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खाशोज्जी हत्या मामला: नहीं कम हो रही हैं सऊदी क्राउन प्रिंस की मुसीबतें

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सऊदी अरब ने अमरीकी सीनेट के उस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के लिए सीधे तौर पर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ज़िम्मेदार ठहराया गया है. किंगडम की तरफ से यह भी कहा गया है कि इस तरह का प्रस्ताव उसके अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप है.
ध्यान रहे की सऊदी एजेंटों ने टर्की की राजधानी इस्तांबुल स्थिति अपने वाणिज्य दूतावास में ख़ाशोज्जी की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे. उसके बाद से यह मामला लगातार सुर्ख़ियों में है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सऊदी क्राउन प्रिंस की क्रिकरी का कारण बना हुआ है.
बहरहाल, अमेरिका सीनेट के प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया में स्वरुप सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि सीनेट का प्रस्ताव झूठे आरोपों पर आधारित है और सऊदी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की कोशिश है. दरअसल, ख़ाशोज्जी की हत्या के बाद सऊदी शाही परिवार और अमेरिकी सीनेट के रिश्तों में आई खटास का यह ताज़ा उदहारण है.
गुरुवार को अमरीकी सीनेट ने एक अलग प्रस्ताव में यमन में चल रहे युद्ध में सऊदी अरब को दी जा रही अमरीकी सहयता ख़त्म करने के पक्ष में मतदान किया था.


इस प्रस्ताव को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह वो न केवल खाशोज्जी मामले में सऊदी शाही परिवार के बचाव में दिखे हैं बल्कि यमन में चल रही युद्ध में भी वे खुल कर सऊदी अरब की हिमायत में खड़े नज़र आये हैं. अपेक्षा के अनुरूप ट्रंप प्रशासन इन दोनों ही प्रस्तावों की मुखालिफत कर रहा था.  राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही यह साफ़ कर दिया था कि वो इन प्रस्तावों को वीटो कर देंगे.

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