दबाव बनाने में कामयाब राजा भइया और शिवपाल

Shivpal Yadav and Raja Bhaiya pressure politics
राजनीतिक हस्तियां मतदाताओं से अधिक बड़ी पार्टियों को प्रभावित करने या उनपर दबाव बनाने में लगी हैं. सर्वाधिक लोकसभा सीटों वाला राज्य उत्तर प्रदेश इसका केंद्र बना हुआ है. समाजवादी पार्टी से अलग होकर प्रतिशील समाजवादी पार्टी बनाने वाले शिवपाल सिंह यादव यह दावा कर रहे हैं कि तीन दर्जन से अधिक छोटे दलों का जमावड़ा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के साथ है.

शिवपाल की रणनीति यह है कि अगर विपक्ष का महागठबंधन बनता है तो उसमें प्रसपा शामिल होकर अपना हिस्सा लेगा. ऐसा नहीं होने पर महागठबंधन बनाने के प्रयासों को ध्वस्त करने में पूरी ताकत लगाए. दूसरी तरफ अखिलेश यादव की सरकार में काबीना मंत्री रहे रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया भी जनसत्ता पार्टी बना कर मैदान में कूद पड़े हैं. राजा भइया भी यह दावा कर रहे हैं कि उनके साथ कई छोटे दल जुड़ रहे हैं.

यह भी पढ़ें: मुक्ति चाहते हैं अयोध्यावासी

राजा भइया के राजनीतिक जीवन की रजत-जयंती समारोह मनाने के बहाने जनसत्ता पार्टी ने राजधानी लखनऊ के रमाबाई मैदान में जिस तरह रैली आयोजित की, उसने राजनीतिक दलों पर राजा भइया के व्यक्तिगत प्रभाव को दलीय प्रभाव में बदलने का काम किया. ‘रजत जयंती’ के नाम पर रैली की व्यापक तैयारियों और समर्थन में जुटी अच्छी खासी भीड़ ने राजा भइया के दलीय कद पर मुहर लगाई. जनसत्ता पार्टी ने खास तौर पर प्रतापगढ़ पर विशेष ध्यान रखा था. राजा भइया प्रतापगढ़ जिले के ही कुंडा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक होते आए हैं.

प्रतापगढ़ के लोगों में लखनऊ पहुंचने को लेकर इतना उत्साह था कि प्रतापगढ़ से लखनऊ के लिए एक विशेष ट्रेन तक चलानी पड़ी. दलित एक्ट का बेजा इस्तेमाल रोकने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मोदी सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया देकर और एससी-एसटी एक्ट के जरिए सवर्णों का उत्पीड़न किए जाने के विरुद्ध आवाज उठा कर राजा भइया देशभर में चर्चित हुए. समाजवादी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहते हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट देकर भी राजा भइया सुर्खियों में रहे थे.

यह भी पढ़ें: जब यूपी के इस नेता ने फिल्मों के लिए खोल दिया था सरकारी खजाना

जिस तरह शिवपाल अखिलेश यादव के व्यवहार से नाराज समाजवादी पार्टी के नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उसी तरह राजा भइया भी सपा और बसपा दोनों से नाराज लोगों को अपने साथ लाने के प्रयास में लगे हैं. मायावती के स्थायी विद्वेषी रवैये के कारण राजा भइया बसपा को कमजोर होते देखना चाहते हैं. जनसत्ता पार्टी के अस्तित्व में आने के पीछे अखिलेश-मायावती गठबंधन भी एक बड़ा कारण रहा है. इसी वजह से राजा भइया ने राज्यसभा चुनाव में सपा-बसपा समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ भाजपा के पक्ष में वोट डाला था.

रैली को संबोधित करते हुए राजा भइया ने कहा कि चुनाव आयोग से उनकी पार्टी का नाम अभी फाइनल नहीं हुआ है, जनसत्ता दल, जनसत्ता पार्टी या जनसत्ता लोकतांत्रिक पार्टी में से कोई नाम मंजूर होगा, लेकिन जनता की मांग पर नई पार्टी के साथ राजनीति में पूरी ताकत से उतरने का लोक-निर्णय फाइनल है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मजदूर, किसान और जवान के लिए प्रतिबद्ध है. सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों के सम्मान के लिए राजा भइया की पार्टी समर्पित रहेगी और सेना या अर्धसैनिक बल के जवानों के सीमा पर शहीद होने पर एक करोड़ रुपए की सहायता राशि देगी.

यह भी पढ़ें: अयोध्या में विहिप का फ्लॉप-शो, शक्ति-प्रदर्शन में फेल हो गई भाजपा

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी भी नौ दिसम्बर को लखनऊ में विशाल रैली करने की तैयारी में है. प्रसपा प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने इस रैली को ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ रैली’ नाम दिया है. प्रसपा का दावा है कि रैली में इतनी भीड़ जुटेगी कि रमादेवी रैली स्थल भी छोटा पड़ जाएगा.

रैली के आयोजन में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन मुक्ति पार्टी की सक्रिय भूमिका है. अन्य कई छोटे दल रैली में शरीक होने वाले हैं. शिवपाल ने कहा कि रैली में चालीस संगठनों के नेताओं को आमंत्रित किया जा रहा है. शिवपाल का जोर है कि मुलायम सिंह यादव भी रैली में शामिल हों, लेकिन पुत्र-मोह से ग्रस्त मुलायम शिवपाल की पार्टी की रैली में शामिल होंगे, इसकी संभावना कम है.

Share Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *