जब बालासाहेब ने लगाई थी संजय दत्त को डांट

नई दिल्ली (प्रवीण कुमार ) : संजय दत्त के जीवन पर बनी बायोपिक संजू इन दिनों खूब धमाल मचा रही है. फिल्म ने पहले दिन से ही ताबड़तोड़ कमाई की और महज 15 से 16 दिनों में 300 करोड़ का कारोबार कर लिया. फिल्म में संजय की लाइफ से जुड़े ऐसे किस्सों को उजागर किया गया है जिसे उनके फैन शायद ही जानते हों. इसमें उनके ड्रग्स लेने से लेकर एके-56 हथियार रखने का किस्सा भी मौजूद है. आपको बता दें कि ग़ैरक़ानूनी तरीके से हथियार रखने के मामले में संजय 1993 में जेल जा चुके हैं. उनके जेल जाने से पिता सुनील दत्त काफी परेशान थे और कैसे भी करके संजय की रिहाई कराना चाहते थे. खुद कांग्रेसी नेता होने के बावजूद दिल्ली में पार्टी से कोई भी मंत्री इस मामले में दखल नहीं दे रहा था.

हताश होकर मुंबई लौटे सुनील दत्त, संजय को बचाने की पूरी आस खो चुके थे. तब उनके पास अभिनेता राजेंद्र कुमार पहुंचे. अपने दौर के मशहूर हीरो राजेंद्र कुमार, सुनील के खास दोस्त और समधि थे. राजेंद्र के बेटे कुमार गौरव ने सुनील की बेटी नम्रता से शादी की है. राजेंद्र कुमार ने सुनील को शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे के पास जाने की सलाह दी. क्योंकि ठाकरे ही उनकी मदद कर सकते थे.

बालासाहेब ठाकरे का नाम सुनकर सुनील भड़क गए. उन्होंने राजेंद्र की इस सलाह को ठुकरा दिया. इस पर राजेंद्र ने सुनील को अमिताभ बच्चन का किस्सा याद दिलाया. जिसमें बालासाहेब ने शहंशाह फिल्म में मदद की थी. उस समय अमिताभ का नाम बोफोर्स कांड में आने के बाद उनकी फिल्म को बैन करने की बात होने लगी थी.

दो-चार दिन बाद दत्त साहब ने राजेंद्र कुमार को फोन कर कहा कि वे तैयार हैं, लेकिन वे बालासाहेब से कैसे बात करेंगे. इस पर राजेंद्र कुमार ने कहा, तुम्हें कुछ करने की जरूरत नहीं है. मैं खुद तुम्हें उनके पास लेकर जाऊंगा. बस तुम अपना आपा मत खोना. कुछ दिनों बाद राजेंद्र कुमार, सुनील और संजय बालासाहेब के घर मातोश्री पहुंचे. बालासाहेब बोले- बोलो क्या कर सकता हूं तुम्हारे लिए.

अब सुनील दत्त के सामने बाला साहेब बैठे थे. बालासाहेब बोले- सुनील मैं जानता हूं कि तुम मुझे पसंद नहीं करते. लेकिन एक जमाने में मैं तुम्हारा बड़ा फैन था. ठाकरे के मुंह से ऐसी बात सुनकर सुनील दत्त के दिल का बोझ उतर गया. वे उनके सामने फुट-फुटकर रोने लगे.  ठाकरे बोले, क्या कर सकता हूं तुम्हारे लिए. इस पर सुनील ने संजय के बारे में बताया. इस पर ठाकरे ने कहा है कि वे तो सत्ता में कहीं नहीं हैं, फिर वह उनकी मदद कैसे कर सकते हैं. कुछ देर की बातचीत के बाद उन्होंने सुनील से कहा, देखते हैं, क्या हो सकता है. लेकिन ये मैं सिर्फ तुम्हारे लिए कर रहा हूं, संजय के लिए नहीं.

फिर ठाकरे ने संजय दत्त को कमरे में बुलाया और जमकर फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि आगे से जो तुम्हारे पिता बोलें, वहीं करना, किसी और के बहकावे में मत आना. इसके बाद ठाकरे ने राजेंद्र, सुनील और संजय तीनों को भगवा तिलक लगाकर जाने दिया. जाने से पहले सुनील दत्त ने कहा कि क्या वे बदले में उनके लिए कुछ कर सकते हैं. सुनील ने राजनीति से संन्यास लेने की बात भी कही. इस पर ठाकरे ने ऐसा न करने के लिए कहा. हालांकि सुनील का मन राजनीति से खट्टा हो गया था. इसलिए उन्होंने अगला चुनाव ही नहीं लड़ा.

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