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नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ एजीपी ने असम सरकार से समर्थन वापस लिया

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नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 को लेकर दिसपुर से दिल्‍ली तक घमासान मचा हुआ है. इस बीच असम गण परिषद (एजीपी) ने नागरिकता संशोधन विधेयक के मुद्दे पर सोमवार को असम की भाजपा तीन गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का ऐलान किया और कहा कि उसने प्रस्‍तावित विधेयक को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार को समझाने की भरसक कोशिश लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली. केंद्र गृह मंत्री राजनाथ सिंह से यहां मुलाकात के बाद, एजीपी अध्‍यक्ष अतुल बोरा ने कहा कि हमने केंद्र को समझाने की कोशिश की कि यह विधेयक असम समझौते के खिलाफ है और राष्‍ट्रीय नागरिक पंजी को अपडेट करने की चल रही प्रक्रिया को निरर्थक बना देगा, लेकिन सिंह ने हमसे स्‍पष्‍ट कहा कि इसे कल लोकसभा में पारित कराया जाएगा. इसके बाद, गठबंधन में रहने का सवाल ही पैदा नहीं होता है. यह विधेयक बांग्‍लादेश, पाकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान के गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने के लिए लाया गया है. अगप और कई अन्‍य पार्टियों तथा संगठनों का दावा है कि इसका संवेदनशील सीमावर्ती राज्‍य की जनसांख्यिकी पर विपरीत असर पड़ेगा.

बहरहाल, अगप के समर्थन वापसी से असम की सर्वानंद सोनोवाल नीत सरकार पर तत्‍काल कोई असर नहीं पड़ेगा, क्‍योंकि विधानसभा में भाजपा के 61 सदस्‍य हैं और उसे बोडोलैंड पीपुल्‍स फ्रंट के 12 विधायकों और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन प्राप्‍त है. असम में 126 सदस्‍यीय विधानसभा में अगप के 14 विधायक हैं जिनमें से बोरा समेत तीन मंत्री हैं. उनसे मंत्री पद से इस्‍तीफा देने के बारे में पूछा गया तो बोरा ने कहा कि हम गुवाहाटी पहुंचने के बाद यह करेंगे. इसके बाद बोरा ने कहा कि हमें लगता है कि भाजपा का विधेयक के प्रति जिस तरह का रुख है उससे हमारे साथ धोखा हुआ है क्‍योंकि जब हम गठबंधन में आए थे तो हमें यकीन दिलाया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अवैध घुसपैठियों के मुद्दे का हल निकालने के लिए प्रतिबद्ध थे. हमने ऐसा सपने में भी नहीं सोचा था कि भाजपा असम के लोगों के साथ ऐसा करेगी. हमें भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल होने का पछतावा है.

अगप और असम के अन्‍य समूह कह रहे हैं कि विधेयक के प्रावधान 1985 में हुए असम समझौते को निरर्थक बना देंगे. समझौता मार्च 1971 के बाद राज्‍य में प्रवेश करने वाले सभी अवैध घुसपैठियों को निर्वासित करने की बात कहता है, भले ही उनका धर्म कुछ भी हो. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, माकपा समेत कुछ अन्‍य पार्टियां लगातार इस विधेयक का विरोध कर रही हैं. उनका दावा है कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती है क्‍योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. असम के कृषि मंत्री ने दावा किया कि विधेयक के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हें और ऐसा पहली बार है कि मीडिया भी इसके खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सड़कों पर आ गया है. पूर्वोत्‍तर के आठ प्रभावशाली छात्र निकायों के अलावा असम के 40 से ज्‍यादा समूहों ने नागरिकता अधिनियम में संशोधन करने के सरकार के कदम के खिलाफ मंगलवार को बंद बुलाया है.

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