ऐसे तैयार होगी न्यायपालिका तो कैसे होगा न्याय!

hcourtउत्तर प्रदेश में उस अपर न्यायाधीश को स्थायी न्यायाधीश बनाने की तैयारी हो रही है, जिन्होंने कानून विभाग के प्रमुख सचिव रहते हुए न्यायाधीशों के रिश्तेदारों को सरकारी वकील बनाने की लिस्ट को औपचारिक जामा पहनाया था और पुरस्कार में खुद हाईकोर्ट के जज बन गए. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के अधिवक्ता सत्येंद्रनाथ श्रीवास्तव ने इसका कच्चा चिट्‌ठा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री को भेजा था.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस मामले की गहराई से जांच कराने के लिए कहा था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. अधिवक्ता सत्येंद्रनाथ श्रीवास्तव की शिकायत है कि विधि विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव रंगनाथ पांडेय पद का दुरुपयोग कर और विधायी संस्थाओं को अनुचित लाभ देकर हाईकोर्ट के जज बने.

उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच में सरकारी वकीलों की नियुक्ति को अपनी तरक्की का जरिया बनाया. नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानकों की पूरी तरह अनदेखी की और खुद जज बनने के लिए सारी सीमाएं लांघीं. उन्होंने जानते-समझते हुए करीब 50 ऐसे वकीलों को सरकारी वकील की नियुक्ति लिस्ट में रखा, जिनका नाम एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) में ही दर्ज नहीं था और वे हाईकोर्ट में वकालत करने के योग्य नहीं थे.

उन्होंने सरकारी वकीलों की लिस्ट में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के रिश्तेदारों को शामिल किया और उसके एवज में लाभ प्राप्त कर लिया. उन्होंने विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से जुड़े वकीलों और पदाधिकारियों को भी सरकारी वकील बनवा दिया.

सरकारी वकीलों की लिस्ट में ऐसे भी कई वकील हैं, जो प्रैक्टिसिंग वकील नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस मामले में सीधा हस्तक्षेप कर सरकारी वकीलों की विवादास्पद नियुक्ति प्रक्रिया को रोकने की अपील की गई, लेकिन कार्रवाई होने के बजाय शिकायतकर्ता को ही धमकियां मिलने लगीं.

शिकायतकर्ता अधिवक्ता का कहना है कि उन जजों के बारे में भी छानबीन जरूरी है, जिन जजों ने रंगनाथ पांडेय को जज बनाने की अनुशंसा की. सत्येंद्रनाथ श्रीवास्तव कहते हैं कि छानबीन हो तो पता चलेगा कि जिन जजों ने रंगनाथ पांडेय को जज बनाने की अनुशंसा की थी, उनके आश्रित सरकारी वकील नियुक्त किए गए थे.

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