हर किरदार में सुपरहिट हैं सनी देओल

62 की उम्र में भी सनी देओल का जलवा बरक़रार, इनके दमदार डायलॉग्स के आगे आजतक कोई नहीं टिका

नई दिल्ली (प्रवीण कुमार): बॉलीवुड में सनी देओल एक ऐसा नाम है, जिसे सुनने के बाद हर शख्स के दिमाग में उनके एक्शन सीन और उनके दमदार डायलॉग सामने आ जाते हैं. सनी ने बॉलीवुड को कई शानदार फिल्में दी हैं. 19 अक्टूबर 1956 को साहनेवाल में जन्मे सनी देओल इस साल 62 वर्ष के हो चुके हैं. यकीन करना मुश्किल है कि 62 की उम्र में भी सनी में अब भी वही जोश देखने को मिलता है, जो किसी 25 से 30 साल के नौजवान में देखने को मिलता है. बॉलीवुड में सनी देओल बिल्कुल अपने पिता धर्मेन्द्र की कॉपी हैं. जी हां, जिस तरह धर्मेन्द्र अपनी माचो इमेज के लिए फिल्म इंड्रस्टी में जाने जाते हैं. ठीक वैसे ही सनी देओल भी अपनी माचो इमेज के लिए बॉलीवुड में जाने जाते हैं.

सनी देओल ने अपने करियर की शुरुआत साल 1984 में फिल्म बेताब से की थी. इस फिल्म में उनके अपोजिट अभिनेत्री अमृता सिंह नजर आई थीं. फिल्म ने बॉक्स-ऑफिस पर काफी अच्छी कमाई की थी. साथ ही इस फिल्म ने सनी को उनका पहला फिल्म-फेयर अवार्ड भी दिलाया. इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में कई बैक-टू-बैक हिट फ़िल्में दीं. जिसमें यतीम, चालबाज़ और सल्तनत जैसी फ़िल्में शामिल हैं.

90 के दशक में सनी ने कई सुपर हिट फिल्मों में काम किया. इस दशक में उन्होंने राज कुमार संतोषी द्वारा निर्देशित फिल्म घायल की. जिसने उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड के साथ-साथ राष्ट्रीय पुरुस्कार भी दिलाया. इसके अलावा सनी ने कई सुपरहिट व ब्लॉकबस्टर फ़िल्में की, जिनमें दामिनी, शंकरा, डकैत, सलाखें, निगाहें, त्रिदेव, विश्वात्मा, सोनी-माहिवाल, डर, जीत, अजय, घातक,ज़िद्दी, बॉर्डर, गदरः एक प्रेम कथा, इंडियन, अपने, यमला पगला दीवाना जैसी फ़िल्में शामिल हैं.

जहां एक तरफ सनी ने कई हिट फिल्मों में काम किया है, तो वहीं दूसरी ओर उनके करियर में कई ऐसी फिल्मों की लंबी लिस्ट भी है, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाईं. लेकिन इससे सनी की इमेज को कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. उनके करोड़ों फैंस आज भी उनकी फिल्मों का इंतजार करते हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि जहां सनी की उम्र के अभिनेता आज फिल्म इंड्रस्टी से गायब हैं या फिर साइड रोल निभाते हैं, वहीं सनी देओल आज भी फिल्मों में मुख्य अभिनेता का ही किरदार निभाते नज़र आते हैं.

आपको बता दें कि जल्द ही सनी देओल फिल्म भैयाजी सुपरहिट से वापसी करने जा रहे हैं. जो नवंबर 2018 तक रिलीज हो जाएगी. फिल्म में सनी देओल दर्शकों को एक्शन और कॉमेडी दोनों करते दिखाई देंगे. फिल्म में सनी देओल के अलावा प्रीति जिंटा, अरशद वारसी, अमीषा पटेल, श्रेयस तलपड़े, पंकज त्रिपाठी आदि मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे.
इसके अलावा हाल ही में प्रीति जिंटा ने भी पुष्टि करते हुए एक चैट शो में कहा कि शादी के बाद उनकी पहली रिलीज भैयाजी सुपरहिट है. इस फिल्म के लिए वे खासी उत्साहित हैं. फिल्म का निर्देशन नीरज पाठक कर रहे हैं. पहले किसी कारण से यह फिल्म बीच में ही लटक गई थी, लेकिन अब फिल्म की शूटिंग बिना बाधा के पूरी हो चुकी है और रिलीज को तैयार है. फिल्म हिट हुई तो यकीनन यह सनी देओल के लिए किसी बर्थडे गिफ्ट से कम नहीं होगा.

सनी देओल ने बॉलीवुड पर एक लंबे अरसे से राज किया है. सनी देओल एक्शन के लिए तो जाने ही जाते हैं, लेकिन उनके डायलॉग्स दर्शकों को आज भी सिनेमाघरों तक लाने की क्षमता रखते हैं. आइए जानते हैं सनी देओल के उन दमदार डायलॉग्स को जिनके दम पर उनकी फिल्में हिट हुईं.

घायल (1990)
1. झक मारती है पुलिस. उतारकर फेंक दो ये वर्दी और पहन लो बलवंतराय का पट्‌टा अपने गले में यू बास्टर्ड. ऑन माई फुट, माई फुट! अंधेर नगरी है ये. बस. ऐसे गरीब, कमज़ोर लोगों पर दिखाओ अपनी मर्दानगी. वर्दी का रौब. इन्हीं हाथों को बांध सकती हैं तुम्हारी हथकड़ियां. बलवंतराय के नहीं. जाकर दुम हिलाना उसके सामने. तलवे चाटना. बोटियां फेकेंगे बोटियां.
2. बहुत पछताओगे इंस्पेक्टर, अगर तुमने मुझे ज़िंदा छोड़ दिया तो.
3. जाओ बशीर ख़ान जाओ, किसी नाटक कंपनी में भर्ती हो जाओ, बहुत तरक्की मिलेगी तुम्हें, अच्छी एक्टिंग कर लेते हो.

दामिनी (1993)
1. चिल्लाओ मत. नहीं तो ये केस यहीं रफा दफा कर दूंगा. न तारीख, न सुनवाई, सीधा इंसाफ. वो भी ताबड़तोड़.
2. मैदान में खुले शेर का सामना करोगे, तुम्हारे मर्द होने की गलतफहमी दूर हो जाएगी.
3. तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख…तारीख पर तारीख…तारीख मिलती रही है, लेकिन इंसाफ नहीं मिला. माई लॉर्ड इंसाफ नहीं मिला…मिली है तो सिर्फ यह तारीख.
4. चड्‌ढा, समझाओ.. इसे समझाओ. ऐसे ख़िलौने बाज़ार में बहुत बिकते हैं, मगर इसे खेलने के लिए जो जिगर चाहिए न, वो दुनिया के किसी बाज़ार में नहीं बिकता, मर्द उसे लेकर पैदा होता है. और जब ये ढाई किलो का हाथ किसी पर पड़ता है न तो आदमी उठता नहीं, उठ जाता है.
5. अगर अदालत में तूने कोई बद्तमीजी की तो वहीं मारूंगा. जज ऑर्डर-ऑर्डर करता रहेगा और तू पिटता रहेगा.

घातक: लिथल (1996)
1. ये मज़दूर का हाथ है कात्या, लोहा पिघलाकर उसका आकार बदल देता है! ये ताकत ख़ून-पसीने से कमाई हुई रोटी की है. मुझे किसी के टुकड़ों पर पलने की जरूरत नहीं.
2. हलक़ में हाथ डालकर कलेजा खींच लूंगा हरामख़ोर.. उठा उठा के पटकूंगा! उठा उठा के पटकूंगा! चीर दूंगा, फाड़ दूंगा साले!
3. जो दर्द तुम आज महसूस करके मरना चाहते हो, ऐसे ही दर्द लेकर हम रोज़ जीते हैं.
4. आ रहा हूं रुक, अगर सातों एक बाप के हो तो रुक, नहीं तो कसम गंगा मइय्या की, घर में घुस कर मारूंगा, सातों को साथ मारूंगा, एक साथ मारूंगा, अरे रूक!!
5. पिंजरे में आकर शेर भी कुत्ता बन जाता है कात्या. तू चाहता है मैं तेरे यहां कुत्ता बनकर रहूं. तू कहे तो काटूं, तू कहे तो भौंकू .
6. डरा के लोगों को वो जीता है, जिसकी हड्डियों में पानी भरा हो. इतना ही मर्द बनने का शौक है न कात्या, तो इन कुत्तों का सहारा लेना छोड़ दे.

ग़दर: एक प्रेम कथा (2001)
1. अशरफ अली! आपका पाकिस्तान ज़िंदाबाद है, इससे हमें कोई ऐतराज़ नहीं, लेकिन हमारा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद है, ज़िंदाबाद था और ज़िंदाबाद रहेगा! बस बहुत हो गया.
2. किन हिंदुस्तानियों को गोली से उड़ाएंगे आप लोग, हम हिंदुस्तानियों की वजह से आप लोगों का वजूद है. दुनिया जानती है कि बंटवारे के वक्त हम लोगों ने आप लोगों को 65 करोड़ रुपए दिए थे तब जाकर आपके छत पर तरपाल आई थी. बरसात से बचने की हैसियत नहीं और गोलीबारी की बात कर रहे हैं आप लोग!
3. बाप बनकर बेटी को विदा कर दीजिए, इसी में सबकी भलाई है, वरना अगर आज ये जट बिगड़ गया तो सैकड़ों को ले मरेगा.

जीत (1996)
1. नहीं! तुम सिर्फ मेरी हो, और किसी की नहीं हो सकती. हम दोनों के बीच अगर कोई आया तो समझो वो मर गया. काजल! इन हाथों ने सिर्फ हथियार छोड़े हैं, चलाना नहीं भूले. अगर इस चौखट पर बारात आई तो डोली की जगह उनकी अर्थियां उठेंगी और सबसे पहले अर्थी उसकी उठेगी जिसके सर पर सेहरा होगा. लाशें बिछा दूंगा, लाशें!

ज़िद्दी (1997)
1. चिल्लाओ मत इंस्पेक्टर, ये देवा की अदालत है और मेरी अदालत में अपराधियों को ऊंचा बोलने की इजाज़त नहीं.
2. जिस वकील को मारने के लिए तूने अपने आदमी भेजे थे वो अशोक प्रधान.. देवा का बाप है. अगर दोबारा तूने ऐसी ग़लती की तो तेरा वो हश्र करूंगा कि तुझे अपने हाथों से अपनी ज़िंदगी फिसलती हुई नज़र आएगी.

बॉर्डर (1997)
1. मथुरादास, आप ख़ुश हैं कि आप घर जा रहे हैं. मगर ख़ुशी का जो ये बेहूदा नाच आप अपने भाइयों के सामने कर रहे हैं, अच्छा नहीं लगता. आपकी छुट्‌टी मंज़ूर हुई है क्योंकि आपके घर में प्रॉब्लम है. दुनिया में किसे प्रॉब्लम नहीं? ज़िंदगी का दूसरा नाम ही प्रॉब्लम है.

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