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पूर्वोत्‍तर से अफसपा हटाने की सरकार की कोई योजना नहीं है : रिजिजु

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केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने मंगलवार को संसद में बताया कि विवादास्पद कानून आर्म्‍ड फोर्सेस स्‍पेशल पावर एक्‍ट- 1958 पूर्वोत्‍तर से हटाने की सरकार के पास कोई योजना नहीं है. यह बात उन्‍होंने लोकसभा में एक लिखित पश्‍न का उत्‍तर देते हुए कहा. गृह राज्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान में, अफसपा पूरे असम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश क्षेत्रों में लागू है. अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती असम के जिलों में आठ पुलिस स्टेशनों में भी यह कानून लागू है.

मणिपुर और असम को अशांत क्षेत्र घोषित करने वाली अधिसूचनाएँ राज्य सरकारों द्वारा जारी की गई हैं.  गृह राज्‍य मंत्री ने कहा कि नागालैंड सरकार ने अफसपा 1958  के तहत नागालैंड को अशांत क्षेत्र घोषित करने की अधिसूचना के विस्तार का समर्थन नहीं किया है.

गौरतलब है कि अभी हाल में फिर नगालैंड को विवादास्पद कानून आर्म्‍ड फोर्सेस पावर एक्‍ट (अफस्‍पा) के तहत छह महीने तक “अशांत क्षेत्र” घोषित किया गया था. एक अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने कहा था केंद्र सरकार की राय है कि नागालैंड के पूरे राज्य में शामिल सभी क्षेत्र अशांत और खतरनाक स्थिति में है कि लोगों की रक्षा के लिए सशस्त्र बलों का उपयोग आवश्यक है. इसलिए, आर्म्‍ड फोर्सेस स्‍पेशन पावर एक्‍ट 1958  की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि यह राज्य एक अशांत क्षेत्र है. अधिसूचना के अनुसार, 30 दिसंबर, 2018 से छह महीने की अवधि के लिए इस राज्‍य में आर्म्‍ड फोर्सेस स्‍पेशल पावर एक्‍ट लागू करेगा.

ज्ञात हो कि इस कानून के तहत, जो सुरक्षा बलों को कहीं भी ऑपरेशन करने और बिना किसी पूर्व सूचना के किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार देता है. आर्म्‍ड फोर्सेस स्‍पेशन पावर एक्‍ट नागालैंड में कई दशकों से लागू है. 3 अगस्त, 2015 को नागा विद्रोही समूह एनएससीएन-आईएम के महासचिव थुइन्गालेंग मुइवा और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में सरकारी वार्ताकार आर एन रवि द्वारा एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भी यह कानून केंद्र की ओर से वापस नहीं लिया गया है.

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