जानिए कौन है वो जापानी धर्म गुरु जिसे दे दी गयी फांसी

japneese spiritual teacher hang to death

जापान की राजधानी के सबवे में 1995 के जानलेवा रासायनिक गैस (सारिन) हमले के दोषी एक धार्मिक संप्रदाय के नेता शोको असहारा को फांसी दे दी गई। 63 वर्षीय दृष्टिहीन शोको के साथ उसके छह समर्थकों को भी फांसी पर लटका दिया गया। शुक्रवार को जापानी प्रशासन द्वारा फांसी पर लटकाए जाने से पहले इस धार्मिक नेता को टोक्यो अंडरग्राउंड नर्व गैस हमले के केस में 2004 में सजा सुनाई गई, जिसे जापान में अब तक की घरेलू आतंकवाद की सबसे भयावह घटना माना जाता है।

जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव योशिहिदे सुगा ने शोको असहारा को फांसी दिए जाने की पुष्टि की।
बाद में उसके छह समर्थकों को भी फांसी दिए जाने की खबर आई। ओम शिनरीक्यो नाम के धार्मिक संप्रदाय के नेता शोको पर 1995 में जिस हमले में फांसी दी गई उसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी और 5,500 लोग बीमार व अपंग हो गए थे। इस संप्रदाय के लोगों ने सबवे में भीड़भाड़ वाले समय में सारिन रासायनिक गैस से भरे बैग में छेद कर दिए थे। इसके बाद इस संप्रदाय ने कई स्टेशनों पर हाइड्रोजन सायनाइड से हमले करने की नाकाम कोशिशें भी कीं। सभी अभियुक्तों की अंतिम अपील पर सुनवाई पूरी होने तक इन सातों दोषियों की फांसी पर रोक लगाई गई थी।

शोको ने 1980 में धार्मिक संप्रदाय की स्थापना की। उसकी छवि ऐसे करिश्माई नेता की थी जिससे प्रभावित हो कर शिक्षित लोग यहां तक कि डॉक्टर और वैज्ञानिक तक उसके पंथ में शामिल हो गए थे। हालांकि उसके धार्मिक संप्रदाय को हमेशा से ही जापान में संदेह की नजरों से देखा जाता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर यह हमला ठीक से किया जाता तो इससे हजारों लोग मर सकते थे। शोको असहारा पर पुलिस द्वारा 17 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

शोको असहारा का जन्म 1955 में क्यूशू द्वीप में हुआ जिसका नाम चिज़ुओ मात्सुमोतो रखा गया। लेकिन बहुत कम उम्र में ही उसकी आंखों की रोशनी चली गई। बाद में नाम बदलकर शोको ने अपना धार्मिक साम्राज्य स्थापित करना शुरू किया। उसने शुरूआत में योग शिक्षक को बतौर काम किया और 1980 में हिंदू और बौद्ध मान्यताओं को मिलाकर एक आध्यात्मिक समूह के रूप में ओम शिनरीक्यो संप्रदाय शुरू किया। बाद में शोको ने सर्वनाश से जुड़ी भविष्यवाणी का ईसाई विचार भी इसमें शामिल कर लिया। ओम शिनरीक्यो का शाब्दिक अर्थ है ‘सर्वोच्च सत्य’।

1989 में शोको असहारा द्वारा शुरू किए गए धार्मिक संप्रदाय को जापान में औपचारिक मान्यता मिल गई। इस संप्रदाय में असहारा के हजारों अनुयायी शामिल हो गए। संप्रदाय की प्रसिद्धि इतनी फैली कि शोको ने खुद को ईसा और बुद्ध के बाद दूसरा बुद्ध घोषित कर दिया। समूह ने बाद में दावा किया कि एक विश्व युद्ध में समूची दुनिया ख़त्म होने वाली है और केवल उनके संप्रदाय के लोग ही जीवित बचेंगे। 1995 हमले के बाद संप्रदाय भूमिगत हो गया, लेकिन ग़ायब नहीं हुआ और उसने नाम बदलकर उसने ‘एलेफ’ और ‘हिकारी नो वा’ नामक दो संगठनों बना लिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *