दूसरा पहलू मैं पक्का महाल हूं

मैं पुरातन काशी की पहचान हूं. मैंने अपनी गलियों में काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक परम्पराओं को आकार लेते देखा है. खांटी

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इस धार्मिक आयोजन को वैश्विक स्तर पर ऐतिहासिक बनाएगी योगी सरकार

इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने के बाद अब यहां होने वाले कुम्भ को भी ऐतिहासिक बनाने की तैयारी है.

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कराची में भी आजादी से पहले खेली जाती थी कुमाऊं की अनोखी रामलीला

उत्तराखंड के कुमाऊं की पहाडि़यों में घूमने के लिए वैसे तो अप्रैल और मई का महीना अच्छा माना जाता है,

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धार्मिक से लेकर सांस्कृतिक हर तरह की झलक देखने को मिलेगी जयपुर से जोधपुर की रोड ट्रिप पर

राजस्थान हमेशा से ही घूमने-फिरने वाली खूबसूरत जगहों की लिस्ट में लोगों का फेवरेट रहा है. जहां आप धार्मिक से

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भारत के सबसे बेजोड़ वास्तुकला का नमूना है दौलताबाद किला

औरंगाबाद खासतौर से अपने अजंता और ऐलोरा गुफाओं के लिए जाना जाता है लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से भी ये जगह

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साधना व तंत्र पेंटिंग्स का बड़ा केन्द्र है बिहार का दरभंगा

मिथिलांचल और खासकर दरभंगा में तंत्र पेंटिंग्स की दुनिया से अभी बहुत लोग अनजान हैं. तंत्र पेंटिंग्स में शरीर पर

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पुरातत्व वाले मिटा ही डालेंगे महोबा का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर!

महोबा के लोग मुगल शासक कुतुबुद्दीन ऐबक को खलनायक मानते हैं. अहमक ऐबक ने महोबा के ऐतिहासिक सूर्य मंदिर को

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महान शिक्षाविद, प्रख्यात दार्शनिक और कुशल वक्ता डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने को प्रसिद्ध दार्शनिक बर्टेड रसेल ने विश्व के

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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍वविद्यालय का 80वां वार्षिकोत्सव

नई दिल्ली : हाल ही में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍वविद्यालय का 80वां वार्षिकोत्सव माउंट आबू शहर में मनाया गया. देश-विदेश

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हिंसा हमारी संस्कृति का अंग नहीं है

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के परिप्रेक्ष्य में राहुल गांधी का हालिया बयान सुनाने के बाद एक विषय दिमाग में उथल-पुथल मचाने लगा

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ग्रामसभा के अधिकार

  1.            ग्राम संबंधी भूमि व्यवस्था एवं भू-राजस्व संबंधी जो भी अभिलेख, अधिकार आदि आज तहसील (तालुका) या अंचल को

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प्रकृति से जु़डी है हमारी संस्कृति

इंसान ही नहीं दुनिया की कोई भी नस्ल जल, जंगल और ज़मीन के बिना ज़िंदा नहीं रह सकती. ये तीनों हमारे जीवन का आधार हैं. यह भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि उसने प्रकृति को विशेष महत्व दिया है. पहले जंगल पूज्य थे, श्रद्धेय थे. इसलिए उनकी पवित्रता को बनाए रखने के लिए मंत्रों का सहारा लिया गया. मगर गुज़रते व़क्त के साथ जंगल से जु़डी भावनाएं और संवेदनाएं भी बदल गई हैं.

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फिल्‍मों में लोक संगीत

भारत गांवों का देश है. गांवों में ही हमारी लोक कला और लोक संस्कृति की पैठ है. लेकिन गांवों के शहरों में तब्दील होने के साथ-साथ हमारी लोककलाएं भी लुप्त होती जा रही हैं. इन्हीं में से एक है लोक संगीत. संगीत हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. संगीत के बिना ज़िंदगी का तसव्वुर करना भी बेमानी लगता है. संगीत को इस शिखर तक पहुंचाने का श्रेय बोलती फिल्मों को जाता है.

