जानिए उनके बारे में जिन्होंने 10 लाख करोड़ को एनपीए में बदल दिया

rbiहमारे देश में विलफुल डिफॉल्टर्स द्वारा हज़म की गई राशि अब 10 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार करने वाली है. अब सवाल यह उठता है कि आखिर ये कौन लोग हैं, जिन्होंने सरकारी बैंकों के लगभग 10 लाख करोड़ रुपए के ऋण को एनपीए में बदल दिया? दरअसल, यह 1990 के दशक से जारी नव उदारवादी आर्थिक व्यवस्था में विकास के नाम पर बैंकों द्वारा मनमाने ढंग से बांटे गए कर्ज का नतीजा है.

कुछ वर्ष पहले क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड (सिबिल) ने एक सूची जारी की थी, जिसमें कम से कम 25 लाख रुपए का कर्ज लेने वाले विलफुल डिफाल्टर्स के नाम शामिल थे. इस देश में कर्ज के नाम पर जनता के पैसों की लूट का गोरखधंधा फलफुल रहा है. पैसा होने के बावजूद, जानबूझ कर कम्पनियां अपना क़र्ज़ नहीं चुका रही हैं और कुछ कंपनियों ने क़र्ज़ लेने का शातिराना तरीका अपना रखा है.

सिबिल के आंकड़े बताते हैं कि कंपनियां अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग बैंकों की अलग-अलग शाखाओं से 100-200 करोड़ का लोन लेती हैं और धीरे-धीरे यह लोन हज़ारों करोड़ का हो जाता है. मिसाल के तौर पर, पथेजा ब्रदर्स नाम की एक कम्पनी है. सिबिल वेबसाइट पर इसके नाम से कर्ज़ की क़रीब 200 डिटेल हैं. इस कम्पनी ने अलग-अलग तारीख को मुम्बई और पुणे के दो बैंकों से सैकड़ों करोड़ रुपए का लोन लिया है. इसके अलावा, इस कम्पनी ने और भी कई बैंकों के ब्रांच (अधिकतर महाराष्ट्र्र) से कर्ज़ लिए हैं.

 

 

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