सीतामढ़ीः अंदरूनी कलह से पार पाना भाजपा की चुनौती

 

sitamariबीते 28 से 30 सितंबर के बीच बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने सीतामढ़ी जिले में विधानसभा बूथ स्तरीय त्रिशक्ति कार्यकर्ता सम्मेलनों में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के पक्ष में वोटों की बेहतर गोलबंदी का मंत्र पार्टी कार्यकर्ताओं को दिया. उन्होंने गांव-गांव में सरकार की उपलब्धियों को पहुंचाने की अपील करते हुए कांग्रेस की मंदिर राजनीति पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जो राहुल गांधी कल तक राम को मानते नहीं थे, वे भी अब मंदिर जा रहे हैं. एनडीए के पक्ष में 2019 का चुनाव परिणाम होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका बिहार में 40 और देश में 350 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य है.

सीतामढ़ी जिला भाजपा संगठन पूर्व से अर्ंतकलह का शिकार रहा है. बाहरी तौर पर पार्टी के सभी नेता एकजुटता प्रदर्शित करते रहे हैं, परंतु आंतरिक हालात कभी बेहतर नहीं रहे. जिले में पार्टी के कद्‌दावर नेताओं की अलग-अलग रणनीति बनती रही है. आलम यह रहा है कि पार्टी संगठन खासतौर से विभिन्न समूह विशेष के चंगूल में घिरता रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में जब कुशवाहा बिरादरी के राम कुमार शर्मा को एनडीए गठबंधन के तहत सीतामढ़ी सीट से प्रत्याशी बनाया गया था, तब कुछ अन्य बिरादरी को ये बात नागवार गुजरी थी.

जानकारों का साफ तौर पर मानना था कि अगर मोदी लहर नहीं होती, तो प्रत्याशी रहे राम कुमार शर्मा के लिए चुनावी चक्रव्यूह को तोड़ना आसान नहीं था. लोकसभा चुनाव के महज तीन साल बाद 21 जून 2017 को सीतामढ़ी जिला मुख्यालय डुमरा स्थित परित्यक्त हवाई अड्‌डा मैदान में आयोजित भाजपा का ‘सबका साथ-सबका विकास’ कार्यक्रम में तब विरोध उभर कर सामने आया था, जब कार्यक्रम में भागीदारी को लेकर पहुंचे रालोसपा सांसद राम कुमार शर्मा का जिला भाजपा संगठन के पदाधिकारियों ने सांकेतिक विरोध कर दिया था.

आलम यह रहा कि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सह पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन की मौजूदगी में कार्यक्रम संचालन की कमान विधान पार्षद देवेश चंद्र ठाकुर को संभालनी पड़ी थी. कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान कुछ लोगों ने सीतामढ़ी सीट से भाजपा प्रत्याशी को उतारने की मांग भी प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष रखी थी. वहीं, विधान पार्षद देवेशचंद्र ठाकुर ने स्वयं प्रदेश अध्यक्ष को ही सीतामढ़ी लोकसभा सीट से चुनावी समर में आने का आमंत्रण तक दे दिया. वैसे तो चुनाव में अभी वक्त है. गठबंधन की राजनीति का अगला पड़ाव क्या होगा, फिलहाल कहना मुश्किल है. परंतु इतना साफ है कि जिला भाजपा संगठन की मंशा अपनी पार्टी से ही चुनाव मैदान में प्रत्याशी उतारने की है. जहां तक वर्तमान राजनीतिक माहौल का सवाल है, तो इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है कि सीतामढ़ी में एनडीए के लिए चुनावी राह आसान नजर नहीं आ रही है.

एक ओर गठबंधन के तहत सीट को लेकर अंदरखाने उबाल आने लगा है, तो दूसरी ओर महागठबंधन के तेवर भी सख्त हैं. महागठबंधन की तरफ से राजद व कांग्रेस दोनों इस सीट पर अपनी-अपनी दावेदारी का डंका पीट रहे हैं. वहीं कुछ ने स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में अपना भाग्य आजमाने को लेकर वोटों की गोलबंदी शुरू कर दी है. इस सबके बीच, आरक्षण की चिंगारी रही सही कसर पूरी करने को आतुर है.

बीते 28 से 30 सितंबर के बीच बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने सीतामढ़ी जिले में विधानसभा बूथ स्तरीय त्रिशक्ति कार्यकर्ता सम्मेलनों में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के पक्ष में वोटों की बेहतर गोलबंदी का मंत्र पार्टी कार्यकर्ताओं को दिया. उन्होंने गांव-गांव में सरकार की उपलब्धियों को पहुंचाने की अपील करते हुए कांग्रेस की मंदिर राजनीति पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जो राहुल गांधी कल तक राम को मानते नहीं थे, वे भी अब मंदिर जा रहे हैं.

एनडीए के पक्ष में 2019 का चुनाव परिणाम होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका बिहार में 40 और देश में 350 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि भाजपा सबका साथ सबका विकास चाहती है, जबकि अन्य पार्टियां परिवारवाद से त्रस्त हैं. भाजपा अंत्योदय से सूर्योदय के सिद्धांत को लेकर चल रही है और वह राष्ट्रहित में कार्य करती है, इसलिए वंदे मातरम बोलती है. प्रदेश अध्यक्ष के सबक को भाजपा कार्यकर्ताओं ने कितनी गंभीरता से लिया है यह तो आने वाला समय ही बताएगा. लेकिन प्रदेश अध्यक्ष को इस दौरे में विरोध का भी सामना करना पड़ा.

शिवहर जाने के दौरान युवा संघर्ष मोर्चा व सवर्ण मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले को रोककर विरोध जताया. एससी-एसटी कानून में संशोधन तथा आर्थिक आधार पर आरक्षण के मसले पर मोर्चा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे भी लहराए. विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि भाजपा सरकार ने कानून में संशोधन कर छलने का काम किया है.

अब एक नजर सांसद राम कुमार शर्मा के कार्यकाल पर भी डालना आवश्यक है. एनडीए गठबंधन से बतौर सांसद निर्वाचित रालोसपा के राम कुमार शर्मा अपने संसदीय कार्यकाल को पूरा करने के करीब हैं. मगर उनके कार्य से गठबंधन दल के नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक संतुष्ट नहीं हैं. क्षेत्र के आम मतदाताओं के बीच भी उनका बेहतर संबंध स्थापित नहीं हो सका है. इसका कारण यह बताया जाता है कि सांसद ने कभी-भी आम जनों के बीच रहकर स्थानीय समस्या के निदान को लेकर किसी भी प्रकार का विचार विमर्श तक करना मुनासिब नहीं समझा.

जिले में विकास का कोई ऐसा काम भी नहीं कराया जा सका है, जिसे सांसद की उपलब्धि के तौर पर बताया जा सके. सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन को ही सांसद अपनी उपलब्धि बताते रहे हैं. प्रधानमंत्री के निर्देश के आलोक में गोद लिए गए गांवों की सूरत भी सांसद नहीं बदल सके हैं. सांसद का अधिकांश समय दलगत राजनीतिक कार्यक्रमों में ही गुजरा है. इसका नतीजा है कि जातिगत राजनीति करने वालों को छोड़ कर आम लोगों में सांसद के प्रति रोष है. कुल मिलाकर, अगर देखा जाए तो फिलवक्त एनडीए के लिए सीतामढ़ी में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है.

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