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जानिए कौन हैं doodle द्वारा समर्पित बाबा आमटे

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बाबा आमटे का जन्म 26 दिसंबर, 1914 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले के हिंगनघाट में हुआ था. उनके पिता का नाम देवीदास और माता का नाम लक्ष्मीबाई आमटे था. उनके पिता ब्रिटिश भारत के प्रशासन में शक्तिशाली नौकरशाह थे और वर्धा जिले के धनी जमींदार थे.

आज गूगल ने कुष्ठ रोगियों के मसीहा बाबा आमटे को अपना डूडल समर्पित किया है. बाबा आमटे का पूरा नाम मुरलीधर देवीदास आमटे था. वैसे कुष्ठ रोगियों के सशक्तीकरण में उनका योगदान काफी उल्लेखनीय है लेकिन वे सामाजिक कार्यकर्ता के साथ-साथ महान स्वतंत्रता सेनानी भी थी. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण आंदोलन में भी अहम भूमिका निभाई. धनी परिवार में जन्मे बाबा आमटे ने अपना जीवन समाज के दबे-कुचले तबकों को समर्पित कर दिया.

वह महात्मा गांधी की बातों और उनके दर्शन से काफी प्रभावित हुए और वकालत के अपने सफल करियर को छोड़कर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए. बाबा आमटे ने अपना जीवन इंसानियत की सेवा में समर्पित कर दिया. बाबा आम्टे ने कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों की सेवा के लिए आनंदवन नाम के संगठन की स्थापना की. वह पर्यावरण संरक्षण आंदोलन जैसे नर्मदा बचाव आंदोलन से भी जुड़े हुए थे. बाबा आम्टे को उनके कल्याणकारी कार्यों के लिए कई अवॉर्ड मिले जिनमें रमन मगसायसाय अवॉर्ड भी शामिल था जो उनको 1985 में दिया गया.

बाबा आमटे को अपने इन कामों के लिए 1971 में पद्मा श्री अवॉर्ड (Padma Shri) से नवाज़ा गया. इसके साथ ही, कुष्ठरोगियों को जीवन समर्पित करने वाले बाबा आमटे को 1985 का रैमन मैगसेसे पुरस्कार दिया गया. इसके पहले उन्हें राजाजी रत्न पुरस्कार, राष्ट्र भूषण पुरस्कार, बजाज पुरस्कार, डेमियल डुट्टोन पुरस्कार वगैरह मिल चुके हैं.

2007 में बाबा आमटे को ल्युकीमिया हो गया. एक साल से ज्यादा समय तक बीमार रहने के बाद 9 फरवरी, 2008 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. उनके निधन पर पूरा देश शोक में डूब गया. दुनिया भर से उनके निधन पर सांत्वना संदेशा का तांता लग गया. बाबा आमटे के शव को दफनाया गया.

 

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