बॉलीवुड फिर बोलगा, भारत माता की जय


शहीद की मौत गोली लगने से नहीं होती है, बल्कि तब होती है जब उसे भुला दिया जाता है

नई दिल्ली (प्रवीण कुमार ): बॉलीवुड में एक दौर था जब देशभक्ति फिल्में एक के बाद एक रिलीज हुआ करती थीं और बॉलीवुड स्टार्स को जब हम किसी सैनिक या आर्मी ऑफिसर्स का रोल प्ले करते देखते हैं, तो दिल में देशभक्ति की भावनाएं उफान मारने लगतीं. आनंद मठ, किस्मत, झांसी की रानी, नया दौर, हम हिन्दुस्तानी, तिरंगा, जिस देश में गंगा बहती है, लीडर, ललकार, मदर इंडिया, हक़ीक़त, क्रांति, मि. इंडिया, हिंदुस्तान की कसम, पूरब और पश्चिम, उपकार, तिरंगा, कर्मा, शहीद, शहीद भगत सिंह, बॉर्डर, 1942 एक लव स्टोरी, एलओसीः कारगिल, गांधी, क्रांतिवीर, प्रहार, सरफरोश, लगान, मंगल पांडे, गदरः एक प्रेम कथा, मां तुझे सलाम, ज़मीन, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों आदि ऐसी प्रमुख फिल्में हैं, जिन्हें देखकर देशवासियों के दिल में देशभक्ति का जज्बा जाग उठता हैं.

देशभक्ति गीतों का भी अच्छा खासा महत्व है. ये गीत आज भी देश में आज़ादी के मौके पर याद किए जाते हैं. मेरा रंग दे बसंती चोला…, आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिन्दुस्तान की…, हम लाएं हैं तू़फान से…, ऐ वतन, ऐ वतन हमको तेरी कसम…, छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी…, मेरे देश की धरती सोना उगले…, हर करम अपना करेंगे…, ये देश है वीर जवानों का…, ऐ मेरे प्यारे वतन…अपनी आज़ादी को हम…, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों.., जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़ियां करती है बसेरा… ऐ मेरे वतन के लोगों.., संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं.., आदि ऐसे गीत हैं, जो गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर खूब याद किए जाते हैं. इन गानों को सुनते ही हर देशवासी गर्व का अनुभव महसूस करता है.

बॉलीवुड पहले दौर के मुकाबले अब काफी बदल चुका है. बेशक बदलते समय के साथ बॉलीवुड में देशभक्ति फिल्में कम बनती हों, लेकिन पिछले कुछ समय से देशभक्ति वाली फिल्मों की बयार चल रही है. बीते कुछ सालों में बॉलीवुड ने कई बेहतरीन देशभक्ति फिल्में देश को दी हैं. जिनमें एक था टाइगर, भाग मिल्खा भाग, मैरीकॉम, लक्ष्य, चक दे इंडिया, स्पेशल-26, स्वदेश, रंग दे बसंती, एयर लिफ्ट, रूस्तम, बेबी, नाम शबाना, माई नेम इज खान, ए वेडनेसडे, टाइगर जिंदा है आदि शामिल हैं.

अब बॉलिवुड वालों के लिए देशभक्ति एक फॉर्म्युला बन चुकी है. इसी फॉर्म्युले पर एक कदम और आगे बढ़ाते हुए हमारी फिल्म इंडस्ट्री आने वाले दिनों में देश के सबसे बड़े विजय-युद्ध यानि आज़ादी की जंग को अपने-अपने ढंग से बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी में जुटी हुई है. आने वाले दिनों में कई बड़ी फिल्मों में ब्रिटिश राज का दौर भी दिखाई देगा. वहीं जंग-ए-आजादी की गूंज भी सुनने को मिलेगी.

आज़ादी की गाथा को ब़खूबी बयां करती ये देशभक्ति फिल्में

बॉलीवुड में देशभक्ति का जूनून-  इस साल 15 अगस्त से पहले देशभक्ति पर बनी चार फिल्में रिलीज हो चुकी हैं. जिनमें सिद्धार्थ मल्होत्रा-मनोज वाजपेयी की फिल्म अय्यारी, आलिया भट्‌ट की राजी, जॉन अब्राहिम की परमाणुः द स्टोरी ऑफ पोखरण और दलजीत दोसांक्ष की फिल्म सूरमा प्रमुख हैं. ये सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल रही हैं.  इतना ही नहीं, आने वाले दिनों में दर्शकों को फिल्म गोल्ड, सत्यमेव जयते, जीनियस, मणिकर्णिका: क्वीन ऑफ झांसी, कलंक, शमशेरा, पलटन, ठग्स ऑफ हिंदोस्तान जैसी कई बड़ी फिल्में आ रही हैं, जिसमें दर्शकों के लिए देशभक्ति की कई आदर्शवादी चीजों को दिखाया जा सकता है.

15 अगस्त पर रिलीज हो रही अक्षय कुमार स्टारर फिल्म गोल्ड साल 1948 में आजाद भारत के तौर पर पहला ओलिंपिक गोल्ड जीतकर विश्वपटल पर भारतीय झंडा बुलंद करने वाले हॉकी खिलाड़ियों की विजयगाथा है. रीमा कागती निर्देशित इस फिल्म में भारत में गोल्ड मेडल जीतने की जद्दोजहद के बीच गुलामी का दौर, आजादी की जंग और बंटवारे का दर्द भी दिखाई देगा. अक्षय की एक और फिल्म केसरी भी ब्रिटिश काल पर ही सेट है. इस फिल्म में भले ही जंग अंग्रेजों से नहीं होगी, लेकिन यह फिल्म उसी दौर यानि 1897 में हुए सारागढ़ी के युद्ध पर आधारित है, जिसमें ब्रिटिश इंडियन आर्मी के 21 सिख लड़ाकों ने हवलदार ईशर सिंह के नेतृत्व में 12 हजार अफगानी सैनिकों की सेना को धूल चटा दी थी.

वहीं दूसरी ओर जॉन अब्राहिम स्टारर फिल्म सत्यमेव जयते भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को रिलीज होगी. सत्यमेव जयते एक्शन से भरपूर और जबरदस्त डायलॉग्स वाली फिल्म है. इस फिल्म में जान अब्राहिम और मनोज वाजपेयी मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं और वे पुलिस अफसर के रोल में हैं. सत्यमेव जयते को टी-सीरीज के भूषण कुमार और एम्मे एंटरटेंमेंट के निखिल आडवाणी ने प्रोड्यूस किया है. सत्यमेव जयते पूरी तरह से कॉमर्शियल फिल्म है.

जेपी दत्ता अपनी वॉर की फिल्मों जैसे बॉर्डर और एलओसी कारगिल के लिए मशहूर हैं. वह एक और थ्रिलिंग स्टोरी पलटन लेकर आ रहे हैं. फिल्म की कहानी 1967 के नाथुला मिलिट्री क्लैश पर आधारित है जो कि सिक्किम बॉर्डर पर हुआ था. फिल्म का ट्रेलर देखने में ही काफी शानदार है, जिसकी शुरुआत 1962 के इंडो-चाइनीज वॉर के फुटेज से होती है. इस लड़ाई में भारत युद्ध हार गया था. जल्द ही यह 1967 पर पहुंच जाता है जहां भारत ने नाथुला जीतने के लिए प्रतिकार किया था. फिल्म में आर्मी वालों के परिवारों की झलक भी देखने को मिलेगी जैसे पिछली जेपी दत्ता फिल्मों में मिलती रही है. फिल्म में एक पावरफुल टैगलाइन है शहीद की मौत गोली लगने से नहीं होती है बल्कि तब होती है जब उसे भुला दिया जाता है. फिल्म 7 सितंबर को रिलीज हो रही है. इसमें जैकी श्रॉफ, अर्जुन रामपाल, सोनू सूद, गुरमीत चौधरी, हर्षवर्धन राने, सिद्धांत कपूर, लव सिन्हा, इशा गुप्ता, सोनल चौहान, दीपिका कक्कड़ और मोनिका गिल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे.

कंगना रनौत की मुख्य भूमिका वाली फिल्म मणिकर्णिका: क्वीन ऑफ झांसी तो 1857 की पहली क्रांति के दौरान अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वालीं वीरांगना लक्ष्मीबाई की वीरता की ही कहानी है. इसमें ब्रिटिश काल की बानगी व आजादी की पहली जंग की धमक जोरदार होगी. इसमें कोई शक नहीं कि यह फिल्म पूरी तरह से देशभक्ति पर होगी. यह फिल्म साल के अंत में दिसंबर में रिलीज होगी.

इसी तरह संजय दत्त, माधुरी दीक्षित, वरुण धवन, आलिया भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा और आदित्य रॉय कपूर स्टारर करण जौहर की फिल्म कलंक भी ब्रिटिश काल के सेट में ही है. खबरों की मानें, तो यह फिल्म उस घटना पर आधारित है, जब बंटवारे से पूर्व हीरामंडी (लाहौर) के लोहारों और कोठेवालियों ने एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था. रणबीर कपूर की करण मल्होत्रा निर्देशित बिग बजट फिल्म शमशेरा भी 18वीं सदी में सेट है, जिसमें ब्रिटिश राज और उससे मुकाबले की दास्तां दिखाई देगी.

इस साल देशभक्ति पर बनी फिल्मों में आमिर खान भी पीछे नहीं हैं. आमिर खान दिवाली के मौके पर साल की मोस्ट अवेटिंग अपनी ठग्स ऑफ हिंदोस्तान को रिलीज कर रहे हैं. 19वीं शताब्दी के ब्रिटिश उपन्यासकार फ्लिप में डोज टेलर के उपन्यास द कन्फेशन ऑफ ठग पर आधारित यह फिल्म कासगंज के ठगों की कहानी पर बनाई गई है. ब्रिटिश शासन में किस तरह से इलाके के सक्रिय ठग ब्रिटिश अधिकारियों को ठगी का शिकार बनाते थे, इसी पर 1839 में ब्रिटिश लेखक फ्लिप मेडोज टेलर ने द कन्फेशन ऑफ ठग नाम के उपन्यास में लिखा था.  इस उपन्यास के तीसरे संस्करण में कासगंज के ठगों के बारे में लिखा गया है. फ्लिप मेडोज टेलर के अलावा अन्य विदेशी लेखकों में विलियम हेनरी स्लीमन, फैनी पाथ्स, किम ए वैगनर सहित लेखकों के नाम आते हैं. जिन्होंने इस इलाके के देशभक्त ठगों के बारे में लिखा है. यह ठग ब्रिटिश शासकों का विरोध करते हुए अपनी देशभक्ति का परिचय देते हुए उन्हें शिकार बनाते थे.

ठग नशीले पदार्थ का इस्तेमाल करके ब्रिटिश अधिकारियों लूटते और कई बार उनकी हत्या भी कर देते थे. उपन्यासकार टेलर की स्टोरी में इन ठगों के बारे में विस्तार से लिखा है. कालाजार का मैदान इस बात का गवाह है. यहां छावनी में अंग्रेजी शासकों ने हॉर्स रेजीमेंट की स्थापना की थी. कर्नल विलियम गार्डनर इस रेजीडेंस की कमान संभालते थे. अब भी इनके परिवार की संपत्ति इस गांव में मौजूद है.

ब्रिटिश छावनी होने के कारण कई विदेशी लेखक और साहित्यकार यहां आते रहे हैं. फ्लिप भी यहां आए थे. उस समय अंग्रेज अफसरों को इस इलाके में सक्रिय ठग अपना निशाना बनाते थे. इनके आतंक से ब्रिटिश अफसरों में खौफ था और ठगों से निपटने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों ने विशेष योजनाओं पर काम किया. यहां 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में देशभक्तों ने अंग्रेजी फौजों को कई मोर्चों पर मात दी थी.

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