तो क्‍या वाकई भैय्यूजी महाराज की मौत के पीछे इनका हाथ है

भैय्यूजी महाराज की मौत का मामला मध्‍यप्रदेश में सिर उठा चुका है, जिसे शासन-प्रशासन ने पूरी तरह दबा दिया था. पिछले 10 दिनों की तैयारी और विभिन्‍न जिलों में हुई मीटिंगों के बाद भैय्यूजी महाराज के करीब 200 समर्थक 3 दिसंबर को इंदौर पहुंचे. ये समर्थक महाराष्‍ट्र समेत विभिन्‍न राज्‍यों से आए थे. वैसे तो तैयारी इससे कहीं ज्‍यादा समर्थकों के आने की और रैली निकालने की थी लेकिन आचार संहिता लगी होने के कारण पुलिस-प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी.

आज फिर दूसरी पत्‍नी ने बनाए रखी दूरी

विभिन्‍न राज्‍यों से आए ये समर्थक भैय्यूजी महाराज के सुखलिया स्थित सूर्योदय आश्रम पर इकट्ठे हुए और वहां से डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा को इस केस की सीबीआई जांच की मांग कराने का ज्ञापन सौंपने गए. कमाल की बात ये है कि हजार किलोमीटर से ज्‍यादा का सफर तय करके पहुंचे इन समर्थकों का हौंसला बढ़ाने और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की बजाय भैय्यूजी महाराज की पत्‍नी ने घर पर बैठना ही उचित समझा. आयुषी ने बहाना बनाया कि भैय्यूजी महाराज की मां की तबियत ठीक नहीं है इसलिए वो डीआईजी को ज्ञापन सौंपने के वक्‍त उपस्थित नहीं रह पाएंगी. अब सवाल ये है कि क्‍या भैय्यूजी महाराज की मां की तबियत इतनी खराब थी कि वो उन्‍हें आधे घंटे के लिए भी नहीं छोड़ सकतीं. यदि वाकई में ऐसा था तो किसी डॉक्‍टर को क्‍यों नहीं बुलाया गया. या इसे ऐसा समझा जाए कि आयुषी खुद उनका ट्रीटमेंट करने में सक्षम हैं?

जाहिर सी बात है कि आयुषी के इन बहानों में कोई दम नहीं है. साफ है कि वो नहीं चाहती हैं कि इस मामले में आगे जांच हो. गौरतलब है कि इससे पहले भी पिछले हफ्ते जब भैय्यूजी महाराज के अनुयायिओं ने इंदौर आने की बात कही थी तब भी आयुषी चेन्‍नई जाने का बहाना बनाकर मुंबई चली गई थी. आयुषी का रवैया पहले ही संदेहास्‍पद था, इसके चलते कई बार उनके और विनायक के व्‍यवहार को लेकर सवालिया निशान उठाए जाते रहे हैं. लिहाजा समर्थकों का मानना है कि इन दोनों का इस मामले से दूरी बनाना दर्शाता है कि कहीं न कहीं भैय्यूजी महाराज की मौत में इनका हाथ है.

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समर्थकों ने आश्रम के संचालकों को लिया आड़े हाथों

समर्थकों ने आश्रम पहुंचकर जब गड़बडि़यां देखीं तो आश्रम संचालकों से जमकर सवाल-जबाव किए. समर्थकों ने भैय्यूजी महाराज की भोजन की थाली, कड़ा, चश्‍मा, घडि़यों आदि को लेकर पूछताछ की. जिसमें से कई चीजें अब गायब हो चुकी हैं.

शाम को समर्थक प्रेस क्‍लब में मीडिया से रूबरू हुए और वो तमाम तथ्‍य सामने रखे जिनके चलते उन्‍हें संदेह है कि यह आत्‍महत्‍या नहीं बल्कि हत्‍या है. जैसे घटनास्‍थ्‍ल पर सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों के बयानों में अंतर होना, भैय्यूजी महाराज को रिवॉल्‍वर किसने दी, कैसे उनकी छवि को पिछले कई महीनों से सुनियोजित तरीके से खराब किया जा रहा था, उनके सुसाइड नोट को लेकर भी कई सवाल हैं आदि.

इधर ट्रस्‍ट के सचिव तुषार पाटिल ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से लेकर पीएम नरेन्‍द्र मोदी, मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री, राज्‍यपाल, मुख्‍य सचिव, कलेक्‍टर तक के नाम पत्र लिखकर अपील की है कि जल्‍द से जल्‍द ट्रस्‍ट के आजीवन सदस्‍यों की आम सभा बुलाई जाए. साथ ही इस बात पर निर्णय लिया जाए कि आगे संस्‍था का संचालन किन नीतियों के तहत किया जाएगा. यदि आम सभा के निर्णयोंके विपरीत कोई भी बदलाव ट्रस्‍ट के अंदर किया जाता है तो वो सचिव होने के नाते इसकी शिकायत प्रशासन से करेंगे.

अब ये देखना दिलचस्‍प होगा कि मध्‍यप्रदेश की राज्‍यपाल आनंदी बेन पटेल इस मामले में कितनी रूचि दिखाती हैं क्‍योंकि वो भैय्यूजी महाराज की समर्थक रही हैं और गुजरात की मुख्‍यमंत्री बनते ही उनसे आर्शीवाद लेने भी आई थीं.

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