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हाशिमपुरा नरसंहार मामला: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की मुजरिमों की याचिका

Supreme court rejected plea
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Supreme court rejected plea
सुप्रीम कोर्ट ने हाशिमपुरा नरसंहार मामले में आरोपियों की याचिका खारिज करते हुए पीएसी के उन जवानों की राह कठीन कर दी है, जिन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. ये वो जवान हैं जिन्होंने हाईकोर्ट के सख्त रुख के बावजूद सरेंडर नहीं किया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों निरंजन लाल, महेश प्रसाद, जयपाल सिंह और समीउल्लाह की जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है.

जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस नवीन सिन्हा ने यह फैसला जमीयत उलेमा ए हिन्द के वकीलों के मुखालिफत के बाद सुनाया. जमीयत उलेमा ए हिन्द हाशिमपुरा के पीड़ित बाबुद्दीन और मुजीबुर्रहमान की तरफ से मुकदमें की पैरवी कर रही है. अदालत के इस फैसले पर जमीयत उलेमा ए हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने फैसले पर तसल्ली का इजहार किया है.

याद रहे कि दो माह पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने पीएसी के 16 रिटायर्ड जवानों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जो 1987 में हाशिमपुरा के 42 लोगों के कत्ल ए आम में शामिल थे. हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरोपी बुद्धि सिंह, वसंत वालिया, रामवीर सिंह और लीलाधर ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर करके गिरफ्तारी से छूट की मांग की थी, जबकि एक दूसरी याचिका निरंजन लाल वगैराह ने जमानत की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया. हालांकि फैसले को चैलेंज करने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है. जमीयत की तरफ से एडवोकेट शकील अहमद, एडवोकेट परवेज डबास, एडवोकेट जमील हुसैन, एडवोकेट सय्यद अहमद दानिश अदालत में पेश हुए.

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