अगस्ता-वेस्टलैंड मामला: क्रिश्चियन मिशेल ला सकता है बड़ा मोड़, पूछताछ जारी

अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकोप्टर सौदे में एक बड़ा मोड़ उस समय आया जब दुबई की एक अदालत ने सौदे में शामिल बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल के भारत प्रत्यर्पण को अपनी स्वीकृत दे दी. मिशेल को कल शाम ही भारत लाया गया है और फिलहाल सीबीआइ उससे पूछताछ कर रही है.

ध्यान रहे कि परवर्तन निदेशालय और सीबीआई 3600 करोड़ रुपए के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में हुए कथित घोटाले की जांच कर रही हैं. इस मामले में मिशेल के अलावा दो और बिचौलिये गुइदो हासकी और कार्लो जेरोसा की भी इन एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं.

मिशेल के भारत प्रत्यर्पण के बाद के दिल्ली के सियासी हलकों में यह अटकलें तेज़ हो गई हैं कि मिशेल की जांच से गांधी परिवार मुसीबत में आ सकता है. साथ है यह भी अनदाज़ा लगाया जा रहा है कि पूछताछ में वह उन नेताओं और नौकरशाहों के नाम भी उगल सकता है, जिन्हें वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में कथित रूप से धांधली की थी.

मिशेल को आज दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष पेश किया गया.

ऐसी जानकारी है कि मिशेल हेल्कोप्टर सौदे में कुछ लोगों घूस दी थी जिनके नाम उसने कोड वर्ड में लिखे थे. ज़ाहिर है यह उन कोड वर्ड्स का खुलासा कर सकता है.

दरअसल, मिशेल को फ़रवरी 2017 में यूएई की पुलिस ने गिरफ्तार किया था और इसके बाद से ही उसके प्रत्यर्पण की कोशिशें चल रही थीं. इस कोशिश में भारतीय एजेंसियों सीबीआई एवं प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारीयों ने यूएई का कई यू ए ई का दौरा किया. इस दौरान एजेंसियों ने यूएई के अधिकारियों एवं न्यायालय के साथ घोटाले से जुड़े आरोपपत्र, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य एवं दस्तावेज पेश किए थे.

ईडी के मुताबिक 12 हेलिकॉप्टरस की खरीदारी के समझौते को अपने पक्ष में कराने के लिए मिशेल को 225 करोड़ दिये गए थे. आरोप है कि यूपीए सरकार के दौरान 2010 में हुए इस डील का करार पाने के लिए एंग्लो-इटैलियन कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड ने भारतीय राजनेताओं, रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों,  नौकरशाहों समेत वायुसेना के दूसरे अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए मिशेल को करीब 350 करोड़ रुपए दिए. इस सौदे में रिश्वतखोरी की बात उजागर हो जाने के बाद 2013 में तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटोनी ने न केवल सौदा रद्द कर दिया था बल्कि सीबीआई जांच के आदेश भी दिए थे.

जानकारी के मुताबिक मिशेल को भारत लाने के लिए चलाये जा रहे ऑपरेशन का कोड ‘यूनिकॉर्न’ था, जिसका संचालन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की देख रेख में सीबीआई के निदेशक एम नागेश्वर राव कर रहे थे.

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