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तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद फलता-फूलता एलओसी व्यपार

LOC-Trade
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इस वर्ष भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर के बीच होने वाला एलओसी व्यापार लाभप्रद साबित हुआ है.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस साल 21 दिसम्बर तक एलओसी के दोनों तरफ 104 करोड़ 37 लाख और 12 हज़ार रूपये का व्यापार हुआ है. गौर तलब बात यह है कि यह व्यापार बार्टर प्रणाली यानी माल के बदले माल के सिद्धांत पर हो रहा है. और शायद यह दुनिया का एक मात्र इलाका है जहां आज भी इस प्रणाली पर व्यापार रहो रहा है.

जम्मू कश्मीर और पाकिस्तानी नियंत्रित कश्मीर के बीच यह व्यापार वर्ष 2008 में भारत और पाकिस्तान की सहमती के बाद शुरू हुआ था. इस व्यापार का मकसद दोनों क्षेत्रों में लोगों के बीच मेल-मिलाप बढ़ना था. सरकारी सूत्रों का कहना है कि पिछले दस वर्षों में एलओसी के दोनों तरफ 6 हज़ार 700 करोड़ रूपये का व्यापार हुआ है.

ख्याल रहे कि जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर के बीच यह व्यापार दो क्रासिंग पॉइंट्स, घाटी में इस्लामाबाद-चकोठी और जम्मू में पूंछ-रावलकोट, के रास्ते हो रहा है. प्राचीन काल से ही इस इलाके के लोग इन दोनों रास्तों से अपना माल अविभाजित भारत से मध्यपूर्व एशिया के बाज़ारों तक पहुंचाते थे.

आज़ादी के बाद 60 साल तक ये तारीखी रास्ते बंद रहे. अक्टूबर 2008 में इन्हें दोबारा खोला गया. उस समय इसे भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली का बड़ा क़दम करार दिया गया था. उस समय सरहद पार व्यापार के लिए 21 चीज़ों को मंज़ूरी दी गई थी, जिनमें भारत की तरफ से कालीन, वाल हैंगिंग, पेपरमसी, शाल, लकड़ी से बनी चीज़ें, दालें, ज़ाफ़रान, आदि पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर भेजी जाती हैं, जबकि एलओसी के उस तरफ से चावल, लहसन, प्याज, मसाले, ड्राई फ्रूट्स और पेश्वरी चप्पलें इधर आती हैं.

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