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यहां लावारिस पड़े हैं हजारों करोड़ रूपए, लेने नहीं आ रहे दावेदार

unclaimed money
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ज्‍यादा से ज्‍यादा रूपए कमाना हर इंसान का मकसद होता है और वह पूरी जिंदगी रूपयों के पीछे भागता भी है. यदि किसी को बैठे-बिठाए ऐसे ही रूपए मिल जाएं तो फिर बात ही क्‍या. लेकिन कई बार इसका उल्‍टा होता है. यानि कि रूपया इंतजार में बैठा रहता है कि कोई तो उसे लेने आए. जी हां, सुनने में जरूर अजीब लग रहा होगा लेकिन ये बात सच है. हमारे देश में ही कुछ जगह ऐसी ही हैं, जहां हजारों करोड़ रूपया लावारिस पड़ा है लेकिन उन्‍हें लेने के लिए कोई दावेदार नहीं आ रहा है.

हम बात कर रहे हैं डाकघरों और सावर्जनिक क्षेत्र की कंपनी भी शामिल हैं. देश के डाकघरों में कुल 9,395 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं, जिनका कोई दावेदार ही नहीं है. सबसे ज्‍यादा 2,429 करोड़ रूपए किसान विकास पत्र के खातों में लावारिस पड़े हैं. इसके बाद मंथली इनकम स्कीम में 2,056 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं. इसी तरह, एनएससी में भी 1,888 करोड़ रुपये का दावा करने वाला कोई नहीं है. इन डाकघरों में पड़े लावारिस पैसों में से लगभग आधे पैसे पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश के पोस्ट ऑफिस में जमा हैं.

गौरतलब है कि कुछ समय पहले इसी तरह भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के खातों में भारी मात्रा में रकम दावारहित होने की बात सामने आई थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च, 2018 को दावारहित (लावारिस) कुल रकम 15,166.47 करोड़ रुपये थी. ऐसी कंपनियों की सूची में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी जीवन बीमा निगम शीर्ष पर है, जिसके पास कुल 10,509 करोड़ रुपये का कोई दावेदार नहीं है, जबकि निजी कंपनियों के पास ऐसी रकम 4,657.45 करोड़ रुपये है.

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