आयुष्मान भारत: मरीजों की भीड़ देख गायब हुए डॉक्टर

acardआयुष्मान कार्ड नहीं बना, मरीज़ की हो गई मौत 

झारखण्ड जैसे राज्य के लिए यह गर्व की बात थी कि प्रधानमंत्री ने अपनी इस महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत की शुरुआत इस यहां से की. राज्य के जिन 57 लाख परिवारों को इस योजना से जोड़ा गया उन्हें लगा कि अब उनकी  स्वास्थ्य सम्बन्धी सारी चिंताएं दूर हो गईं. अब उन्हें इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक की सहायता मिल जायेगी. लेकिन योजना के लागू होते ही रांची के सदर अस्पताल में महिला मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी.

देखते ही देखते 150 से अधिक गर्भवती महिलाएं कतार में गईं, पर डॉक्टर गायब हो गए. जब महिलाओं को कहीं बैठने की जगह नहीं मिली तो वे सदर अस्पताल की सड़कों पर बैठ गईं. वहीँ जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के कारण डायरिया से पीड़ित भक्तु रविदास की मौत हो गई.

आपातकालीन सेवा में तैनात डॉक्टर पीके साहू ने उसे आयुष्मान योजना का कार्ड बनाकर लाने को कहा. उसका बेटा कार्ड के लिए लाईन में 6 घंटे तक लगा रहा, पर कार्ड नहीं बन पाया. इस बीच भक्तू रविदास की मौत हो गई. जबकि निजी अस्पताल तो कार्डधारी का भी इलाज करने से कतरा रहे हैं. यहां मरीजों को इस योजना के तहत लाभ नहीं मिल रहा है.

जबकि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा का कहना है कि अगर कोई अस्पताल कार्डधारी का इलाज आयुष्मान योजना के तहत नहीं करता है तो इस पर कड़ी कार्रवाई होगी और अस्पताल का निबंधन रद्द कर दिया जाएगा.

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