कश्मीर ही नहीं, यहां भी उच्च शिक्षित युवा शामिल हो रहे हैं आतंकी संगठन में

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30 नवंबर को एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने फेसबुक पर एक वीडियो क्लिप साझा किया था. इससे पुष्टि हुई कि वह विद्रोही संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम,  इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) में शामिल हो गया है. वीडियो में वह युवा कहता है कि उसने अपने समुदाय के लिए ये कदम उठाया है. उस युवा का फेसबुक प्रोफाइल नाम है, चो अभिजीत गोगोई. वीडियो कैप्शन में लिखा है कि कुत्ते भी रहते हैं, लेकिन मैं कुत्ते की तरह नहीं रहना चाहता हूं. मेरा असली नाम कनक चंद्र गोगोई है.

असमिया भाषा वाले इस क्लिप में उसने बताया है कि उसका नाम अभिजीत गोगोई है. वह मोरान, डिब्रूगड़ का रहनेवाला है. उसने चेन्नई के एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से सूचना प्रौद्योगिकी से डिग्री ली है. वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में हिताश्री नाम की एक कंपनी के साथ जुड़ा हुआ था. उसने बेंगलुरू से एमबीए की डिग्री भी ली थी और बेंगलुरु, सिंगापुर, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया में काम भी किया था.

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वीडियो में वह बंदूक के साथ युद्ध के लिए तैयार दिख रहा है. वीडियो में वह कहता है “मैंने क्रांति, क्रांतिकारी लड़ाई में शामिल होने के लिए सब कुछ छोड़ा­. मुझे एक्सोमिया जाति और इसकी पहचान के लिए लड़ाई में शामिल होना पड़ा. ऐसे कई संगठन हैं, जिनके एकमात्र उद्देश्य आने वाले दिनों में राजनीतिक नेता बनना है. हम किस पर भरोसा करते? एक दिन हम गायब हो जाएंगे.”

ULFA-Join

पुलिस का कहना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक आने के बाद से उल्फा-आई में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या काफी हद तक बढ़ गई है. उल्‍लेखनीय है कि कुछ दिन पहले उल्फा प्रमुख मुख्या परेश बरुआ के भतीजे मुन्ना बरुआ भी उल्फा-आई में शामिल हो गया है. 24 वर्षीय मुन्ना, डिगबोई में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में काम कर रहा था. वह इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है. इसके अलावा, अन्य कई उच्च शिक्षित युवाओं ने हाल के दिनों में उल्फा-आई ज्वायन किया है.

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