मैं आने वाली हर मुसीबत का डटकर सामना करूंगी – सोनाली बेंद्रे


नई दिल्ली (प्रवीण कुमार): बॉलीवुड से बीते कुछ सालों में कई बुरी खबरें आ चुकी हैं. कभी किसी अभिनेता या अभिनेत्री की मौत की खबरें सुनने को मिल रही हैं, तो कभी किसी स्टार के गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाने की. जहां फरवरी में बॉलीवुड की सुपरस्टार अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत की खबर ने पूरे देश को चौंका दिया, तो वहीं दूसरी ओर कुछ महीने पहले अभिनेता इऱफान खान की गंभीर बीमारी की खबर ने उनके फैंस को काफी दुखी कर दिया. सिलसिला यहीं नहीं थमा और अब बॉलीवुड से हाल में एक और बुरी खबर सुनने को मिली कि अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे कैंसर की बीमारी से जूझ रही हैं.

जी हां, सोनाली ने पिछले दिनों ट्‌वीटर पर शेयर एक लेटर के जरिए अपनी बीमारी के बारे में बताया. उन्होंने लिखा, कभी-कभी जब आपको कोई उम्मीद नहीं होती तो जिंदगी आपको गुगली देती है. हाल ही में एक रिपोर्ट में सामने आया कि मुझे हाई ग्रेड कैंसर है. हमें अबतक इसके बारे कुछ पता नहीं था. मेरा परिवार और दोस्त मेरे करीब हैं. सभी मुझे सपोर्ट कर रहे हैं और ख्याल रख रहे हैं. मैं भाग्यशाली हूं और सभी का शुक्रिया करती हूं. इस सबसे लड़ने का इससे बेहतर तरीका कोई दूसरा नहीं हो सकता.

सोनाली ने आगे लिखा- मैं फिलहाल न्यूयॉर्क में इलाज करवा रही हूं. मैं आशावादी हूं और रास्ते में आने वाली हर मुसीबत से डटकर लड़ूंगी. अब तक के सफर में अपनों के प्यार और सपोर्ट ने मेरी मदद की है. इसके लिए मैं बहुत आभारी हूं.
इसके बाद जब अक्षय कुमार को पता चला कि सोनाली बेंद्रे कैंसर से जंग लड़ रही हैं, तो न्यूयॉर्क में उन्होंने उनसे मुलाकात की. अक्षय कुमार ने इस बारे में कहा कि वे जानते हैं कि सोनाली बेंद्रे बहुत मजबूत हैं और आसानी से हार मानने वालों में से नहीं हैं. भगवान से यही प्रार्थना है कि वे जल्दी स्वस्थ हो जाएं. अक्षय कुमार ही नहीं, बॉलीवुड की तमाम हस्तियों ने सोनाली बेंद्रे के ठीक होने की दुआ मांगी है.

सोनाली बेंद्रे ने अपने फिल्मी करियर के दौरान बॉलीवुड में लगभग सभी कलाकारों के साथ काम किया है. उनकी प्रमुख फिल्में दिलजले, सऱफरोश, हम साथ साथ हैं, मेजर साब, सपूत, डुप्लीकेट, दहक, इंग्लिश बाबू देसी मेम, ज़ख्म, आग, भाई, हमारा दिल आपके पास है, क़ीमत, रक्षक, तराजू, क़हर आदि शामिल हैं.

बता दें कि सोनाली बेंद्रे को हाई ग्रेड कैंसर (मेटास्टेटिक कैंसर) डायग्नोज हुआ है. आमतौर पर इसे कैंसर की लास्ट स्टेज माना जाता है, क्योंकि तब तक पूरे शरीर में कैंसर के सेल्स फैल चुके होते हैं और यह पता लगाना डॉक्टर्स के मुश्किल रहता है कि कैंसर की शुरुआत आखिर किस हिस्से से
हुई है.

बेहद खतरनाक है मेटास्टेटिक कैंसर – हाईग्रेड कैंसर बेहद खतरनाक होता है. यह पूरे शरीर में फैल जाता है. कैंसर सेल्स सामान्य टिश्यू में लिम्फ प्रणाली या रक्त प्रवाह के जरिए भी घुस सकते हैं. इस प्रक्रिया को मेटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है. यह स्टेज 4 का कैंसर होता है. जिसे भी गुर्दे का लास्ट स्टेज कैंसर होता है, उसके पांच साल भी जीवित रहने के मात्र 5 प्रतिशत ही चांस होते हैं.  मेटास्टेटिक कैंसर को प्राइमरी कैंसर भी कहा जा सकता है. उदाहरण के तौर पर, अगर ब्रेस्ट कैंसर गुर्दों में फैल गया है, तो उसे मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर कहा जाएगा. इसका इलाज स्टेज 4 के ब्रेस्ट कैंसर के तौर पर होगा. जिन लोगों में मेटास्टेटिक कैंसर पाया जाता है, उनमें डॉक्टर के लिए ये पता लगा पाना बेहद मुश्किल होता है कि ये कैंसर आखिर शुरू कहां से हुआ है. मेटास्टेटिक कैंसर में हमेशा लक्षण दिखाई नहीं देते. जब यह उभरते हैं तो इसकी प्रकृति और फ्रीक्वेंसी मेटास्टेटिक ट्यूमर के साइज और उसकी जगह पर निर्भर करती है. डॉक्टर्स के मुताबिक, अगर कैंसर हड्‌डी में हो तो दर्द और फ्रैक्चर हो सकता है. अगर दिमाग में चला जाए तो सिरदर्द की समस्या उभर आती है. अगर गुर्दे में हो तो सांस लेने में परेशानी होती है. बढ़ते हुए कैंसर आस-पास के टीशूज को भी प्रभावित करते हैं, जो शरीर के किसी भी हिस्से में फैल कर उसे प्रभावित कर सकते हैं.