दुष्कर्म जैसे मामलों में जल्द फैसला लेने में हमसे बेहतर है पाकिस्तान

जब भी हमारे सामने पाकिसतान का जिक्र आता है तो हमारे मन में बस नकारात्मक भाव ही आते है. ज्यादात्तर हम लोग बस पाकिस्तान को हमसे कुछ सीख लेने की ही हिदायतें देते है और पाकिस्तान को आए दिन बस खरी-खोटी ही सुनाते नज़र आते है. लेकिन इस बार हमें खुद पाकिस्तान से कुछ सीख लेने की ज़रूरत है. वैसे बता दें कि पाकिस्तान में हुआ ज़ैनब केस किसी से भी छुपा नहीं है और अब इसी केस में जो फैसला पाकिस्तान ने लिया है वो तारिफें काबिल है और इसी से हमें भी कुछ सीख लेने की ज़रूरत है.  बता दें कि पाकिस्‍तान की लखपतकोट जेल में आज जैनब के दोषी को फांसी दे दी गई, वह भी घटना सामने आने के महज दस माह के अंदर.

क्या था ज़ैनब मामला?

इसी वर्ष पाकिस्तान में जनवरी में छह वर्ष की मासूम बच्‍ची के साथ दुष्‍कर्म के बाद हत्‍या करने का मामला प्रकाश में आया था. इसके बाद फरवरी में अपराधी को दोषी मानते हुए इमरान अली को आतंक रोधी कोर्ट (एटीसी) ने मौत की सजा सुनायी थी. उसको कोर्ट ने चार अलग-अलग मामलों में दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई थी. लाहौर से 50 किमी दूर स्थित कौसर शहर में हुए इस अपराध की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी थी और भारत समेत सभी देशों ने इसकी कड़ी निंदा भी की थी. लेकिन आज बुधवार को इमरान की फांसी के साथ इस मामले का अंत भी हो गया. दस माह में अपराध होने से लेकर दोषी को फांसी देने तक सभी के लिए पाकिस्‍तान को जितना सराहा जाना चाहिए उतना सही है.

निर्भया गैंगरेप 
अब जरा हम एक नज़र अपने देश के कुछ मामलों पर भी डाल लेते हैं. आपको याद होगा 16 दिसंबर 2012 की वो ठिठुरन भरी रात, जब एक युवती के साथ उसके दोस्‍त के सामने चलती बस में हैवानियत की गई थी. इस मामले की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी थी. यहां तक की यूएन में भी इसपर अफसोस जताया गया और दोषियों के खिलाफ जल्‍द से जल्‍द कड़ी सजा देने की अपील भी की गई थी, लेकिन वो अपील सिर्फ अपील ही रही और आज तक दोषियों की फांसी का इंतज़ार हो रहा है.

रंगा-बिल्‍ला को फांसी देने में लगे चार वर्ष 
आपको बता दें कि 1978 में हुए गीता और संजय चोपड़ा हत्‍याकांड के दोषी रंगा और बिल्‍ला को भी 1982 में फांसी पर लटकाया गया था. इस मामले में भी बच्‍ची के साथ दुष्‍कर्म के बाद उसकी नृशंस हत्‍या कर दी गई थी. इस मामले की गूंज काफी दूर तक सुनाई दी थी. इस घटना ने सभी को हिला कर रख दिया था.

लेकिन अब हमको दुष्कर्म जैसे जघंय अपराधों में जल्द से जल्द फैसला लेने के मामले में पाकिस्तान से सीख लेने की ज़रूरत है.

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