेश संख्या – 2 के विकास के लिए 1 सौ करोड़ की राशि देकर विकास का नया आयाम गढ़ा है. रामायण सर्किट व बस सेवा की घोषणा के माध्यम से भाजपा का भारत के सीमावर्ती प्रांतों में क्या असर हो सकता है, इसके बारे में फिलहाल कुछ कहना मुश्किल है. जानकारों की मानें, तो एक ओर जहां पीएम मोदी देश की सरहद से बाहर वाहवाही बटोर रहे हैं, वहीं उन्हें देश में पार्टी के विस्तार में अवरोध का सामना करना पड़ रहा है. पिछले दिनों संपन्न कर्नाटक विधानसभा चुनाव का परिणाम इस तथ्य का जीवंत उदाहरण है.

2019 में लोकसभा चुनाव को लेेकर भाजपा ने अपनी गतिविधि खासकर बिहार में और अधिक जोर-शोर से शुरू कर दी है. कर्नाटक में सत्ता पाकर भी सता से दूर हो चुकी भाजपा अब पूरी ताकत से चुनावी माहौल अपने पक्ष में करने में जुटी है. केंद्र सरकार के चार साल पूरे होने पर बिहार प्रदेश भाजपा ने महासंपर्क अभियान चलाने की घोषणा की है. बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं की बैठक में प्रति बूथ कम से कम 50 परिवार यानी प्रदेश के कुल 62 हजार बूथ के 31 लाख परिवारों से संपर्क का फरमान जारी किया है. प्रदेश अध्यक्ष के फरमान के बाद जिलों में भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ने लगी है. वहीं बिहार में महागठबंधन भाजपा के चुनावी वेग को कम करने के लिए एकजुट होने लगा है.

भारत-नेपाल के सीमावर्ती जिले खासकर सीतामढ़ी व शिवहर में कर्नाटक की राजनीति का असर इन दिनों विशेष तौर पर देखा जा रहा है. कर्नाटक में येदियुुरप्पा के शपथ ग्रहण पर जश्न मनाने वालों ने जहां चुप्पी साध ली है, वहीं भाजपा विरोधी खेमा बिना जंग लड़े पहलवानों की तरह जश्न में डूबा है. वर्तमान में भाजपा गठबंधन से सीतामढ़ी में रालोसपा से राम कुमार शर्मा तो शिवहर से रमा देवी भाजपा से सांसद हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों राजनीतिक धु्रव आमने-सामने के मूड में हैं. एक ओर एनडीए तो दूसरी ओर महागठबंधन चुनावी माहौल बनाने में जुटा है. वैसे चुनावी घोषणा में अभी वक्त है. दोनों गठबंधन दलों के कार्यकर्ताओं की भावना को पार्टी का शीर्ष नेतृत्व कितना महत्व देता है, यह देखना बाकी है.

You May also Like

Share Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *