आखिर क्‍यों फंसा पेंच पप्पू और अरुण के टिकट  में

बिहार सूबे में महागठबंधन और एनडीए में सीट बंटवारे और टिकट को लेकर तो बहुत सारे किंतु -परंतु लगे ही हुए हैं लेकिन इन सियासी झंझटों के बीच मधेपुरा सांसद पप्पू यादव और जहानाबाद सांसद डॉ. अरुण कुमार के टिकट को लेकर सत्ता के गलियारों में चर्चा गरम है. साल 2014 में पप्पू यादव राजद के टिकट पर और अरुण कुमार रालोसपा के टिकट पर दिल्ली गए थे. लेकिन बहुत जल्द ही इन दोनों नेताओं का अपने-अपने दलों से मोह भंग हो गया और इन्होंने अपनी अलग राह चुन ली. पप्पू यादव अब जन अधिकार पार्टी के प्रमुख हैं तो अरुण कुमार रालोसपा अरुण गुट के नेता हैं. दोनों नेताओं को एक बार फिर जनता की अदालत में जाना है लेकिन किस राजनीतिक दल की गाड़ी पर सवार होकर ये दोनों दिल्ली जाने के लिए पसीना बहाऐंगे यह तय नहीं हो पा रहा है. लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू है पर इन दोनों नेताओं के टिकट में इतने सारे पेंच हैं की इनका सुलझना बहुत ही मुश्किल है.

जानकार बताते हैं कि पप्पू यादव कांग्रेस के टिकट पर और अरुण कुमार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं. कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के साथ पप्पू यादव मिल चुके हैं और लगातार संपर्क में हैं. कांग्रेस को भी पप्पू को साथ लेने में दिक्कत नहीं है लेकिन सबसे बड़ा पेंच राजद की ओर से है. तेजस्वी यादव कई दफा कह चुके हैं कि पप्पू यादव को लेकर वह कोई बात नहीं करेंगे. तेजस्वी यादव आज की तारीख में पप्पू यादव से किसी भी तरह का संबंध रखने के खिलाफ हैं और तेजस्वी को नाराज कर कांग्रेस पप्पू यादव के लिए कोई रास्ता बनाएगी ऐसा लगता नहीं है. लेकिन जनअधिकार पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता राधवेंद्र कुशवाहा कहते हैं कि हमलोग धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूत करना चाहते हैं और इसके लिए राष्‍ट्रीय स्तर पर भाजपा को परास्त करना जरूरी है. जहां तक सवाल पप्पू यादव के टिकट का है तो इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी. हमारे नेता कांग्रेस के प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के लगातार संपर्क में हैं. नरेंद्र मोदी को हटाने के लिए धर्मनिरपेक्ष दलों के नेता एक मंच पर आऐंगे ऐसी मुझे उम्मीद है.

बहरहाल पार्टी प्रवक्ता जो कहें लेकिन तेजस्वी यादव आसानी से पप्पू यादव के लिए महागठबंधन का दरवाजा खोल देंगे ऐसा लगता नहीं है. जहां तक डॉ अरुण कुमार के टिकट का सवाल है तो वह इसके लिए सभी चौखट पर हाजरी लगा चुके हैं. उपेंद्र कुषवाहा के साथ अनबन के बाद अरुण बाबू टिकट के लिए जी जान से जुटे हुए हैं. भाजपा उनकी पहली पसंद है लेकिन जहानाबाद सीट जदयू के खाते में जाने के कारण पेंच फंस गया है. एक मात्र उम्मीद नवादा सीट को लेकर हैं लेकिन यहां पहले से ही भूमिहार नेताओं की बड़ी फौज टिकट के इंतजार में खड़ी है. जदयू अरुण कुमार के लिए जहानाबाद सीट छोड़ देगी ऐसा लगता नहीं है. वैसे भी अरुण कुमार लगातार नीतीश कुमार के खिलाफ बोलते आ रहे हैं. वहीं हाल राजद खेमे का भी है. नवादा से राजद की ओर से कौशल यादव का टिकट पक्का माना जा रहा है तो जहानाबाद से सुरेंद्र यादव का. ऐसे में अरुण कुमार के लिए रास्ता कठिन ही लगता है. लेकिन चूंकि राजनीति की दशा और दिशा पल-पल बदलती है इसलिए इन दोनों नेताओं ने उम्मीद नहीं छोड़ी है.

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