सबरीमाला मंदिर के दर्शन किए बिना ही, तृप्ति देसाई को कोच्ची एयरपोर्ट से लौटना पड़ा….

मुख्य बातें….

  1. तृप्ति देसाई बिना दर्शन के लौटी.
  2. कहा, फिर आउंगी.
  3. श्रद्धालुओं का विरोध चरम पर था.

अत्ती आत्मविश्वास को अपने साथ समेटकर लाई, सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई को केरल से छुछे हाथ ही लौटना पड़ा. बता दें कि शुक्रवार को भगवान अयप्पा के दर्शन करने पहुंची तृप्ति देसाई को मंदिर में दर्शन करने के लिए अयप्पा के श्रद्धालुओं ने जाने की अनुमति नहीं दी.

शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई अपने कुछ सहकर्मियों के साथ भगवान अयप्पा के दर्शन के बाबत कोच्ची एयरपोर्ट पहुंची थीं. हालांकि, उनके एयरपोर्ट पहुंचने पर भाजपा के नेता ने उन्हें पहले ही बता दिया कि उन्हें किसी भी प्रकार की सरकार वाहन मुहैया नहीं कराई जाएगी. उन्हें एयरपोर्ट से लेकर मंदिर जाने तक के लिए खुद ही वाहन का इंतजाम करना पड़ेगा.

मगर, वहां जाते ही समीकरण में तब्दीलयत आ गई. उनके जाते ही भगवान अयप्पा के श्रद्धालु काफी उग्र हो गए. उनका विरोध प्रदर्शन चरम सीमा पर पहुंच चुका था. हालांकि, मामले की नाजकता को भांपते हुए राज्य सरकार ने पहले से सुरक्षा के कड़े इंतजामात कर रखे थें, ताकि किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना होते ही उस पर काबू पाया जा सकें.

मगर, अफसोस ये सारे पुलिसकर्मी भी तृप्ति देसाई की मदद करने में विफल रहे. बाद में श्रद्धालुओं का विरोध फलक पर जाते देख, पुलिसकर्मियों ने तृप्ति देसाई से विनम्र निवेदन किया कि वे वापस चली जाएं, क्योंकि यहां उनके दर्शन की कोई संभावना बनती नहीं दिख रही है.

बता दें कि जब सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने मंदिर जाने की घोषणा की थी, तभी भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं ने उन्हें चेता दिया था कि वे उनका विरोध करेंगे, लेकिन विरोध करने की विधी अलग रहेगी. वे हिंसा की जगह, अंहिसा का पालन करेंगे. वे उनके आगे हाथ जोड़ेंगे, उनके आगे लेट जाएंगे.

हालांकि, शुक्रवार को भी भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं ने बयान जारी कर कहा था कि अगर वे अयप्पा के दर्शन हेतु मंदिर जाती हैं तो उन्हें हमारे सीने पर पैर रखकर जाना होगा.

गौरतलब है गत 27 सितबंर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में मंदिर की पंरपराओं को खारिज करते हुए कहा था कि अब से मंदिर में सभी उम्र कि महिलाएं प्रवेश कर सकती है. हालांकि, कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में काफी उग्र प्रदर्शन भी देखने को मिला था.

इतना ही नहीं, इस मुद्दे को लेकर सियासी दलों के नुमाइंदे भी पीछे नहीं रहे है. समय-समय पर अनेकों सियासी दलों के नेताओं ने अपना बयान जारी किया है. इस कड़ी में केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा था कि क्या आप खून से सने पेड पहनकर अपने दोस्त के घर जाना पसंद करेंगे. तो फिर ऐसे में आप भगवान के दर्शन करने कैसे जा सकती हैं.

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