Alert: खतरनाक हो सकती है हडि्डयों से जुड़ी ये समस्या

वो कहा जाता है ना कि पोषटिक आहार ही शरीर को मजबूत बनाता है लेकिन आज के माहौल में लोग जिस तरह से मिलावटी और जंक फूड्स खाना खाने को मजबूर है। उससे तो वह कई बिमारियों की चपेट में लगातार आ रहे हैं। जिसमें हमारे शरीर की हड्डियों को भी नुकसान पहुंचता है। इन्ही बिमारियों में ऑस्टियोपोरोसिस एक तरह का ‘चुप्पा रोग’ है, जिसकी वजह से कमज़ोर होती हडि्डयों के बारे में तब तक पता नहीं चलता, जब तक कि साधारण चोट से कोई हड्‌डी टूट न जाए। ये समस्या काफी सीरियस होती है, क्योंकि इसमें हडि्डयां भुरभुरी और कमजोर हो चुकी होती हैं। इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानकर इसकी रोकथाम पॉसिबल है।

क्या है ऑस्टियोपोरोसिस-  यह 55 की उम्र तक या अधिक उम्र में होने वाली समस्या है। दरअसल, हडि्डयों में उम्र बढ़ने के साथ-साथ डेवलपमेंट होता रहता है। पुरानी बोन्स सेल्स खत्म होती जाते हैं और उनकी जगह नए सेल्स बनते हैं। इस तरह हर 10 साल में हमारा ढांचा पूरा नया हो जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस होने पर हडि्डयों को धीरे-धीरे घिसती रहती हैं और नए सेल्स के बनने का प्रोसेस बहुत ही धीमा होता है। वैसे ये महिलाओं में ज्यादा होता है, क्योंकि मेनेपॉज के बाद उनके शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्राव असंतुलित हो जाता है, जो हडि्डयों को कमजोर करता है।

इन संकेतों पर ध्यान दें –  ऑस्टियोपोरोसिस में अक्सर हडि्डयों में दर्द या अकड़न की शिकायत बनी रहती है, शरीर झुकने लगता है और लम्बाई भी कुछ सेंटीमीटर तक कम हो जाती है। अगर ऐसे लक्षण नज़र आएं, तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें। इसका पता चलने पर बोन मिनरल डेंसिटी की जांच करवाई जाती है। यह दो प्रकार से होती है- एड़ी की स्क्रीनिंग और डेक्सा मशीन से स्कैनिंग। आमतौर पर जांच का दूसरा तरीक़ा ज्यादा सही माना जाता है।

डाइट से दूर करें प्रॉब्लम – ऑस्टियोपोरोसिस में वैसे तो खानपान सम्बंधी कोई परहेज नहीं होता, लेकिन बैलेंस डाइट का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि इसकी एक वजह हडि्डयों के लिए जरूरी न्यूट्रिशन की कमी भी है।

  • दूध या दूध से बनी चीजों जैसे- दही, पनीर या छाछ को डाइट में जरूर शामिल करें, क्योंकि ये कैल्शियम के सबसे अच्छे स्रोत होते हैं। पीड़ित को रोजाना 800 से 1,200 मि.ग्रा. कैल्शियम लेना ही चाहिए।
  • अंडे, राजमा, रागी के आटे की रोटी या बिस्कुट और सभी प्रकार की हरी सब्जियां भोजन में शामिल करनी चाहिए।
  • विटामिन डी के बिना शरीर कैल्शियम को ठीक से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता है, इसलिए सुबह की गुनगुनी धूप कम से कम 15 मिनट जरूर लें। मशरूम, दूध और अंडे के पीले भाग में भी यह विटामिन थोड़ी मात्रा में मौजूद होता है।

ये भी हो सकती हैं वजहें –  अनहेल्दी लाइफस्टाइल, खाने में कैल्शियम और विटामिन डी जैसे न्यूट्रिशन्स की कमी, थायरॉइड अनियमितता/डायबिटीज़ जैसे रोग या स्टेरॉइड मिली दवाओं के इस्तेमाल से भी ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हो सकती ह। हमारे शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस हडि्डयों में जमा होते हैं। कैल्शियम की जरूरत हार्ट, मसल्स और नर्व्स को भी होती है, जो इन्हें ब्लड के जरिए मिलता है। जब खानपान में कैल्शियम की कमी होती है, तो ब्लड में भी कैल्शियम कम हो जाता है। ऐसे में अंगों के लिए जरूरी कैल्शियम हडि्डयों से लिया जाता है और वे कमज़ोर होती जाती हैं।

रोकथाम के लिए ज़रूरी है – पहले ही स्टोज में इसका पता चल जाने पर कैल्शियम और विटामिन डी जैसे जरूरी सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही व्यक्ति का फिजिकली एक्टिव रहना भी जरूरी होता है। अगर वह पहले से ही हार्ट और डाइबिटीज का मरीज है, तो सिचुएशन के मुताबिक सैर या हल्की वर्जिश की दिनचर्या तय की जाती है। यह सबकुछ एक्सपर्ट्स की देखरेख में होता है।

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