रांची का रिम्स अस्पताल: दुर्गन्ध के कारण शिफ्ट किया गया लालू को पेइंग वार्ड में

laluरांची का रिम्स अस्पताल पिछले कई महीनों से चर्चा में है. यहां चारा घोटाले में सजा काट रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमों लालू यादव का इलाज चल रहा है. यह राज्य का सबसे बड़े अस्पताल है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ सुविधाओं का घोर अभाव है. hयहां हमेशा लिफ्ट खराब रहती है, जिसके कारण गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियों से चढ़ना होता है.

बेड की कमी की वजह से अस्पताल के गलियारे और सीढ़ियां वार्ड में तब्दील हो जाते हैं और यहीं पर मरीजों को लेटकर उनका उपचार किया जाता है. अस्पताल में एंबुलेंस का अभाव है.  सुपर स्पेशियलिटी वार्ड में कुव्यवस्था का आलम यह है कि लालू प्रसाद को जब जेल से इसके एक वार्ड में शिफ्ट किया गया तो सड़ांध और बदबू के कारण वे इसमें नहीं रह सके.

अस्पताल प्रबंधन से उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें यहां से हटाकर पेईंग वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाए. आखिरकार लालू प्रसाद को पेईंग वार्ड में शिफ्ट किया गया.

रिम्स के एनआइसीयू (नियोनटाल इंटेसिव केयर यूनिट) में एक नवजात का शव लगभग 30 घंटे तक पड़ा रहा. जब शव से दुर्गंध आने लगी तब मरीजों के अभिभावक ने अधीक्षक से शिकायत की. तब जा कर शव हटाया गया. रिम्स के ओटी में अचानक पानी की कमी होने के कारण ऑपरेशन रोकना पड़ा. बिजली हमेशा गायब हो जाती है.

इसके कारण वेंटिलेटर तक काम नहीं करता. रिम्स की व्यवस्था में सुधार को लेकर उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है और न्यायालय ने इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब देने को कहा है. जब राजधानी के अस्पतालों की यह हालत है तो जिला एवं सुदूर प्रखंडों में स्थित सरकारी अस्पतालों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है. राजधानी से सटे सिमडेगा मंें एक नवजात की इसलिए मौत हो गई कि उसे एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया जा सका.

नवजात के पिता देव महली ने पूरी तरह से अस्पताल प्रबंधन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि तीन घंटे तक इधर-उधर दौड़ते रहे, पर एंबुलेंस नहीं मिल पाई, क्योंकि किसी में तेल नहीं था तो किसी का टायर पंक्चर था. बच्चे की मौत के बाद मामले की लीपापोती के लिए बच्चे का शव सिमडेगा के कुरडेग गांव ले जाने के लिए फ्री में एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई.

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