सिर्फ एक टेस्‍ट से सभी तरह के कैंसर का पता लगाएं

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दुनियाभर में तेजी से फैल रही बीमारियों में से कैंसर भी एक बीमारी है. यह बीमारी कई तरह का होता है. ऐसे में ऑस्‍ट्रेलिया के क्‍वीन्‍सलैंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी क्रांतिकारी खोज की है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसा टेस्‍ट विकसित किया है जिसके जरिए सिर्फ 10 मिनट के टेस्‍ट से ही हर तरह के कैंसर का पता लग जाएगा. इस टेस्‍ट में मरीज के खून का सैंपल लिया जाता है और‍ फिर मौलिक्‍यूल्‍स के पैटर्न की जांच की जाती है जिसे मेथाइल ग्रुप कहते हैं. यह वह मॉलिक्‍यूल है जिससे एनडीए बना होता है.

नेचर कम्‍यूनिकेशन्‍स नाम की पत्रिका में प्रकाशित इस रिसर्च के मुताबिक यह टेस्‍ट क्‍वीन्‍सलैंड टीम द्वारा की गई एक खोज पर निर्भर करता है जिसमें कैंसर डीएनए में मौजद मॉलिक्‍यूल्‍स जिन्‍हें मेथाइल ग्रुप कहते हैं. वे नॉर्मल डीएनए की तुलना में अलग तरह से व्‍यवहार करते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ क्‍वीन्‍सलैंड के अनुसंधानकर्ताओं ने जब मेथाइलस्‍केप की जांच की तो पाया कि यह हर तरह के ब्रेस्‍ट कैंसर में मौजूद था. साथ ही प्रॉस्‍टेट कैंसर, बॉवेल यानी पेट का कैंसर और लिम्‍फोमा कैंसर के लिए भी यही साबित हुआ.

इस टेस्‍ट में रंग बदलने वाले फ्लूइड का इस्‍तेमाल किया जाता है जिसके जरिए खून में मौजूद घातक सेल्‍स की मौजूदगी का पता लगता है. वैसे तो यह टेस्‍ट फिलहाल एक्‍सपेरिमेंट के स्‍टेज में है लेकिन अलग अलग तरह के कैंसर के 200 सैंपल की जांच के दौरान यह टेस्‍ट 90 प्रतिशत ऐक्‍यूरेट साबित हुआ है. यह टेस्‍ट को क्लिनिकल ट्रायल के जरिए आगे और प्रमाणित करने की जरूरत है.

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डॉक्‍टर ने बताया कि जब इस टेस्‍ट का ह़यूमन ट्रायल हो जाएगा और इसकी पुष्टि हो जाएगी तो यह टेस्‍ट कैंसर रोग की जल्‍द से जल्‍द पहचान करने और फिर उसके ट्रीटमेंट में क्रांतिकारी कदम साबित होगा. फिलहाल कैंसर का पता लगाने के लिए सिर्फ एक कन्‍फर्मेटिव टेस्‍ट है और यह सस्‍पेक्‍टेड की बायॉप्‍सी. यह टेस्‍ट इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज अपने शरीर में किसी तरह का लक्षण या गांठ देखे जिसे डॉक्‍टर को दिखाने के बाद डॉक्‍टर उसे कैंसर के संकेत मानकर टेस्‍ट करवाने को कहें.

डॉक्‍टरों का कहना है कि फिलहाल बायॉप्‍सी की रिपोर्ट आने में एक से दो सप्‍ताह का वक्‍त लगता है और डायग्‍नोसिस होने में देर की वजह से भारत में कैंसर का इलाज करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. कैंसर के ज्‍यादातर मामलों में सर्वाइकल रेट सिर्फ 20 प्रतिशत है क्‍योंकि ज्‍यादात मरीज उस वक्‍त डॉक्‍टर के पास पहुंचते हैं जब उनका कैंसर अडवांस स्‍टेज में यानी तीसरे या चौथे स्‍टेज में पहुंच चुका होता है. इस स्थिति में अगर कैंसर का पता शुरुआत में ही चल जाए तो लगभग 80 प्रतिशत मरीजों को बचाया जा सकता है.

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