क्या अटल जी के आचरण का अनुकरण करेंगे मोदी जी?

modiiiशेख चिल्ली की बातें भारत जैसे देश में नहीं चलती हैं. किसान जानता है कि मेरी इतनी जमीन है, न मैं इसकी उत्पादकता दुगनी कर सकता हूं और न सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य दुगनी करेगी. अगर बहुत अच्छी सरकार आ गई, तो समर्थन मूल्य में  दस प्रतिशत का इजाफा कर देगी. भारत में हरेक किसान के पास जानवर होते हैं. वह भी आमदनी का जरिया होते हैं, लेकिन सरकार उनको गाय के नाम पर डरा रही है. ऐसा वातावरण बना दिया है कि कोई संघ का आदमी भगवा कपड़ा पहनकर या अपने आप को कोई बजरंग दल का सदस्य बताकर किसी पर भी हाथ डाल सकता है. पुलिस भी उससे डरती है. ये बहुत खराब वातावरण है. देश का  इससे भला नहीं होगा.

मैं समझता हूं कि वाजपेयी जी का निधन एक मौका है. सरकार को इस बात का आंकलन करना चाहिए कि गलती कहां हुई. कहां से शुरू हुए थे और कहां चले गए. संसद में राहुल गांधी, मोदी जी से गले मिलने आ गए तो मोदी जी सकपका गए कि मैं क्या जवाब दूं. यदि अटल जी होते तो खड़े होकर गले मिलते और बोलते राहुल जी आपने आज बड़ा अच्छा भाषण दिया. इसमें क्या चला जाता भाजपा का? लेकिन मोदी जी में और भाजपा में यह दम नहीं है.

उल्टे, कांग्रेस मुक्त भारत, पप्पू, इटालियन आदि बोल कर वैमनस्य पैदा कर दिया है. कुल मिला कर मोदी जी ने उस घटना से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को गिरा दिया. जवाहरलाल नेहरू जिस कुर्सी पर बैठे थे, उस पर आप बैठे हैं. उसके बीच में बारह प्रधानमंत्री और आए-गए. किसी का तो अनुकरण करिए. अटल जी का ही करिए. कांग्रेस को छोड़िए, नेहरू को छोड़िए. अटल जी जो करते थे, उसका 50 प्रतिशत भी आप कर देंगे तो आपकी पार्टी का भला हो जाएगा. अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है. हार-जीत छोड़ दीजिए. कोई चुनाव अंतिम चुनाव नहीं होता.

भाजपा ने हरिवंश को राज्यसभा का उपसभापति बनाया. हरिवंश बहुत अच्छे आदमी हैं. लेकिन बधाई भाषण में मोदी जी ने ऐसे शब्द कह दिए जिसे रिकॉर्ड से हटाना पड़ा. शालीनता की एक न्यूनतम रेखा तो खींच दीजिए कि इससे नीचे आप नहीं जाएंगे. वेंकैया नायडू में इतनी ताकत नहीं थी कि वे मोदी जी के भाषण के शब्द को रिकॉर्ड से हटा सकें. अमित शाह और अरुण जेटली समझ गए कि जिस बात को रिकॉर्ड से हटा दिया जाता है, उसकी रिपोर्टिंग नहीं होती. अमित शाह और अरुण जेटली समझ गए कि ये तो उल्टा पड़ जाएगा. आजकल तो ट्‌वीटर है, टीवी है. हमने पढ़ लिया कि प्रधानमंत्री ने क्या बोला था. इससे संसद की गरिमा कम हुई थी.

नोटबंदी और जीएसटी से अर्थव्यवस्था को जो नुकसान होना था वह हो गया है. अब जनता निर्णय लेगी कि ये कदम सही थे या गलत. आज हर आदमी अपना मन बना चुका है कि किसे वोट देगा. लेकिन, कम से कम मोदी जी अपना आचरण तो ठीक करिए और अटल जी के निधन से अच्छा मौका कोई नहीं है, यह कहने के लिए कि हम उनके आचरण का अनुकरण करेंगे.

मुझे बड़ी खुशी हुई कि सत्यपाल मलिक को कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. ये तो मुझे कभी उम्मीद ही नहीं थी. मैंने सुना था कि डोभाल साहब या किसी अन्य पुलिस अफसर को   वहां भेज रहे हैं. सत्यपाल मलिक सोशलिस्ट हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह के साथ काम किया है. मेरठ के किसान हैं. उनको कश्मीर का राज्यपाल बनाए जाने के क्या संकेत हैं, मेरी समझ में नहीं आया, लेकिन मुझे बहुत खुशी है. इसलिए कि वो सुलझे हुए आदमी हैं. क्या कर पाएंगे और क्या नहीं कर पाएंगे, उसे लेकर मेरी आशंका इसलिए हैं क्योंकि कश्मीर की सबसे बड़ी ताकत, सबसे बड़ी पहचान आर्टिकल 370 है. भाजपा हमेशा से कहती रही है कि इसकी समीक्षा हो.

लेकिन, महबूबा के साथ सरकार बनाने के बाद वे 370 भूल गए थे. अब सत्यपाल मलिक तभी कुछ कर पाएंगे जब मोदी जी उन्हें कुछ करने देंगे. कायदे से कश्मीर असेंबली को मजबूत बनाने की जरूरत है. कश्मीर का खुद का इलेक्शन कमीशन हो, इससे भाजपा को क्या नुकसान है? देश का क्या नुकसान है? यूनियन ऑफ इंडिया में कश्मीर यह प्रस्ताव तो पास नहीं कर सकता है कि उसे पाकिस्तान के साथ जाना है या सीरिया के साथ जाना है. लेकिन, इतने भर से कश्मीरियों को लगेगा कि हमारी सेल्फ-रिस्पेक्ट हमें वापस मिल गई है. चिदंबरम साहब ने एक दिन कह दिया कि कश्मीर के बच्चे आजादी बोलते हैं, तो उसका मतलब आजादी नहीं बल्कि ऑटोनोमी होती है. इस बयान में क्या आपत्तिजनक है? कश्मीर को अगर वापस ऑटोनोमी मिल जाए तो इसमें क्या दिक्कत है? प्रधानमंत्री ने पिछले साल लाल किले से कहा था कि न गाली से न गोली से, कश्मीर अपना होगा गले मिलने से.

तो फिर इसी विचार को लागू करिए. सत्यपाल मलिक को हिदायत दीजिए कि कश्मीरियों को गले लगाएं और कहें कि तुम्हारे अधिकार को कोई नहीं छिनेगा और 370 के एक-एक प्वांइट को डिस्कस करें कि कौन सा हिस्सा कश्मीरियों के लिए कमजोर हुआ है. सारे कश्मीरी यदि सरकार के साथ बात नहीं करते हैं तो उसका कोई मतलब नहीं है. आपने जो  प्रॉमिस किए हैं, उन्हें पूरा करना ही होगा. फिर देखिए कि रातोंरात कैसे कश्मीर की हालत बदलती है. संतोष भारतीय हमारे मित्र हैं, दो साल पहले उनके साथ हम कश्मीर गए थे. गिलानी साहब से, मीरवाइज मौलवी उमर फारूक से, शब्बीर शाह से, यूसुफ तारिगामी से मिले थे. कुल मिला कर बात ये निकली थी कि यह उपद्रव कोई आज की समस्या नहीं है. धीरे-धीरे यहां की हालत इतनी खराब कर दी कि वो बेचारे क्या कर सकते हैं. अगर वो हिन्दुस्तान के पक्ष में कुछ बोलें तो मुश्किल और दूसरे तरफ बोलें तो पाकिस्तानी हैं.

भाजपा ने एक नया काम किया है चार साल में. आज आम जनता के जेहन में पाकिस्तान एक देश नहीं है. पाकिस्तान एक गाली है. कोई भी बात करे तो पाकिस्तान. पाकिस्तान से हमारा क्या लेना-देना है? हमारा आदर्श पाकिस्तान है क्या? हमारा आदर्श भारत है, हमारा आदर्श चार हजार साल की भारतीय संस्कृति है. उसको तो गाली मत दीजिए. उसमें वादाखिलाफी, झूठ बोलना, छल कपट करना नहीं है. डॉ कर्ण सिंह के बाद पहला राजनीतिक व्यक्ति आपने वहां अप्वाइंट किया है. इसके लिए मैं आपको बधाई देता हूं. कांग्रेस ने नहीं किया. कांग्रेस ने वहां बुद्धिमान ब्यूरोक्रेट भेजे थे, बीके नेहरू आदि को. लेकिन आपने जो काम किया है वो बहुत अक्ल का काम है. आपने एक पॉलिटिकल आदमी को भेजा है, शायद यह सोच कर कि कश्मीर एक पॉलिटिकल प्रॉब्लम है. कश्मीर में महबूबा सरकार के फायनेंस मिनिस्टर ने एक बार कहा कि कश्मीर राजनीतिक नहीं सामाजिक समस्या है.

महबूबा मुफ्ती ने उन्हें पद से हटा दिया था. बिल्कुल सही किया था. कश्मीर बिल्कुल पॉलिटिकल प्रॉब्लम है. मोदी जी वहां जाते हैं तो कहते हैं कि नौकरी दूंगा. आप कोई खैरात बांट रहे है क्या? कश्मीरियों का दिल वापस जीतिए और उसके लिए पूरी अथॉरिटी दीजिए सत्यपाल मलिक को. उनसे कहिए कि  कश्मीरियों का दिल जीतें. पुलिस अपना काम कर रही है, आर्मी अपना काम कर रही है और वो तो करेगी ही. कश्मीरियों का दिल जितने की जरूरत है. सत्यपाल मलिक में ये सब हुनर है. वे यह काम कर सकते हैं. कश्मीर में एक नया अध्याय फिर से शुरू हो सकता है. फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला सबको बैठाइए और गर्वनर साहब से कहिए कि सबसे सलाह करें. मोदी जी सिर्फ इतना वादा कर दें कि हिन्दुस्तान ने जिस अग्रीमेंट पर दस्तखत किया है, उससे हम मुकरेंगे नहीं. आप देखिए कश्मीर का समाधान कैसे निकल आता है.

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