दुख्तरान-ए-मिल्लत प्रमुख आसिया अंद्राबी के ख़िलाफ़ अदालत में चार्जशीट दाख़िल

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कश्मीरी महिला संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी और उसकी दो साथियों के खिलाफ अपनी चार्जशीट अदालत में पेश कर दी है. अदालत ने इस चार्जशीट को सुनवाई के लिया है, जिसके बाद इन तीनों आरोपियों की रिहाई की उम्मीद फिलहाल समाप्त हो गई है. एनआईए ने इन तीनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

गौर तलब है कि अलगावादी नेताओं और सिविल सोसाइटी की ओर से इन महिलाओं की रिहाई की मांग काफी समय से चल रही थी. आसिया अंद्राबी काफी समय से बीमार है. इसी बुनियाद पर पिछले साल हाई कोर्ट ने उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया था.

एनआईए ने आसिया और उसकी दो साथियों सूफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन पर देश के खिलाफ जंग छेड़ने जैसे संगीन आरोप के तहत मुकदमा दर्ज कराया है. श्रीनगर से संबंध रखने वाली इन तीनों महिलाओं को पुलिस ने इस साल अप्रैल में गिरफ्तार किया था. बाद में  इस मामले को एनआईए को सौंप दिया गया था. पूछताछ के लिए एनआईए इन्हें हवाई जहाज़ के जरिया दिल्ली ले आई थी.

यह पहला मौक़ा है जब किसी जांच एजेंसी ने किसी गिरफ्तार कश्मीरी महिला या महिलाओं को तफ्तीश के लिए दिल्ली लाया हो. कई महीने की जांच के बाद बाद आखिरकार एनआईए ने कल इन तीनों के खिलाफ दिल्ली की एक विशेष अदालत में अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी.

सूत्रों के मुताबिक इस चार्जशीट में आसिया और उनकी साथियों पर मिलिटेंटों के लिए फण्ड जमा करने, द्वेषपूर्ण भाषण देने, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए भारत विरोधी दुष्प्रचार करने जैसे गंभीर आरोप लगाये हैं. चार्जशीट में आसिया को भारत द्वारा वांछित पाकिस्तानी दहशतगर्द हाफिज सईद के सम्पर्क में रहने का आरोप भी लगाया गया है.

विशेष अदालत की जज पूनम बाम्बा ने एनआईए की चार्जशीट को सुनवाई के लिए मंज़ूर करते हुए इन तीनों महिलाओं को आदलती हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है. गौर तलब है कि दुख्तरान-ए-मिल्लत जम्मू-कश्मीर का एक ऐसा संगठन है जिसपर सरकार ने प्रतिबन्ध लगा रखा है. आसिया अंद्राबी इस संगठन की संस्थापक है. उसका पति कासिम फक्तु पर भी भारत वरोधी सरगर्मियों में शामिल होने का इलज़ाम है. वो 1992 स जेल में है.

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