गया के चुनावी मैदान में मांझी बनाम मांझी!

manjhi2019 के लोकसभा चुनाव में दस महीने से भी कम समय रह गया है. बिहार में इसकी तैयारियां अभी से जोरो पर है. हर दल के प्रमुख नेता दिल्ली से पटना तक ‘प्रेसर पालिटिक्स’ में लगे हैं. दक्षिण बिहार की राजनीतिक राजधानी गया संसदीय क्षेत्र में भी चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है. सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र होने के कारण यहां सिर्फ अनुसूचित जाति के नेताओं का ही विभिन्न दलों से प्रत्याशी बनने के लिए दबाव है. फिर भी, एक दर्जन से अधिक  नेता भाजपा, जद (यू), राजद, हम, जनअधिकार पार्टी और कांग्रेस से प्रत्याशी बनने के लिए दिल्ली से पटना तक की दौड़ लगा रहे हैं. गठबंधन की तस्वीर स्पष्ट नहीं होने के कारण हर दल के चार-पांच संभावित प्रत्याशी लोकसभा का टिकट लेने के लिए अपने समर्थकों के साथ दल के सुप्रीमो के यहां डेरा डालने लगे हैं.

गया सुरक्षित संसदीय क्षेत्र से फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के हरि मांझी सांसद हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के हरि मांझी राष्ट्रीय जनता दल के राजेश कुमार मांझी को हराकर विजयी हुए थे. लगातार दो बार गया सुरक्षित संसदीय क्षेत्र से सांसद होने के कारण हरि मांझी की पार्टी में अच्छी स्थिति हो गई. लेकिन इस बार सभी लोग सवाल कर रहे हैं कि हरि मांझी गया संसदीय क्षेत्र से हैट्रिक बनाएंगे या फिर भाजपा इनका पत्ता साफ कर किसी दूसरे को मौका देगी.

इस सवाल को लेकर भाजपा के स्थानीय नेता भी उलझन में हैं. जिला व प्रमंडल स्तर के कोई भी भाजपा नेता हरि मांझी के टिकट कटने-काटने या फिर इन्हें तीसरी बार प्रत्याशी बनाए जाने के सवाल पर कुछ भी नहीं बोल पा रहे हैं. सभी का एक ही जवाब है कि अलाकमान जो करेंगे, हमलोग उसमें साथ रहेंगे. वहीं दूसरी ओर हरि मांझी से नाराज भाजपा नेता 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाने के लिए समय पर पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखने की बात कह रहे हैं. कहा जा रहा है कि सांसद द्वारा गोद लिए गए गांव बकरौर की स्थिति अब भी बहुत खराब है, वहीं हरि मांझी को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि वे केंद्र सरकार द्वारा किए गए कार्यों को सही ढंग से जनता के बीच नहीं ले जा पाए, जिसके कारण केंद्र की लाभकारी योजनाओं का समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल सका.

क्षेत्र में घुमकर लोगों की समस्याओं को भी गया के सांसद हरि मांझी नहीं देख रहे हैं, जिससे कुछ तबके के लोग भाजपा से नाराज चल रहे हैं. इन्हीं सभी बातों को पार्टी नेतृत्व से अवगत कराकर विरोधी खेमा हरि मांझी का टिकट कटवाने के प्रयास में लगा है. हालांकि यह बात भी सच है कि यदि हरि मांझी को तीसरी बार भी गया सुरक्षित संसदीय क्षेत्र से भजापा प्रत्याशी बनाया गया, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के नाम पर ही इनका बेड़ा पार हो सकता है. वह भी इस बात पर निर्भर करता है कि महागठबंधन के किस दल से कौन प्रत्याशी होता है. कोई दमदार प्रत्याशी हुआ, तो हरि मांझी के रास्ते आसान नहीं होंगे. ऐसे पिछले पांच दशक के इतिहास में गया सुरक्षित संसदीय क्षेत्र से सबसे अधिक बार जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी को ही सफलता मिली है. गया लोकसभा क्षेत्र को भाजपा अपना मजबूत गढ़ मानती है.

पूर्व मुख्यमंत्री और हिन्दुस्तान आवामी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी गया संसदीय क्षेत्र से किसी भी हाल में चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं. ‘हम’ सुप्रीमो का प्रयास है कि इन्हें महागठबंधन का प्रत्याशी बनाया जाए. नीतीश कुमार की कृपा से मुख्यमं़त्री बने जीतन राम मांझी की अति राजनीतिक महत्वाकांक्षी होने की बात अब प्रदेश के लोगों से छुपी नहीं है. बेटे को विधान परिषद में एनडीए की ओर से प्रत्याशी बनाने का चांस कम दिखा, तो जीतन राम मांझी ने राजद से दोस्ती कर ली. तात्कालीक लाभ तो इन्हें मिला कि बेटा संतोष सुमन ‘हम’ से विधान पार्षद हो गए. अब 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में जीतनराम मांझी गया संसदीय क्षेत्र से महागठबंधन के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की चाहत रखते हैं. यदि ऐसा नहीं हुआ, तो जीतन राम मांझी स्वतंत्र होकर ‘हम’ से चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि इस सीट पर राजद की भी दावेदारी है.

पिछले दो दशक में गया संसदीय क्षेत्र से दो बार राजद प्रत्याशी स्वर्गीय भगवतिया देवी तथा राजेश कुमार मांझी सांसद रह चुके हैं. वर्तमान में बोधगया के विधायक कुमार सर्वजीत, पूर्व सांसद रामजी मांझी तथा पूर्व सांसद राजेश कुमार मांझी राजद के संभावित प्रत्याशी के रूप में चर्चा में हैं. विधायक कुमार सर्वजीत के राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साथ-साथ इनके बेटे तेजस्वी व तेज प्रताप से भी अच्छे रिश्ते हैं. 1999 में गया संसदीय क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर सांसद बने रामजी मांझी 2004 में भाजपा से टिकट कटने और बलवीर चांद के भाजपा प्रत्याशी होने के बाद राजद में शामिल हो गए थे.

2014 के चुनाव में राजद प्रत्याशी के रूप में वे दूसरे स्थान पर रहे थे. 2004 में भाजपा प्रत्याशी बलवीर चांद को राजद के राजेश कुमार मांझी ने हराया था. लेकिन 2009 में राजेश मांझी भाजपा के हरि मांझी से हार गए. 2019 के लिए राजेश मांझी भी राजद से प्रत्याशी बनने के लिए प्रयासरत हैं. लेकिन गया संसदीय क्षेत्र का चुनावी समीकरण आगामी लोकसभा चुनाव में क्या होगा, इसका असली पता तो नए साल 2019 में ही चल सकेगा. किस दल से किसका गठबंधन होगा, इस बात पर भी प्रत्याशियों का भविष्य निर्भर करता है. फिलहाल चुनावी चर्चा में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

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