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महान देश की महान संसद अति महान उदाहरण आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ रही है. संसद को न अपनी गरिमा का ख्याल है, न वह लोगों की ज़िंदगी में आ रही मुश्किलों से संवेदना रखती है और न ही वह उन सवालों को उठाती है, जिन सवालों का रिश्ता इस देश के ग़रीब से [...]

आम चुनाव सिर पर है. यूपीए और एनडीए इसके लिए अपने-अपने तरीके से तैयारियां कर रहे हैं. वहीं देश के सामने अनगिनत समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं और हमारी अर्थव्यवस्था की हालत भी अच्छी नहीं है. पेश है एक विश्लेषण. चुनाव नज़दीक आता दिख रहा है. वैसे भी, 2014 में आम चुनाव होना है, लेकिन [...]

मैं पिछले दिनों अन्ना हज़ारे की यात्रा में उनके साथ था. मुझे ऐसा लगा कि वे शायद दोबारा इतिहास रचने के रास्ते पर निकल सकते हैं. उनकी यात्रा अमृतसर से शुरू हुई और पंजाब होते हुए हरियाणा पहुंची. हरियाणा के बाद वह उत्तर प्रदेश गई. इस यात्रा में पहली खास चीज यह देखने में आई [...]

अन्‍ना, मीडिया, राजनीतिक दल और जनता

देश में एक नई सुबह लाएंगे जैसा संकल्प लेने वाले अन्ना हज़ारे जब सड़कों पर निकले, तो उनके लिए उमड़े अपार जनसमर्थन को देखकर राजनीतिक दलों में खौफ छा गया और उन्होंने मीडिया के माध्यम से इस 75 वर्षीय संत, राष्ट्रभक्त एवं समाजसेवी के हौसले पर हमले का षड्यंत्र रच डाला, लेकिन क्या कहीं कोई [...]

देश के प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस में ऊहापोह जारी है. राहुल गांधी बार-बार कह रहे हैं कि वह प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते, बल्कि पार्टी चलाना चाहते हैं और इसीलिए उन्होंने औपचारिक रूप से कांग्रेस के उपाध्यक्ष पद को स्वीकारा है. राहुल इस पद को यदि न भी स्वीकार करते, तब भी लोग कांग्रेस में [...]

केजरीवाल का असहयोग आंदोलन : ...ताकि राजनीति जनता के लिए हो

बिजली और पानी के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने पिछले दिनों दिल्ली के सुंदरनगरी इला़के में अनिश्‍चितकालीन अनशन किया. उन्होंने यकीन दिलाया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वह बिजली और पानी की दरों में कटौती करके जनता को राहत देंगे. केजरीवाल के इस आंदोलन का असर [...]

जनतंत्र यात्रा 2013 – अब बदलाव ज़रूरी है

अन्ना हज़ारे की जनतंत्र यात्रा सुपर फ्लॉप हो सकती है, क्योंकि कई लोग यह मानते हैं कि हिंदुस्तान के लोगों को देश से कोई मतलब नहीं है. उन्हें अपने पेट के लिए रोटी और अपने भविष्य की चिंता ज़्यादा होती है. हर जगह लोग जाति और संप्रदाय में बंटे हैं. हर जगह बैकवर्ड-फॉरवर्ड की लड़ाई [...]

पत्रकारिता प्रतिस्पर्धा का पेशा है. प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट, स्टोरी और स्कूप के क्षेत्र में होती है. प्रतिस्पर्धा निर्भीकता में होती है, साहस में होती है और पत्रकारिता के पेशे के ये गुण आभूषण होते हैं, क्योंकि संपादक इन्हीं गुणों के आधार पर अपने साथियों या साथ काम करने वालों की समीक्षा करता है. लेकिन आज इससे [...]

एक चुनौतीपूर्ण समय

देश एक कठिन समय से गुज़र रहा है, मुद्दे कई हैं, जिन्हें चुनाव से पहले तक निपटाना है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ये मुद्दे समय रहते निपट जाएंगे? चौथी दुनिया का विश्‍लेषण… अगर रिश्‍वत की बात छोड़ भी दी जाए, तो भी एक सवाल सामने खड़ा दिखाई पड़ता है. प्रत्येक वीवीआईपी हेलिकॉप्टर [...]

यह लोगों की परीक्षा का दिन है

देश में नए राजनीतिक हालात पैदा हो रहे हैं, लेकिन उस पर मुंबई, कोलकाता, चेन्नई एवं बंगलुरु में बैठे बड़े पैसे वाले और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों की राजधानी में बैठे राजनीति चलाने वाले राजनीतिक नेता ध्यान नहीं दे रहे हैं. मैं न नक्सलवाद की वकालत कर रहा हूं, न माओवाद की और न विद्रोह [...]

टीम अन्ना-रामदेव : मतभेद भी है, मनभेद भी है

भारतीय परंपरा के अनुसार खुशी बांटने के लिए साल में एक बार सालगिरह मनाई जाती है, वहीं दु:ख बांटने के लिए बरसी मनाई जाती है. 3 जून, 2012 को जंतर-मंतर पर बाबा रामदेव का एक दिन का अनशन हुआ और ठीक एक साल पहले 4-5 जून की मध्यरात्रि में रामलीला मैदान में आमरण अनशन पर बैठे रामदेव और उनके हज़ारों समर्थकों पर पुलिसिया डंडा चला था.

पिछले साल देश भ्रष्टाचार और विदेश में रखे काले धन की चर्चा में व्यस्त रहा. कुछ मंत्री जेल गए और अन्ना हज़ारे ने भ्रष्टाचार के खिला़फ आंदोलन शुरू किया. हालांकि भ्रष्टाचार एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है, देश में रोजग़ार के अवसरों का अभाव.

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