तालिबान ने तबाह कर दी थी, लोगों ने फिर से बना दी बुद्ध की प्रतिमा

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स्वात घाटी में 2007 में पाकिस्तानी तालिबान ने जिस बुद्ध प्रतिमा को डायनामाइट से उड़ा दिया था, वह स्थानीय लोगों की कोशिशों के चलते एक बार फिर पुराने स्वरूप में लौट आई है। प्रतिमा के क्षतिग्रस्त चेहरे को सुधार दिया गया है। बौद्ध धर्म के विशेषज्ञ परवेश शाहीन (79) ने प्रतिमा उड़ाए जाने की घटना याद करते हुए कहा- तब मुझे ऐसा महसूस हुआ कि उन्होंने (पाक तालिबान) मेरे पिता का कत्ल कर दिया हो। उन्होंने मेरी संस्कृति, मेरे इतिहास पर हमला किया था।

11 साल पहले पाकिस्तानी तालिबान 7वीं सदी की इस 21 फीट ऊंची प्रतिमा पर विस्फोटक लगाने के लिए चढ़े थे। लेकिन, विस्फोट पूरी तरह सफल नहीं रहा। हालांकि, बुद्ध का चेहरा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके अलावा पास ही बना एक भित्ति चित्र भी टुकड़ों में बंट गया था। पाकिस्तान तालिबान ने इस घटना को 2001 में अफगानिस्तान के बामियान में तबाह की गई बुद्ध प्रतिमा की तर्ज पर ही अंजाम दिया था। कई सालों तक किसी ने भी तालिबान के डर से इस प्रतिमा को दोबारा बनाने की कोशिश नहीं की। इस घटना को स्वात घाटी में आतंक की शुरुआत माना गया था, जो 2009 में पाकिस्तानी फौजों की कार्रवाई के बाद ही थमीं।

इटली ने 20 करोड़ की मदद की : 2012 में बुद्ध प्रतिमा के दोबारा तैयार किए जाने की शुरुआत हुई। इटली की सरकार ने स्वात घाटी की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए पांच साल के भीतर 25 लाख यूरो करीब 20 करोड़ रुपए का निवेश किया। स्थानीय लोगों ने इस काम में पूरा सहयोग दिया।

जानबूझकर छोड़ी गई प्रतिमा में कमी : 6 सालों तक पुरानी तस्वीरों और 3-डी प्रिंटिंग की मदद से इस प्रतिमा को वास्तविक स्वरूप दिया गया। ये काम 2016 में पूरा हो गया था। इटली के विशेषज्ञों ने 3-डी लैब में बुद्ध का चेहरा तैयार किया। उनका कहना है कि नया स्वरूप बिल्कुल पहले जैसा नहीं है। इसमें हमने जानबूझकर कमी छोड़ी है, ताकि ये पता चल सके कि इसे कभी आतंकियों ने नुकसान पहुंचाया। था।

अब पर्यटकों के आने की उम्मीद : विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के प्रसार ने स्थानीय लोगों में स्वात की संस्कृति के महत्व को समझाने का काम किया है। कभी ऐसा भी दौर था, जब मूर्ति को तोड़े जाने की घटना सही ठहराई जाती थी। अब हालात बदल रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस मूर्ति के पुराने स्वरूप में लौटने के साथ ही, स्वात की संस्कृति भी अपने पुराने स्वरूप में लौट आएगी। पर्यटकों के आने की उम्मीद भी बढ़ी है, जो यहां की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।

घाटी में 1000 से ज्यादा बौद्ध मठ थे : इटली की पुरातत्वविद लुका मारिया ने कहा- घाटी में बौद्ध धर्म चौथी शताब्दी में अपने स्वर्णिम दौर में था। हालांकि, 10वीं सदी में यहां इसका अस्तित्व खत्म हो गया। दूसरे धर्मों ने इसकी जगह ले ली। कभी इस क्षेत्र में एक हजार से ज्यादा बौद्ध मठ थे, लेकिन वक्त के साथ वे भी धीरे-धीरे खत्म हो गए।

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