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वजूद खो रही है भाषाएं

जब से इंसान ने एक दूसरे को समझना शुरू किया होगा, तभी से उसने भाषा के महत्व को भी समझा और जाना होगा. भाषा सभ्यता की पहली निशानी है. किसी भी समाज की संस्कृति और सभ्यता की जान उसकी भाषा में ही बसी होती है. किसी भाषा का खत्म होना, उस समाज का वजूद मिट जाना है, उस समाज की संस्कृति और सभ्यता का इतिहास के पन्नों में सिमट जाना है. इंसान के आधुनिक होने में उसकी भाषा का सबसे ब़डा योगदान रहा होगा, क्योंकि इसके ज़रिये ही उसने अपनी बात दूसरों तक पहुंचाई होगी.

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राजस्‍थान का नंदीग्राम नवलगढ़ : सीमेंट फैक्‍ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण

बिन पानी सब सून. राजस्थान के अर्द्ध मरुस्थलीय इलाक़े शेखावाटी की हालत कुछ ऐसी ही है. यहां के किसानों को बोरवेल लगाने की अनुमति नहीं है. भू-जल स्तर में कमी का खतरा बताकर सरकार उन्हें ऐसा करने से रोकती है. दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने अकेले झुंझुनू के नवलगढ़ में तीन सीमेंट फैक्ट्रियां लगाने की अनुमति दे दी है. इसमें बिड़ला की अल्ट्राटेक और बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट कंपनी शामिल है.

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मन को छूते मेरे गीत

गीत मन के भावों की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति हैं. साहित्य ज्योतिपर्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक मेरे गीत में सतीश सक्सेना ने भी अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर गीतों की रचना की है. वह कहते हैं कि वास्तव में मेरे गीत मेरे हृदय के उद्‌गार हैं. इनमें मेरी मां है, मेरी बहन है, मेरी पत्नी है, मेरे बच्चे हैं. मैं उन्हें जो देना चाहता हूं, उनसे जो पानी चाहता, वही सब इनमें है.

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अ़खबारों से ग़ायब होता साहित्य

साहित्य समाज का आईना होता है. जिस समाज में जो घटता है, वही उस समाज के साहित्य में दिखलाई देता है. साहित्य के ज़रिये ही लोगों को समाज की उस सच्चाई का पता चलता है, जिसका अनुभव उसे खुद नहीं हुआ है. साथ ही उस समाज की संस्कृति और सभ्यता का भी पता चलता है. जिस समाज का साहित्य जितना ज़्यादा उत्कृष्ट होगा, वह समाज उतना ही ज़्यादा सुसंस्कृत और समृद्ध होगा.

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कैसे बचेगी गंगा-जमुनी तहजीब

गंगा की निर्मलता तभी संभव है, जब गंगा को अविरल बहने दिया जाए. यह एक ऐसा तथ्य है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है, लेकिन गंगा की स़फाई के नाम पर पिछले 20 सालों में हज़ारों करोड़ रुपये बहा दिए गए और नतीजे के नाम पर कुछ नहीं मिला. एक ओर स़फाई के नाम पर पैसों की लूटखसोट चलती रही और दूसरी ओर गंगा पर बांध बना-बनाकर उसके प्रवाह को थामने की साजिश होती रही.

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ये इल्म का सौदा, ये रिसाले, ये किताबें

बीसवीं सदी के मशहूर शायरों में जां निसार अख्तर को शुमार किया जाता है. उनका जन्म 14 फरवरी, 1914 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक सुन्नी मुस्लिम परिवार में हुआ. उनके पिता मुज़्तर खैराबादी मशहूर शायर थे. उनके दादा फज़ले-हक़ खैराबादी मशहूर इस्लामी विद्वान थे. जां निसार अख्तर ने ग्वालियर के विक्टोरिया हाई स्कूल से दसवीं पास की. इसके बाद आगे की प़ढाई के लिए वह अलीग़ढ चले गए, जहां उन्होंने अलीग़ढ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री हासिल की.

