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सिद्धू के लिए नुकसान देह हो गया तेज बोलना, डॉक्‍टरों ने दी आराम की सलाह

siddhu vokal card
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पंजाब के कैबिनेट मेंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की आवाज लगातार तेज बोलने की वजह से अपना आवाज खोने की कगार पर पहुंच गए हैं. सिद्धू ने पिछले 17 दिन में लगातार 70 रैलियां में भाषण देने की वजह से उनके वोकल कॉर्ड को नुकसान हुआ है. डॉक्‍टर ने बताया कि सिद्धू को लिरिंगजाइटिस (अर्थात वोकल कार्ड का नुकसान होना) नामक बीमारी हुई है. डॉक्‍टर ने उन्‍हें कुछ दिन आराम करने की सलाह दी है.

यह बीमारी लगातार चिल्‍लाने से और तेज आवाज में चिल्‍लाकर बोलने से आवाज बदलने लगती है. जिससे वोकल कॉर्ड में रक्‍तस्राव और सूजन की वजह से आवाज जाने का डर रहता है. नवजोत सिद्धू अपने शेरों शायरी के अंदाज और जोशीले भाषणों की वजह से हमेशा चर्चा में रहते हैं. किस वजह से वोकल कार्ड को नुकसान पहुंचता है और कैसे आवाज जाने की समस्‍या से बचा जा सकता है.

डॉक्‍टरों ने कहा कि लेरिन्‍जाइटिस बीमारी तब होता है जब शरीर पूरे उत्‍साह से भरा हो और दिमाग लगातार तेज बोलने के लिए प्रेशर कर रहा हो लेकिन गला आपका साथ न दे तो इसे लेरिन्‍जाइटिस की बीमारी कहते हैं. लगातार बोलने और चिल्‍लाने के वजह से वोकल कॉर्ड में सूजन आ जाती है या संक्रमण को जाता है. इस स्थिति को लेरिन्‍जाइटिस कहते हैं. अक्‍सर तेज चिल्‍लाने से वोकल कॉर्ड में रक्‍तस्राव होने लगती है. ब्‍लीडिंग होने पर वोकल कॉर्ड में गांठ या मांस का थक्‍का बन जाता है, जिसकी वजह से आवाज बदलने लगती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि आवाज के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ और मिमिक्री करने से भी वोकल कॉर्ड को नुकसान होता है.

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यदि मिमिक्री को दिनचर्या में शामिल करते हैं तो वोकल नॉड्यूल बनने की संभावना अधिक रहती है. बोलने के तार में गांठ या मांस का थक्‍का बनने लगता है जिसकी वजह से आवाज अपने वास्‍तविक प्राइज़ से बदलकर और भी पतली हो जाती है. अक्‍सर देखा गया है कि किसी दुर्घटना के शिकार व्‍‍यक्ति की आवाज चली जाती है इस स्थिति को वोकल कॉर्ड ट्रॉमा के नाम से जाना जाता है. इसे एरिटानायड डिस्‍लोकेशन कहा जाता है. अर्थात वोकल कॉर्ड और स्‍वर तंत्रिका के आसपास की कोशिकाओं पर बुरा असर पड़ता है.

गले के इंफेक्‍शन होने पर चिल्‍लाना नहीं चाहिए, टीवी, चेस्‍ट इंफेक्‍शन, फंगल इंफेक्‍शन और वोकल कॉर्ड (सुर के तार) में टयूमर होने पर डॉक्‍टर से सलाह जरूर लेना चाहिए. क्‍योंकि इस स्थिति में तेज चिल्‍लाने से बचना चाहिए नहीं तो ब्‍लीडिंग होने पर परेशानी हमेशा के लिए बढ़ जाएगी. यदि गले में बार बार खराश होता है तो तुरंत डॉक्‍टर से सलाह लेना चाहिए.

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जिन लोगों को वोकल कॉर्ड की समस्‍या है उन्‍हें भीड़भाड़ वाली जगहों पर बात करने से बचना चाहिए. अक्‍सर देखा जाता है कि बहुत अधिक शोर शराबे वाली जगह पर लोग तेज बोलने लगते हैं जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए. तेज बोलने की वजह से वोकल कॉर्ड बहुत तेजी से काम करता है और सही समय पर वोकल कॉर्ड तक ऑक्‍सीजन नहीं पहुंचने पर नुकसान होता है. इसलिए धीरे धीरे और आराम से बात करना चाहिए. बात करते समय जबड़े को ज्‍यादा आगे पीछे नहीं खींचना चाहिए क्‍योंकि इससे व्‍यक्ति अपनी वास्‍तविक आवाज को खो सकता है और बनावटी आवाज में बोलने को मजबूर होना पड़ता है.

अगर किसी कारण से वोकल कार्ड को नुकसान पहुंचता है या आपको बोलने में दिक्‍कत आती है तो ऐसे व्‍यक्ति को स्‍पीच थेरेपी के द्वारा आवाज वापस आ सकती है. इस बीमारी से ग्रस्‍त व्‍यक्ति को अपना वास्‍तविक आवाज वापस लाने के लिए छह महीने तक स्‍पीच थेरेपी लेना चाहिए.

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