रिक्शा चालक की बेटी ने जीता गोल्ड, मां ने कहा- यह आसान नहीं था

कहते हैं कि मेहनत का फल मीठा होता है. इसी मीठे फल को भारत की स्वप्ना बर्मन ने बुधवार को महिलाओं की हेप्टाथलोन स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर चखा. वे इस स्पर्धा में मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट बनीं. इसके साथ ही एक बार फिर महिला एथलीट ने देश का मान बढ़ाया, जिस पर भारत गर्व महसूस कर रहा है.

पश्चिम बंगाल की जलपाईगुड़ी की रहने वाली एक रिक्शाचालक की बेटी स्वप्ना ने जैसे ही जीत दर्ज की, पश्चिम बंगाल के घोषपाड़ा में स्वप्ना के घर के बाहर लोगों को जमावड़ा लग गया और चारों तरफ मिठाइयां बांटी जाने लगीं. 21 वर्षीय बर्मन ने दो दिन तक चली सात स्पर्धाओं में 6026 अंक बनाये. इस दौरान उन्होंने ऊंची कूद (1003 अंक) और भाला फेंक (872 अंक) में पहला तथा गोला फेंक (707 अंक) और लंबी कूद (865 अंक) में दूसरा स्थान हासिल किया था. उनका खराब प्रदर्शन 100 मीटर (981 अंक, पांचवां स्थान) और 200 मीटर (790 अंक, सातवां स्थान) में रहा.

स्वप्ना की मां ने कहा, ‘मुझे बेहद खुशी है. मैंने और स्वप्ना के पिता ने उसे यहां तक लाने में काफी कठिनाइयों का सामना किया है. आज हमारा सपना पूरा हो गया. मैंने उसका प्रदर्शन नहीं देखा. मैं दिन के दो बजे से प्रार्थना कर रही थी. यह मंदिर उसने बनाया है. मैं काली मां को बहुत मानती हूं. मुझे जब उसके जीतने की खबर मिली, तो मैं अपने आंसू रोक नहीं पाई.’

स्वप्ना के पिता पंचन बर्मन रिक्शा चालक हैं. हालांकि, पिछले कुछ समय से वे अस्वस्थ हैं और इसी वजह से बिस्तर पर हैं. स्वप्ना की मां ने बताया कि वे अपनी बेटी की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती थीं, लेकिन कभी उनकी बेटी ने इसकी शिकायत नहीं की.  एक वह भी समय था जब स्वप्ना को अपने लिए उपयुक्त जूतों पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा.’ पूर्व क्रिकेट राहुल द्रविड़ की गो स्पोर्ट्स फाउंडेशन ने स्वप्ना की मदद करनी शुरू की. जिसकी वजह से वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर पा रही हैं.

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