हडि्‌डयों और जोड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी आर्थ्राइटिस

जोड़ों में किसी भी कारण से आई सूजन जब जोड़ के विभिन्न हिस्सों जैसे कार्टिलेज सायनोवियम (जोड़ का थैला) या हड्‌डी को क्षतिग्रस्त करना शुरू कर देती है, तो यह स्थिति आर्थ्राइटिस कहलाती है. अगर समय रहते इसका समुचित इलाज किया जाए तो जोड़ खराब होने से बच सकते हैं, अन्यथा जोड़ प्रत्यारोपण तक की नौबत आ सकती है.


arthआर्थ्राइटिस यानि गठिया रोग व जो़ड़ों का दर्द वर्तमान की उन बीमारियों में शामिल है, जिनसे लोग आज सबसे ज्यादा तकलीफ में हैं. इसके कई प्रकार हैं, जैसे, रूमेटाइड आर्थ्राइटिस. इस बीमारी की चपेट में हडिड्‌यां और जोड़ आते हैं. हालांकि इस बीमारी के होने की निश्चित वजह के बारे में अभी तक नहीं पता चल पाया है, इसलिए मेडिकल साइंस की भाषा में इसे ऑटो-इम्यून डिजीज यानि स्व-प्रतिरक्षित बीमारी कहा जाता है.

सामान्यतया जोड़ों के दर्द यानि आर्थ्राइटिस में एक बीमारी न होकर कई तरह की परेशानियां शामिल होती हैं. इसके कारण सूजन, जोड़ों में तेज दर्द की शिकायत सबसे अधिक दिखती है. आमतौर पर आर्थ्राइटिस बढ़ती उम्र से संबंधित बीमारी है, लेकिन वर्तमान में अनियमित दिनचर्या और खानपान में पौष्टिक तत्वों की कमी के कारण यह युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है.

क्या है आर्थ्राइटिस

जोड़ों में किसी भी कारण से आई सूजन जब जोड़ के विभिन्न हिस्सों जैसे कार्टिलेज सायनोवियम (जोड़ का थैला) या हड्‌डी को क्षतिग्रस्त करना शुरू कर देती है, तो यह स्थिति आर्थ्राइटिस कहलाती है. अगर समय रहते इसका समुचित इलाज किया जाए तो जोड़ खराब होने से बच सकते हैं, अन्यथा जोड़ प्रत्यारोपण तक की नौबत आ सकती है.

आर्थ्राइटिस के लक्षण

शुरुआत में मरीज को बार-बार बुखार आता है, मांसपेशियों में दर्द रहता है, हमेशा थकान और टूटन महसूस होती है, भूख कम हो जाती है और वजन घटने लगता है. शरीर के तमाम जोड़ों में इतना दर्द होता है कि उन्हें हिलाने पर ही चीख निकल जाए, खासकर सुबह के समय. इसके अलावा शरीर गर्म हो जाता है, लाल चकत्ते पड़ जाते हैं और जलन की शिकायत भी होती है.

जोड़ों में जहां-जहां दर्द होता है, वहां सूजन आना भी इस बीमारी में आम है. जोड़ों के इर्द-गिर्द सख्त गोलाकार गांठें जैसी उभर आती हैं, जो हाथ पैर हिलाने पर चटकती भी हैं. शरीर के किसी भी अंग को हिलाने पर दर्द, जलन और सूजन की तकलीफ झेलनी पड़ती है.

महिलाओं में अधिक संभावना

इस बीमारी की चपेट में ज्यादातर महिलाएं क्यों आती हैं, इसे लेकर कई शोध और अध्ययन हो चुके हैं. हालांकि, अमूमन यह बीमारी महिलाओं में 40 से 60 के बीच में देखी जाती है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं को रूमेटाइड आर्थ्राइटिस होने की संभावना तीगुनी होती है. महिलाओं में यह बीमारी सेक्स हार्मोन के कारण अधिक होती है. प्रसव के बाद या फिर मेनोपॉज के बाद हार्मोन में बदलाव के कारण भी यह समस्या सामने आती है.

कुछ महिलाओं में अगर फाइब्रोमायल्जिया की शिकायत है, तो उनमें बाद में रूमेटाइड आर्थ्राइटिस की शिकायत देखी गई है. इसपर हुए शोध की मानें, तो जो महिला दो साल तक स्तनपान कराती हैं, उनमें इस बीमारी के होने की संभावना 50 फीसदी कम हो जाती है. इसके अलावा, हेल्दी लाइफस्टाइल और स्वस्थ खानपान के कारण भी इसकी संभावना में कमी देखी गई है.

खानपान का विशेष ध्यान

इस बीमारी में खानपान का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि कुछ आहार ऐसे भी हैं, जिनको खाने से गठिया का दर्द और भी बढ़ सकता है. आर्थ्राइटिस होने पर ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त आहार का सेवन नहीं करना चाहिए. मछली का सेवन करने से आर्थ्राइटिस का दर्द बढ़ सकता है. मछली में अधिक मात्रा में प्यूरिन पाया जाता है. प्यूरिन हमारे शरीर में ज्यादा यूरिक एसिड पैदा करता है. गठिया के मरीज को चीनी और मीठा खाने से परहेज करना चाहिए.

शुगर का अधिक सेवन करने से शरीर के कुछ प्रोटीन्स का ह्रास होता है. यह आपके गठिया के दर्द को बढ़ा सकता है. इसलिए गठिया होने पर शुगर और शुगरयुक्त आहार का सेवन करने से बचें. दुग्ध उत्पादों से बने खाद्य-पदार्थ भी आर्थ्राइटिस के दर्द को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि दुग्ध उत्पाद जैसे, पनीर, बटर आदि में कुछ ऐसे प्रोटीन होते हैं, जो जोड़ों के आसपास मौजूद ऊतकों को प्रभावित करते हैं, इसकी वजह से जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है.

टमाटर भी आर्थ्राइटिस के दर्द को बढ़ाता है. टमाटर में कुछ ऐसे रासायनिक घटक पाए जाते हैं, जो गठिया के दर्द को बढ़ाकर जोड़ों में सूजन पैदा कर सकते हैं. इसलिए टमाटर खाने से परहेज करें. आर्थ्राइटिस होने पर पोषणयुक्त आहार का सेवन करना चाहिए. नियमित लहसुन खाएं, खूब सारा पानी पिएं, बथुए का जूस पिएं, नियमित व्यायाम करें. यदि इसका दर्द असहनीय हो जाए, तो चिकित्सक से संपर्क करें.

क्या करें और क्या नहीं

यह बीमारी जितनी जल्द हो सके उतनी जल्दी इलाज मांगती है. समय से इलाज शुरू कर देंगे, तो तकलीफ ज्यादा नहीं बढ़ेगी. सेल्फ मेडिकेशन न करें. विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज के संबंध में जरूर जानकारी लें. गलत थैरेपी का चुनाव करने से आपको लेने के देने भी पड़ सकते हैं. फिजियोथैरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम का पालन अनुशासित ढंग से करें. इसमें विशेषज्ञ की गाइडेंस होनी बहुत जरूरी है. मोटापे से ग्रस्त हैं, तो वजन कम करें.

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