कई की हुई मौत दर्जनों घायल

motiमोतीहारीः स्ट्रीट किलर बने आवारा पशुओं का आतंक

बिहार का अमूमन हर शहर आवारा पशुओं के आतंक से त्रस्त है. शहर की मुख्य सड़कों सहित चौक-चौराहों पर गाय, सांढ़, कुत्तों और सूअरों को विचरण करते देखा जा सकता है. गली मुहल्लों में तो आवारा कुत्तों और सूअरों ने अपनी बस्ती बना ली है. इनके आक्रमण से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं दर्जनों लोग अपाहिज की जिन्दगी जीने को मजबूर हैं. जिला प्रशासन और नगर परिषद जब नींद से जागता है, तो सड़कों पर लाउडस्पीकर से चेतावनी दी जाती है कि सभी पशुपालक अपने पशुओं को बांध कर रखें अन्यथा इन्हें पकड़कर ढाट में डाल दिया जाएगा और इसी चेतावनी के साथ कार्यवाही पूरी हो जाती है. जबकि नियमानुसार नगर परिषद के पास पशुओं को रखने के लिए अनुमति लेने का भी प्रावधान है. लेकिन नगर परिषद के पास पशुओं की संख्या तक की सही जानकारी नहीं है. विगत दिनों मोतीहारी चेम्बर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में भी यह मुद्दा उठाया गया था, परन्तु वहां उपस्थित प्रशासनिक पदाधिकारियों एवं नगर परिषद के लोगों ने भी गोल-मटोल जवाब देकर हाथ खड़े कर लिए.

जनता ने उठाई आवाज़

रोज-बरोज इन स्ट्रीट किलरों के आतंक को देखते हुए चम्पारण प्रेस क्लब के अध्यक्ष सह वरीय पत्रकार चन्द्रभूषण पाण्डेय ने शहर को आवारा पशुओं से मुक्त कराने के लिए आवाज उठाई. विगत दिनों श्री पाण्डेय के साथ राजद के वरीय नेता ठाकुर बजरंगी नारायण सिंह, सिविल सोसाइटी की तरफ से पत्रकार राकेश कुमार, आनन्द प्रकाश, ज्ञानेश्वर गौतम और अन्य बुद्धिजीवियों ने अनुमण्डल पदाधिकारी प्रियरंजन राजू को एक आवेदन देकर आवारा पशुओं से शहर को मुक्त कराने की मांग की और भयावह स्थिति से अवगत कराया. पहली बार इस मुद्दे पर संजीदगी से कार्रवाई करने का आश्वासन देते हुए एसडीओ ने सार्थक पहल की. इस बावत एसडीओ श्री राजू ने बताया कि विगत एक सप्ताह में तकरीबन 25 गायों को सड़क से पकड़कर गोशाला में भेजा गया है. उन्होंने कहा कि सड़कों पर घूम रहे आवारा सांढ़ों को अभी नहीं पकड़ा जा सका है.

क्योंकि नगर परिषद और जिला प्रशासन के पास बेहोशी की दवा देने वाले शूटर नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वन-विभाग को कहा गया है, लेकिन उन्होंने भी शूटर नहीं होने की बात कही है. बकौल श्री राजू, वन विभाग के प्रतिवेदन के आधार पर जिलाधिकारी से निवेदन किया जा रहा है कि शूटर उपलब्ध कराने के लिए सरकार से मांग की जाए. शूटर उपलब्ध होते ही शहर आवारा पशुओं के आतंक से मुक्त हो जाएगा. पूर्व में ऐसी आवश्यकता पड़ने पर पटना चिड़ियाघर से शूटर मंगाया जाता था, परन्तु अब सरकार की अनुमति के बिना शूटर उपलब्ध नहीं कराया जाता है. उन्होंने कहा कि नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार ने शहर को आवारा पशुओं से मुक्त कराने के लिए मुहिम शुरू कर दी है. इसी के तहत 25 गायों को पकड़ा गया है. वहीं नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार ने बताया कि व्यवसायिक दृष्टिकोण से पशु पालने वालों को नगर परिषद से अनुमति लेना आवश्यक है.

जानलेवा बने पशु

सेवानिवृत दूरसंचार विभाग के अभियंता, रंगकर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता भवानीपुर मुहल्ला निवासी सच्चिदानंद श्रीवास्तव को सांढ़ ने इस कदर मारा कि उनकी मौत हो गई. वरिष्ठ पत्रकार कुमार सुरेन्द्र की भी यही कहानी है. श्रीकृष्ण नगर मुहल्ले में रहने वाले अहिरौलिया निवासी बलिराम सिंह के भाई को सांढ़ ने पटक दिया, जिससे उनकी मौत हो गई. छह माह पहले कामेश्वर सिंह ठेकेदार, जो अभी दिली में रहते हैं, उन्हें रेड क्रॉस के पास एक सांढ़ ने पटक दिया था. श्री सिंह तीन माह इलाज कराने के बाद स्वस्थ हुए हैं. विगत माह प्रो. राजेश रंजन को सांढ़ ने मारकर घायल कर दिया, जो अभी इलाज करा रहे हैं.

सांढ़ के आक्रमण से घायल हो चुके रामनाथ सिंह ठेकेदार अभी इलाजरत हैं. चांदमारी दुर्गा मंदिर के समीप कामेश्वर सिंह की पत्नी को आवारा पशु ने घायल कर दिया, इस घटना में उनका दाहिना हाथ और पैर टूट गया. तीन माह से वे इलाजरत हैं. चांदमारी में लाल बंगले के पास के दुकानदार आलोक और राजेन्द्र छात्रावास रोड के दीपू सिंह और उनके पड़ोसी भी सांढ़ के आतंक का शिकार हो चुके हैं. ये फेहरिस्त बहुत लम्बी है. पशुओं के अचानक हमला बोलने के कारण कई बाइक सवार दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं. मुहल्लों में झुंड में घूमने वाले कुत्तों और सूअरों से एक तरफ जहां गंदगी फैलती है, वहीं ये कई प्रकार की बीमारियों के भी संवाहक होते हैं.

इस बावत साईं हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि कुत्ते के काटने से रैबिज हो सकता है. वहीं, सूअर भी कई बीमारियों को फैलाता है. उन्होंने कहा कि ये सूअर इनफ्लूयेन्जा एच.एन, ऐन्थे्रक्स, ब्रुसेलोसिस, क्लोस्ट्रीडियम परफिन्जे टाइप वन, जैपनीज बी इन्सेफ्लाइटीस जैसी कई बीमारियां फैलाते हैं. इनका आवारा घूमना स्वास्थ्य के हिसाब से बहुत ही घातक है. इन स्ट्रीट किलर पशुओं के आतंक से परेशान लोगों ने कहा है कि अगर शहर को इससे मुक्ति नहीं मिलती, तो नगर परिषद को टैक्स देना बंद कर दिया जाएगा.

 

 

 

 

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