कहीं चाय बेचने वाला मॉडल बन जाता है, वहीं भारत को पदक दिलाने वाला आज चाय बेच रहा है

भारत ने एशियाई खेल 2018 में कुल 67 पदक जीते हैं, जिसमें 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य पदक हैं. इन पदकों में से एक पदक 23 साल के हरीश कुमार का भी है. वह अभी-अभी इंडोनेशिया के जकार्ता से शुक्रवार को ही पदक जीतकर भारत लौटे हैं. देश को पदक दिलाने के बाद हरीश एक बार फिर अपनी असल जिंदगी में लौटने पर हो गए हैं. पदक विजेता एक छोटे से ढाबे पर चाय बेचते हैं, पर किसी भी ग्राहक को शायद ही यह भनक होगी कि हरीश एशियाड में पदक जीत कर आए हैं. भारत ने सेपक टाकरा में एशियाड इतिहास का पहला पदक इन एशियाई खेलों में ही जीता है.

हरीश का कहना है, एशियन गेम्स में पदक जीतने के बाद भी मैं चाय की दुकान पर काम करने को मजबूर हूं. देश के लिए पदक जीतने वाले को नौकरी दी जानी चाहिए, लेकिन यहां तो कोई पूछने वाला तक नहीं है. दिल्ली सरकार ने अब जाकर पुरस्कार राशि देने का आश्वासन दिया है. मजनूं का टीला स्थित अरुणा नगर के जे ब्लॉक निवासी हरीश कहते हैं, जकार्ता से कांस्य पदक लेकर लौटने के बाद जिंदगी फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आई है.

दरअसल, हरीश का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है. उनके चार भाई और एक बहन है. पिता किराये का ऑटो चलाकर घर का खर्च निकालते हैं. वहीं, मां दूसरे के घरों में साफ-सफाई करती हैं, जबकि हरीश चाय की दुकान पर अपने भाइयों का हाथ बंटाते हैं.

हरीश इससे पहले भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस खेल में पदक जीत चुके हैं, लेकिन आज तक आर्थिक हालात में कुछ सुधार नहीं हुआ, क्योंकि न तो दिल्ली सरकार और न ही किसी अन्य की मदद मिली. सरकारी मदद पर हरीश का कहना था कि अब एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतकर लाया हूं तो उम्मीद है कि दिल्ली सरकार की तरफ से कोई नौकरी मिल जाए. उन्होंने कहा, परिवार की आर्थिक तंगी को लेकर चिंतित रहने के कारण अभ्यास पर पूरी तरह से ध्यान भी नहीं दे पाता हूं.

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