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आलोक वर्मा को इन कारणों की वजह से सीबीआई चीफ के पद से धोना पड़ा हाथ

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई डायरेक्टर के तौर पर बहाली के 48 घंटों के भीतर सिलेक्शन कमिटी ने आलोक वर्मा को पद से हटा दिया. पीएम मोदी की अगुआई वाली और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे व सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस ए. के. सीकरी की सदस्यता वाली हाई-पावर्ड कमिटी ने सीवीसी जांच रिपोर्ट के आधार पर वर्मा की सीबीआई डायरेक्टर पद से परमानेंट छुट्टी कर दी.

आइए अब आपको बताते हैं वो कारण जिनकी वजह से आलोक वर्मा को अपने पद से हाथ धोना पड़ा.

1. आलोक वर्मा ने मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ जांच प्रभावित की. कारोबारी सतीश बाबू सना को आरोपी बनाने की मंजूरी नहीं दी.

2. सीवीसी को दो करोड़ रुपये रिश्वत लेने के भी सुबूत मिले हैं.

3. रॉ द्वारा पकड़े गए एक फोन कॉल में घूस लेने का जिक्र था.

4. गुरुग्राम में जमीन खरीद में आलोक वर्मा का नाम आया. जिसमें 36 करोड़ का लेनदेन हुआ है.

5. लालू से जुड़े आईआरटसीटीसी केस में अफसर को बचाने के लिए उसका नाम एफआईआर में शामिल नहीं किया.

6. आलोक वर्मा दागी अफसरों को सीबीआई लाने की कोशिश कर रहे थे.

बता दें कि सीबीआई यानी केंद्रीय जांच ब्यूरो निदेशक पद से हटाए जाने के बाद आलोक वर्मा को अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड का महानिदेशक बनाया गया है.

वहीं, इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए आलोक वर्मा ने गुरुवार देर रात पीटीआई को दिए एक बयान में कहा कि ‘सीबीआई उच्च सार्वजनिक स्थानों में भ्रष्टाचार से निपटने वाली एक प्रमुख जांच एजेंसी है, एक ऐसी संस्था है जिसकी स्वतंत्रता को संरक्षित और सुरक्षित किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि इसे बिना किसी बाहरी प्रभावों यानी दखलअंदाजी के कार्य करना चाहिए. मैंने संस्था की साख बनाए रखने की कोशिश की है, जबकि इसे नष्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसे केंद्र सरकार और सीवीसी के 23 अक्टूबर, 2018 के आदेशों में देखा जा सकता है जो बिना किसी अधिकार क्षेत्र के दिए गए थे और जिन्हें रद्द कर दिया गया.’

 

 

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