भाजपा को झटका, सावित्री बाई फुले ने की पार्टी छोड़ने की घोषणा

अपने विवादास्पद बयानों के कारण चर्चा में रहने वाली बीजेपी की दलित संसद सावित्री बाई फुले ने आज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया. उन्होंने अपने नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि “देश का पैसा देश के विकास पर इस्तेमाल होने के बजाय मूर्तियों के निर्माण पर खर्च किया जा रहा है.”

सावित्री बाई फुले अपनी पार्टी से नाराज़ चल रही थीं. उन्होंने पिछले कई महीनों से विद्रोही तेवर अपना रखा था. फिलहाल यह माना जा रहा है कि भजपा से दामन छुड़ाने के बाद अब वे बसपा के शरण में जायेंगी.

संसद में बहराइच का प्रतिनिधित्व करने वाले सावित्री बाई फुले ने अपने फैसले की घोषणा करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी समाज को बाटने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि “मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूं. मैंने दलितों के लिए काम किया हूं. बीजेपी दलित आरक्षण के लिए कुछ भी नहीं कर रही है.”

कुछ दिनों पहले ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस टिप्पणी पर कि “हनुमान जी दलित थे” के जवाब में एक विवादस्पद बयाना दिया था. उन्होंने कहा था कि “हनुमान जी दलित थे और मनुवादियों के गुलाम थे. अगर लोग कहते हैं कि भगवान राम हैं और उनका बेड़ा पार कराने का काम हनुमान जी ने किया था. उनमें अगर शक्ति थी तो जिन लोगों ने उनका बेड़ा पार कराने का काम किया, उन्हें बंदर क्यों बना दिया? उनको तो इंसान बनाना चाहिये था लेकिन इंसान ना बनाकर उन्हें बंदर बना दिया गया. उनको पूंछ लगा दी गई, उनके मुंह पर कालिख पोत दी गयी. चूंकि वह दलित थे इसलिये उस समय भी उनका अपमान किया गया.”

इस वर्ष की शुरुआत से ही सावित्री बाई फुले अपने पार्टी नेतृत्व पर सार्वजनिक रूप से दलितों से भेदभाव का आरोप लगाने लगी थीं . वह भाजपा के ‘डिनर-विद-दलित’ आउटरीच कार्यक्रम की खुली आलोचक थीं.

यही नहीं उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना को महापुरुष बताकर और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान की बात कह कर अपनी पार्टी को असहज कर दिया था.

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