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उत्तराखंडः पिंडरगंगा घाटी, ऐसा विकास किसे चाहिए

पिंडरगंगा घाटी, ज़िला चमोली, उत्तराखंड में प्रस्तावित देवसारी जल विद्युत परियोजना के विरोध में वहां की जनता का आंदोलन जारी है. गंगा की सहायक नदी पिंडरगंगा पर बांध बनाकर उसे खतरे में डालने की कोशिशों का विरोध जारी है. इस परियोजना की पर्यावरणीय जन सुनवाई में भी प्रभावित लोगों को बोलने का मौक़ा नहीं मिला. आंदोलनकारी इस परियोजना में प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं.

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मैंने तो अपनी भाषा को प्यार किया है

हर भाषा की अपनी अहमियत होती है. फिर भी मातृभाषा हमें सबसे प्यारी है. क्योंकि उसी ज़ुबान में हम बोलना सीखते हैं. बच्चा सबसे पहले मां ही बोलता है. इसलिए भी मातृभाषा हमें सबसे ज़्यादा प्रिय है. लेकिन देखने में आता है कि कुछ लोग जिस भाषा के सहारे ज़िंदगी बसर करते हैं यानी जिस भाषा में लोगों से संवाद क़ायम करते हैं, उसी को तुच्छ समझते हैं.

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वैजयंती माला : अभिनय और नृत्य का संगम

दक्षिण भारत की कई अभिनेत्रियों ने हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय की अपिट छाप छो़डी है. उनके सौंदर्य, नृत्य कौशल और अभिनय ने हिंदी सिनेमा के दर्शकों का मन मोह लिया और वे यहां भी उतनी ही कामयाब हुईं, जितनी दक्षिण भारतीय फिल्मों में. इन अभिनेत्रियों की लंबी फेहरिस्त है, जिनमें से एक नाम है वैजयंती माला का. वैजयंती माला में वह सब था, जो उन्हें हिंदी सिनेमा में बुलंदियों तक पहुंचा सकता था.

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश : दुधारू पशुओं की क़त्लगाह

दोआब स्थित मेरठ और उसके आसपास के क्षेत्रों में कभी दूध-दही की नदियां बहती थीं. बुलंदशहर, बाग़पत एवं मुज़फ्फरनगर में डेयरी उद्योग चरम पर था. पशुपालन और दुग्धोपार्जन को गांवों का कुटीर उद्योग माना जाता था, लेकिन जबसे यहां अवैध पशु वधशालाएं बढ़ीं, तबसे दूध-दही की नदियों वाले इस क्षेत्र में मांस और शराब का बोलबाला हो गया.

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हज़ारों साल पुराना मक़बरा

मिस्र में पुरातत्वविदों ने चार हज़ार साल पुराने एक मक़बरे का पता लगाया है. इसमें पत्थर की एक पट्टिका पाई गई है, जिस पर अंतिम संस्कार से संबंधित प्राचीन आख्यान खुदे हुए हैं. मिस्र के पुरातत्व मंत्री मुहम्मद इब्राहिम ने कहा है, कई वर्षों के दौरान पहली बार ऐसा हुआ है जब इस तरह के एक संरक्षित मक़बरे को खोजा गया है.

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मदरसों के बच्चे आधुनिक शिक्षा से वंचित हैं

मुसलमान चाहते हैं कि उनके बच्चे आधुनिक शिक्षा ग्रहण करें, ताकि आज के प्रतिस्पर्द्धा के दौर में वे किसी से पीछे न रहें. सरकार भी चाहती है कि कुछ ऐसा हो, लेकिन समुदाय के बुद्धिजीवियों एवं उलेमाओं को यह म़ंजूर नहीं है.

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चांद तन्हा, आसमां तन्हा

बहुत कम लोग जानते हैं कि सिने जगत की मशहूर अभिनेत्री एवं ट्रेजडी क्वीन के नाम से विख्यात मीना कुमारी शायरा भी थीं. मीना कुमारी का असली नाम महजबीं बानो था. एक अगस्त, 1932 को मुंबई में जन्मी मीना कुमारी के पिता अली ब़क्श पारसी रंगमंच के जाने-माने कलाकार थे.

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