ऑस्ट्रेलिया के स्कूली छात्रों ने पढ़ाया पर्यावरण बचाने का सबक़

ऑस्ट्रेलिया के हजारों स्कूली छात्रों ने 30 दिसम्बर को सडकों पर मार्च किया तथा अपनी अपनी कक्षाओं का बहिस्कार किया. उनकी मांग थी कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार जलवायु परिवर्तन को गंभीरता से ले और उसे रोकने के लिए ठोस कार्रवाई करे.

यह हड़ताल जिसे “स्ट्राइक 4 क्लाइमेट एक्शन” का नाम दिया गया है, स्वीडेन की 15 वर्षीय छात्रा ग्रेटा थनबर्ग से प्रेरित है. इस वर्ष स्वीडेन में सबसे अधिक गर्मी पड़ी थी जिसे लेकर ग्रेटा ने पिछले सितम्बर महीने में पाने स्कूल का बहिस्कार कर एक दिन के लिए स्वीडिश पार्लियामेंट के सामने धरना दिया था.

स्ट्राइक 4 क्लाइमेट एक्शन के तहत ऑस्ट्रेलिया की राजधानी के साथ साथ देश के सभी प्रमुख शहरों में स्कूली छात्रों ने अपनी कक्षाओं का बहिस्कार किया और जगह-जगह प्रदर्शन किये. इन शहरों में बल्लार्ट, न्यूकासेल, टाउनसविल और क्रेन शामिल थे.

तटीय शहर होबार्ट में छात्रों ने एक विशाल विरोध मार्च निकाला. उसी तरह सिडनी का मार्टिन प्लेस भी हजारों प्रदर्शनकारी स्कूली छात्रों से भरा हुआ था. मेलबोर्न में इन प्रदर्शनों के कारण ट्रैफिक ठप रही.

एक हफ्ते पहले प्रधानमंत्री स्कॉट मोरिसन ने छात्रों से अपील की थी वे किसी तरह के विरोध प्रदर्शन या स्ट्राइक में हिस्सा न लें और “एक्टिविस्ट”(सक्रियतावादी) न बनें.

उसी तरह मोरिसन के संसाधन मंत्री मैट कैनवन ने भी छात्रों को हड़ताल से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा था कि यदि छात्र माइनिंग के तरीके और विज्ञान सीखें तो उन्हें अच्छा लगेगा. कैनवन का कहना था ये ऐसी चीज़ें हैं जो कम उम्र के लोगों को प्रोत्साहित करती हैं और देश को आगे बढ़ाती हैं. हड़ताल करने से अधिक से अधिक यह सीखा जा सकता है कि कैसे नौकरियों के लिए लाइन में खड़ा हुआ जाए.

गौर तलब बात यह भी है कि ऑस्ट्रेलिया में पर्यावरण को लेकर पिछले कुछ सालों में बड़े बड़े विरोध प्रदर्शन हुए हैं, खास तौर पर भारतीय कंपनी अदानी ग्रुप को दिए गए कोल माइनिंग के कांटेक्ट को लेकर.

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