मनोवैज्ञानिक विकार मौजूदा समय की एक बड़ी समस्या है

sleepसाईकोलॉजीकल डिसऑर्डर यानि मनोवैज्ञानिक विकार, इस शब्द का प्रयोग मनोवैज्ञानिक विकारों से ग्रस्त लोगों के लिए किया जाता है. मानसिक विकार जीवन के कई क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं. शुरुआत में इसके लक्षणों को लोग केवल सामान्य बीमारी के साथ जोड़ते हैं और बाद में ये गंभीर समस्या बन जाती है. इसलिए मानसिक रोगियों की संख्या दिन प्रति दिन लगातार बढ़ती जा रही है.

क्या है मानसिक विकार

मनोविकार किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य की वह स्थिति है, जिसे किसी स्वस्थ व्यक्ति से तुलना करने पर सामान्य नहीं कहा जाता. वे स्थितियां, जिन्हें हल कर पाना एवं उनका सामना करना किसी व्यक्ति को मुश्किल लगता है, उन्हें तनाव के कारक कहते हैं. तनाव किसी व्यक्ति पर ऐसी आवश्यकताओं व मांगों को थोप देता है, जिसे पूरा करना वह अति दूभर और मुश्किल समझता है.

इन मांगों को पूरा करने में लगातार असफलता मिलने पर व्यक्ति में मानसिक तनाव पैदा होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 38 मिलियन भारतीय आज किसी न किसी मानसिक समस्या का सामना कर रहे हैं. लेकिन आज भी हमारे देश में मानसिक समस्याओं पर लोग खुल कर बात करना पसंद नहीं करते. कई लोगों को लगता है कि अगर वे अपनी मानसिक या व्यवाहरिक समस्या किसी को बताते हैं, तो वे समाज में सहानुभूति या मजाक का विषय बन जाएंगे.

मनोविकारों के प्रकार

मनोविकार के भी कई प्रकार होते हैं. हालांकि अपने अलग-अलग रूप में भी यह मनुष्य को दिमागी तौर पर असमान्य ही बनाता है. बचपन से लेकर जीवन के अंतिम समय पायदान पर खड़ा वयक्ति भी मनोविकार का शिकार हो सकता है. इसके विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं.

बाल्यावस्था के विकार

ये जान कर शायद आपको आश्चर्य होगा कि बच्चे भी मनोविकारों का शिकार हो सकते हैं. यह पहली बार शैशवकाल, बाल्यावस्था या किशोरावस्था में पहचान में आते हैं. कभी-कभी बच्चा सावधान या एकाग्र नहीं रहता या वह अत्यधिक फुर्तीला व्यवहार करता है. तो कभी बच्चा अंतर्मुखी हो जाता है, बिल्कुल नहीं मुस्कुराता और देर से भाषा सीखता है.

चिंता विकार

यदि कोई व्यक्ति बिना किसी विशेष कारण के डरा हुआ, भयभीत या चिंता महसूस करता है, तो कहा जा सकता है कि वह व्यक्ति चिंता विकार से ग्रस्त है. व्यग्रता विकार के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिसमें चिंता की भावना विभिन्न रूपों में दिखाई देती है. जहां कोई व्यक्ति बार-बार एक ही बात सोचता रहता है और अपनी क्रियाओं को दोहराता है.

मनोदशा विकार

वे व्यक्ति जो मनोदशा विकार (मूड डिसॉर्डर) के अनुभवों से ग्रसित होते हैं, उनके मनोभाव दीर्घकाल तक प्रतिबंधित हो जाते हैं, वे व्यक्ति किसी एक मनोभाव पर स्थिर हो जाते हैं, या इन भावों की श्रेणियों में अदल-बदल करते रहते हैं. उदाहरण स्वरूप, चाहे कोई व्यक्ति कुछ दिनों तक उदास रहे या किसी एक दिन उदास रहे और दूसरे ही दिन खुश रहे या उसके व्यवहार का तत्कालीन परिस्थिति से कुछ संबंध न हो, वो मनोदशा विकार का शिकार हो सकता है.

विघटनशील विकार

कभी-कभी किसी दर्दनाक घटना के बाद व्यक्ति अपना पिछला अस्तित्व और विगत घटनाएं भूल जाता है और आस-पास के लोगों को पहचानने में असमर्थ हो जाता है. मनोविज्ञान में इस तरह की समस्याओं को विघटनशील विकार कहा जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व समाज से अलग हो जाता है.

मानसिक विकार

आपने सड़क पर कभी किसी व्यक्ति को गंदे कपड़ों में, कूड़े के आसपास पड़े अस्वच्छ भोजन को खाते या फिर अजीब तरीके से बातचीत या व्यवहार करते हुए देखा होगा. उनमें व्यक्ति, स्थान व समय के विषय में कमजोर अभिविन्यास होता है. हम अक्सर उन्हें पागल, बेसुधा आदि कह देते हैं, परंतु मनोविज्ञान की भाषा में इन्हें मानसिक विकार कहते हैं. ये मनोविकार की एक गंभीर परिस्थिति होती है, जो अशांत विचारों, मनोभावों व व्यवहार से उत्पन्न होती है. इससे ग्रस्त व्यक्ति अक्सर काल्पनिकता और भ्रांति की दुनिया में खोए रहते हैं.

इलाज

मनोचिकित्सका में पहले साइकोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें मनोचिकित्सक मरीज से बातचीत के ज़रिए समस्याओं का समाधान करते हैं. इसे आप काउंसलिंग कह सकते हैं. इसमें बातचीत के द्वारा मरीज की बुनियादी समस्याओं और विचारों को समझा जाता है और व्यवहार परिवर्तन पर जोर दिया जाता है.

  1. मनोवैज्ञानिक चिकित्सा: डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक या अन्य इससे जुड़े अन्य पेशेवर इसके शिकार व्यक्तियों से उनके लक्षणों और चिंताओं के बारे में बात करते हैं और उनके बारे में सोचने के नए तरीकों की चर्चा करते हैं.
  2. औषधि-प्रयोग: कुछ लोगों को कुछ समय तक दवा लेने से मदद मिलती है और दूसरों को निरंतर आधार पर दवा की आवश्यकता हो सकती है.
  3. मनोविकार की दवाएं: मनोवैज्ञानिक दवाओं का प्रयोग आमतौर पर मनोवैज्ञानिक विकारों, जैसे कि सिज़ोफ्रेनिया के इलाज के लिए किया जाता है. मनोवैज्ञानिक दवाओं का उपयोग द्विध्रुवी (बाइपोलर) विकारों के इलाज के लिए भी किया जा सकता है या अवसाद का इलाज करने के लिए एंटीडिप्रेसेन्ट के साथ प्रयोग किया जा सकता है.
  4. मनोचिकित्सा: मनोचिकित्सा, जिसे टॉक-थेरेपी भी कहा जाता है, में मरीज की स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य प्रदाता के साथ संबंधित मुद्दों के बारे में बात करना शामिल है. इसके तहत अपनी स्थिति और मूड, भावनाओं, विचारों और व्यवहार के बारे में जानने तथा अंतर्दृष्टि और ज्ञान से तनाव से निपटने और उसके प्रबंधन पर जोर दिया जाता है. मनोचिकित्सा अक्सर कुछ महीनों में सफलतापूर्वक पूरा हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में, दीर्घकालिक उपचार की आवश्यकता होती है.
Share Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *